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Pranpur: जहां हर बार पलटता है सियासी पासा

Updated at : 10 Jul 2025 9:22 PM (IST)
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बिहार विधानसभा

बिहार विधानसभा

Pranpur Vidhan Sabha Chunav 2025: प्राणपुर विधानसभा सीट बिहार की उन चंद सीटों में से एक है, जहां हर चुनाव में रोमांच बना रहता है। यहां मुस्लिम, यादव और रविदास मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। 1977 से अब तक हुए 10 चुनावों में सत्ता का पलड़ा बार-बार बदलता रहा है।

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Pranpur Vidhan Sabha Chunav 2025: बिहार की प्राणपुर विधानसभा सीट कटिहार लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। यह सीट हमेशा से सियासी रूप से बेहद रोमांचक रही है।

1977 में यहां से जनता पार्टी के महेंद्र नारायण यादव ने जीत हासिल की थी। 1980 और 1985 में कांग्रेस के मोहम्मद शकूर और मंगन इंसान विधायक बने। 1990 और 1995 में जनता दल से महेंद्र नारायण यादव ने वापसी की।

2000 में बीजेपी के विनोद कुमार सिंह ने पहली बार जीत दर्ज की। हालांकि, 2005 में यह सीट फिर आरजेडी के खाते में गई और महेंद्र नारायण यादव ने दोबारा जीत हासिल की। 2010 और 2015 में विनोद कुमार सिंह ने दोबारा बीजेपी को जीत दिलाई। उनके निधन के बाद 2020 में उनकी पत्नी निशा सिंह को बीजेपी ने प्रत्याशी बनाया, और उन्होंने कांग्रेस के तौकीर आलम को महज 972 वोटों से हराया।

2015 में विनोद कुमार सिंह ने एनसीपी की इशरत परवीन को 7,471 वोटों से हराया था, वहीं 2010 में उन्होंने सिर्फ 666 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। यह सीट लगातार कांटे की टक्कर का गवाह रही है।
यहां मुस्लिम समुदाय निर्णायक भूमिका में है, जबकि यादव और रविदास समुदाय की भी मजबूत उपस्थिति है। जातीय संतुलन और उम्मीदवार की व्यक्तिगत पकड़ ही यहां की जीत-हार तय करती रही है।

महेंद्र नारायण यादव और विनोद कुमार सिंह इस सीट के सबसे प्रभावशाली चेहरे रहे हैं। 2020 में बीजेपी की निशा सिंह ने कांग्रेस के तौकीर आलम को बेहद कम अंतर से हराया। 2025 के चुनाव में भी यहां कांटे की टक्कर की संभावना है। जातीय समीकरण और व्यक्तिगत पकड़, दोनों अहम होंगे।

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प्राणपुर सीट का इतिहास

अब तक हुए 10 चुनावों में 3 बार बीजेपी, 2 बार कांग्रेस, 2 बार आरजेडी, 2 बार जनता दल और एक बार जनता पार्टी ने जीत दर्ज की है। 2025 के विधानसभा चुनाव में एक बार फिर यहां कांटे की टक्कर की उम्मीद है।

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Pratyush Prashant

लेखक के बारे में

By Pratyush Prashant

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से पत्रकारिता में एम.ए. तथा जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) से मीडिया और जेंडर में एमफिल-पीएचडी के दौरान जेंडर संवेदनशीलता पर निरंतर लेखन. जेंडर विषयक लेखन के लिए लगातार तीन वर्षों तक लाडली मीडिया अवार्ड से सम्मानित रहे. The Credible History वेबसाइट और यूट्यूब चैनल के लिए कंटेंट राइटर और रिसर्चर के रूप में तीन वर्षों का अनुभव. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल, बिहार में राजनीति और समसामयिक मुद्दों पर लेखन कर रहे हैं. किताबें पढ़ने, वायलिन बजाने और कला-साहित्य में गहरी रुचि रखते हैं तथा बिहार को सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक दृष्टि से समझने में विशेष दिलचस्पी.

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