Ghosi Vidhan Sabha: 38 वर्षों तक एक परिवार का वर्चस्व, चार दलों से जीत चुके हैं एक ही नेता, जानें घोसी की कहानी
Published by : Paritosh Shahi Updated At : 14 Jul 2025 3:14 PM
RamBali Yadav
Ghosi Vidhan Sabha: बिहार के जहानाबाद जिले में घोसी विधानसभा क्षेत्र स्थित है. सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से मगध क्षेत्र की विरासत से प्रभावित रहा है. कम साक्षरता और कमजोर आर्थिक स्थिति के बावजूद यहां का चुनावी इतिहास काफी दिलचस्प रहा है.
Ghosi Vidhan Sabha: घोसी बिहार के जहानाबाद जिले में स्थित एक विधानसभा क्षेत्र है, जहां की अधिकांश आबादी ग्रामीण है. 2011 की जनगणना के अनुसार यहां 108130 लोग हैं. घोसी में कुल 53 गांव हैं. इसमें से 18 गांवों की आबादी 1000 से कम और 28 गांवों की आबादी 1000 से 4999 के बीच है. केवल चार गांव बड़े माने जाते हैं. इसमें से तीन की जनसंख्या 5000 से 9999 के बीच है और एक गांव की जनसंख्या 10000 से अधिक है.
कैसे रहा है इतिहास
घोसी क्षेत्र के मतदाता पार्टी से अधिक उम्मीदवार को महत्व देते आये है. पूर्व विधायक जगदीश शर्मा हैं, जिन्होंने 1977 से 2005 तक आठ बार अलग-अलग दलों से जीत हासिल की. वो जनता पार्टी, भाजपा, कांग्रेस, निर्दलीय और जदयू से विधानसभा पहुंचे. 2009 में वे लोकसभा पहुंचे. चारा घोटाले में दोषी पाए जाने पर 2013 में उनकी सदस्यता समाप्त हो गई. इसके बावजूद उनका राजनीतिक प्रभाव बना रहा.
जगदीश शर्मा की पत्नी शांति शर्मा ने 2009 में उपचुनाव जीता और फिर उनके बेटे राहुल शर्मा ने 2010 में जदयू से जीत दर्ज की. इस परिवार ने 38 वर्षों में चार अलग-अलग दलों का प्रतिनिधित्व किया है. 2015 और 2020 में राहुल शर्मा को हार का सामना करना पड़ा. फिलहाल जगदीश शर्मा हम पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं.
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समीकरण
घोसी क्षेत्र में अनुसूचित जातियों की आबादी लगभग 19.93% है जबकि मुस्लिम मतदाता 4.3% हैं. 2020 में यहां कुल मतदाता संख्या 262439 थी, जिसमें 58.11% ने वोट डाला था. 2024 में यह संख्या बढ़कर 265158 हो गई. पिछले चुनाव में यहां भाकपा माले के रामबली सिंह यादव ने जदयू के राहुल कुमार को लगभग 18 हजार वोटों से हराया था. चिराग पासवान की पार्टी के उम्मीदवार राकेश कुमार सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे.
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By Paritosh Shahi
परितोष शाही पिछले 4 वर्षों से डिजिटल मीडिया और पत्रकारिता में सक्रिय हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की और वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल की बिहार टीम का हिस्सा हैं. राजनीति, सिनेमा और खेल, विशेषकर क्रिकेट में उनकी गहरी रुचि है. जटिल खबरों को सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाना और बदलते न्यूज माहौल में तेजी से काम करना उनकी विशेषता है. परितोष शाही ने पत्रकारिता की पढ़ाई बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (BHU) से की. पढ़ाई के दौरान ही पत्रकारिता की बारीकियों को समझना शुरू कर दिया था. खबरों को देखने, समझने और लोगों तक सही तरीके से पहुंचाने की सोच ने शुरुआत से ही इस क्षेत्र की ओर आकर्षित किया. पत्रकारिता में करियर की पहली बड़ी शुरुआत बिहार विधानसभा चुनाव 2020 के दौरान हुई, जब उन्होंने जन की बात के साथ इंटर्नशिप की. इस दौरान बिहार के 26 जिलों में जाकर सर्वे किया. यह अनुभव काफी खास रहा, क्योंकि यहां जमीनी स्तर पर राजनीति, जनता के मुद्दों और चुनावी माहौल को बहुत करीब से समझा. इसी अनुभव ने राजनीतिक समझ को और मजबूत बनाया. इसके बाद राजस्थान पत्रिका में 3 महीने की इंटर्नशिप की. यहां खबर लिखने की असली दुनिया को करीब से जाना. महज एक महीने के अंदर ही रियल टाइम न्यूज लिखने लगे. इस दौरान सीखा कि तेजी के साथ-साथ खबर की सटीकता कितनी जरूरी होती है. राजस्थान पत्रिका ने उनके अंदर एक मजबूत डिजिटल पत्रकार की नींव रखी. पत्रकारिता के सफर में आगे बढ़ते हुए पटना के जनता जंक्शन न्यूज पोर्टल में वीडियो प्रोड्यूसर के रूप में भी काम किया. यहां कैमरे के सामने बोलना, प्रेजेंटेशन देना और वीडियो कंटेंट की बारीकियां सीखीं. करीब 6 महीने के इस अनुभव ने कैमरा फ्रेंडली बनाया और ऑन-स्क्रीन प्रेजेंस को मजबूत किया. 1 अप्रैल 2023 को राजस्थान पत्रिका को प्रोफेशनल तौर पर ज्वाइन किया. यहां 17 महीने में कई बड़े चुनावी कवरेज में अहम भूमिका निभाई. लोकसभा चुनाव 2024 में नेशनल टीम के साथ जिम्मेदारी संभालने का मौका मिला. इसके अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के दौरान भी स्टेट टीम के साथ मिलकर काम किया. इस दौरान चुनावी रणनीति, राजनीतिक घटनाक्रम और बड़े मुद्दों पर काम करने का व्यापक अनुभव मिला. फिलहाल परितोष शाही प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम के साथ जुड़े हुए हैं. यहां बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान कई बड़ी खबरों को रियल टाइम में ब्रेक किया, ग्राउंड से जुड़े मुद्दों पर खबरें लिखीं और वीडियो भी बनाए. बिहार चुनाव के दौरान कई जिलों में गांव- गांव घूम कर लोगों की समस्या को जाना-समझा और उनके मुद्दे को जन प्रतिनिधियों तक पहुंचाया. उनकी कोशिश हमेशा यही रहती है कि पाठकों और दर्शकों तक सबसे पहले, सही और असरदार खबर पहुंचे. पत्रकारिता में लक्ष्य लगातार सीखते रहना, खुद को बेहतर बनाना और भरोसेमंद पत्रकार के रूप में अपनी पहचान मजबूत करना है.
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