Pitru Paksha 2023: पितृ पक्ष में क्यों नहीं बिकती कार और बाइकें, जानें क्या है मान्यता?

पितृ पक्ष की अवधि में नया सामान लेना वर्जित होता है और भारतीय उपभोक्ता मान्यताओं के आगे किसी की नहीं सुनते. कार और बाइक की खरीददारी अधिकतर भारतीय जनमानस के जीवन की सबसे खास घटनाओं में से एक होती है
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान नई चीज़ें खरीदना वर्जित माना जाता है. पितृ पक्ष में मृत पूर्वजों को श्रद्धांजलि दी जाती है. इस दौरान कोई भी नया काम या गतिविधि शुरू करने से पित्रों का अपमान हो सकता है. इसके काई कारण बताएं गए हैं:
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पितृ पक्ष के दौरान नई चीज़ें खरीदने से बचना चाहिए.
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पितृ पक्ष में खरीदी गई चीज़ें पितरों को समर्पित होती हैं.
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पितृ पक्ष में खरीदी गई चीज़ों में प्रेतों का अंश होता है.
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पितृ पक्ष में शोक मनाने का समय होता है.
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पितृ पक्ष में 15 दिनों तक पितर धरती पर होते हैं.
पितृ पक्ष के दौरान सबसे ज्यादा नुकसान ओटोमोबाइल इंडस्ट्री को उठाना पड़ता है. पितृ पक्ष के 15 दिनों के दौरान किसी भी गाड़ी की डिलीवरी नहीं होती और ये त्योहारों से ठीक पहले एक ऐसा समय होता है जिसे ऑटो सेक्टर के लिए संक्रमण काल भी कहा जाता है. मगर पिछले कुछ सालों से ट्रेंड थोड़ा बदला है. अब लोग पितृ पक्ष के दौरान गाड़ियां बुक कर लेते हैं और उसकी डिलीवरी पितृ पक्ष के बाद लेते हैं.
पितृ पक्ष की अवधि में नया सामान लेना वर्जित होता है और भारतीय उपभोक्ता मान्यताओं के आगे किसी की नहीं सुनते. कार और बाइक की खरीददारी अधिकतर भारतीय जनमानस के जीवन की सबसे खास घटनाओं में से एक होती है, ऐसे में उपभोक्ता पितृ पक्ष की अवधि में नई कार या बाइक खरीदकर मान्यताओं को ठोकर मारने की कोसिसह नहीं कर सकता है.
वहीं पितृ पक्ष के बाद नवरात्र की शुरुआत हो जाती है, जिसके बाद 25 दिसंबर यानी क्रिसमस तक फेस्टिवल सीजन के रूप में मनाया जाता है. इस दौरान कार और बाइक निर्माता एक से बढ़कर एक लुभावने ऑफर उपभोक्ताओं के लिए लेकर आते हैं. ये भी एक वजह है कि, पितृ पक्ष की अवधि में रूकने के बाद फेस्टिवल सीजन में उपभोक्ताओं को अच्छे ऑफर और डिस्काउंट मिलते हैं. हालांकि पितृ पक्ष के अवधि में भी कार डीलर अच्छा डिस्काउंट देते हैं.
यह समय यानी पितृ पक्ष के 15-16 दिन जश्न मनाने का नहीं होता. इस समय हमारे पूर्वजों को याद कर शोक प्रकट किया जाता है. नया काम शुरू करना और कोई भी चीज की खरीदारी पितरों के अपमान में गिना जाता है. इस दौरान पूजा-पाठ, दान पुण्य किया जा सकता है. किसी भी बड़ी खरीददारी को लोग वर्जित मानते हैं
माना जाता है जब आप अपने पितरों को प्रसन्न कर सकते हैं. उन्हें प्रसन्न करने के लिए पिंडदान, दान पुण्य, श्रद्धा और तर्पण करना चाहिए. इसके अलावा यह भी मान्यता है कि पितृ पक्ष में नई चीज जैसे घर, गाड़ी, कपड़े, सोना आदि नहीं खरीदना चाहिए. पितृ पक्ष में कोई भी नया काम शुरू करना वर्जित माना गया है.
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By Abhishek Anand
'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.
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