ePaper

फॉक्सवैगन श्विमवागेन: जानिए वर्ल्ड वॉर वाली उस कार को, जो पानी में भी चलती थी!

Updated at : 30 Jan 2026 11:29 AM (IST)
विज्ञापन
volkswagen schwimmwagen

द्वितीय विश्व युद्ध की मेंढक कार: फॉक्सवैगन श्विमवागेन की अनसुनी कहानी

द्वितीय विश्व युद्ध में जर्मनी का अनोखा एम्फीबियस व्हीकल, यानी उभयचर वाहन फॉक्सवैगन श्विमवागेन की पूरी कहानी. जानिए इसका विकास, उपयोग और विरासत. ऑटोमोबाइल की दुनिया में दिलचस्पी रखनेवालों के लिए रोचक जानकारी.

विज्ञापन

दूसरे विश्व युद्ध के समय जर्मनी ने कई अजब-गजब के हथियार और गाड़ियां बनाईं, लेकिन फॉक्सवैगन श्विमवागेन सबसे अलग थी. ये एक छोटी-सी कार थी जो जमीन पर तेज दौड़ती थी और पानी में तैर भी सकती थी. इसे “तैरने वाली कार” कहते थे और यह इतिहास की सबसे ज्यादा मैन्युफैक्चर्ड एम्फीबियस कार, यानी उभयचर कार है, जिसमें 15,500 से अधिक युनिट्स बनाई गईं.

फॉक्सवैगन बीटल ऐसे बनी तैरने वाली कार

कहानी शुरू होती है 1930 के अंत में. फर्डिनैंड पोर्श ने “सबके लिए कार” बनाई थी, जो बाद में फॉक्सवैगन बीटल बनी. युद्ध छिड़ा तो जर्मन आर्मी को मजबूत और आसान गाड़ियों की जरूरत पड़ी. पोर्श की टीम ने बीटल के इंजन से क्यूबेलवागेन बनाई. ये अमेरिकी जीप जैसी थी. फिर 1940 में आर्मी ने कहा- ऐसी गाड़ी चाहिए जो नदी, कीचड़ और दलदल पार कर सके, खासकर रूस के मोर्चे पर. पोर्श की टीम ने पहला प्रोटोटाइप बनाया (टाइप 128). ये तैर तो रही थी, लेकिन बॉडी कमजोर थी, टूट-फूट जाती थी.

फिर उन्होंने इसे ठीक किया और नई गाड़ी बनाई- टाइप 166. ये छोटी थी, मजबूत बॉडी वाली, और पीछे प्रोपेलर लगा था जो व्हीकल को पानी में चलाता था. इंजन वही पुराना 1.1 लीटर वाला था, करीब 25 हॉर्सपावर का. जमीन पर 80-90 किमी/घंटा की स्पीड, पानी में 10 किमी/घंटा. वजन सिर्फ 900 किलो, चार सैनिक आराम से बैठ सकते थे.

आज की ऑफ-रोड और एडवेंचर कार की इंस्पिरेशन

1942 से 1944 तक वोल्फ्सबर्ग की फैक्ट्री में ये बनीं, कुल 15,584 गाड़ियां. जर्मन सैनिक इसे “मेंढक” कहते थे, क्योंकि पानी में ऐसे कूदती-तैरती थी.

ये गाड़ी पूर्वी और पश्चिमी दोनों मोर्चों पर इस्तेमाल हुई- टोही (खोज) करने, सामान ले जाने और नदी पार करने में. कीचड़-रेत में भी अच्छी चलती थी. युद्ध खत्म होने के बाद ज्यादातर गाड़ियां नष्ट हो गईं, लेकिन आज कुछ म्यूजियम और प्राइवेट कलेक्शन में बची हैं.

ये दिखाता है कि कैसे एक साधारण बीटल वाली गाड़ी को युद्ध की जरूरत ने पानी में चलने वाली कार बना दिया. आज की ऑफ-रोड और एडवेंचर गाड़ियां भी इससे प्रेरणा लेती हैं. अगर आप कारों और इतिहास के शौकीन हैं, तो ये कहानी दिलचस्प लगेगी!

यह भी पढ़ें: भारत का एक गांव ऐसा, जहां 70 साल पुरानी लैंड रोवर कारों से बंधी है लोगों के जीवन की डोर

विज्ञापन
Rajeev Kumar

लेखक के बारे में

By Rajeev Kumar

राजीव, 14 वर्षों से मल्टीमीडिया जर्नलिज्म में एक्टिव हैं. टेक्नोलॉजी में खास इंटरेस्ट है. इन्होंने एआई, एमएल, आईओटी, टेलीकॉम, गैजेट्स, सहित तकनीक की बदलती दुनिया को नजदीक से देखा, समझा और यूजर्स के लिए उसे आसान भाषा में पेश किया है. वर्तमान में ये टेक-मैटर्स पर रिपोर्ट, रिव्यू, एनालिसिस और एक्सप्लेनर लिखते हैं. ये किसी भी विषय की गहराई में जाकर उसकी परतें उधेड़ने का हुनर रखते हैं. इनकी कलम का संतुलन, कंटेंट को एसईओ फ्रेंडली बनाता और पाठकों के दिलों में उतारता है. जुड़िए rajeev.kumar@prabhatkhabar.in पर

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola