सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर पर अगले साल से काम शुरू करेगी मोदी सरकार

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 20 Oct 2023 3:42 PM

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केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण है कि भारतीयों को सेमीकंडक्टर अनुसंधान के नेतृत्व में शामिल किया जाना चाहिए. दुनिया भर में सेमीकंडक्टर जगत के दिग्गजों ने भारत सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर को तैयार करने के लिए एक साथ बैठकर काम किया है.

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नई दिल्ली : इलेक्ट्रिक वाहनों और इलेक्ट्रिक उपकरणों में इस्तेमाल किए जाने वाले सेमीकंडक्टर के निर्माण के लिए केंद्र की मोदी सरकार अगले साल से रिसर्च सेंटर पर काम करना शुरू करेगी. इसके लिए सरकार उद्योग और शिक्षा जगत से सहयोग भी लेगी. समाचार एजेंसी भाषा की एक रिपोर्ट के अनुसार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय भारत में सेमीकंडक्टर के स्वदेशी निर्माण के लिए उद्योग और शिक्षा जगत के सहयोग से अगले साल से सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर पर काम शुरू करेगा.

सेमीकंडक्टर जगत की सलाह पर बनेगा रिसर्च सेंटर

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दृष्टिकोण है कि भारतीयों को सेमीकंडक्टर अनुसंधान के नेतृत्व में शामिल किया जाना चाहिए. केंद्रीय मंत्री चंद्रशेखर ने कहा कि दुनिया भर और देश भर में सेमीकंडक्टर जगत के शीर्ष लोगों के समूह ने भारत सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर को तैयार करने के लिए एक साथ बैठकर काम किया है.

भारत में होगा सेमीकंडक्टर रिसर्च का वैश्विक संस्थान

विशेषज्ञों की समिति की ओर से सरकार के सामने रिपोर्ट पेश किए जाने के बाद केंद्रीय मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि प्रस्तावित भारत सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर, सेमीकंडक्टर अनुसंधान का वैश्विक संस्थान होगा. उन्होंने कहा कि डिजाइन, जिस क्षेत्र पर इसे ध्यान केंद्रित करना चाहिए आदि सभी बातें रिपोर्ट में रखी गई हैं. मुझे उम्मीद है कि वर्ष 2024 में इस संस्थान पर काम शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि भारत सेमीकंडक्टर रिसर्च सेंटर अगले चार-पांच वर्षों में अग्रणी सेमीकंडक्टर अनुसंधान संस्थानों में से एक बन जाएगा.

पीएम मोदी के अमेरिकी यात्रा के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर

बताते चलें कि इस साल के जून महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के दौरान तीन प्रमुख अमेरिकी सेमीकंडक्टर कंपनियों ने समझौते पर हस्ताक्षर करके भारत में निवेश का ऐलान किया था. इसके बाद वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण का रास्ता साफ हो गया है. भारत और अमेरिका ने इंडिया-यूएस पांचवीं कमर्शियल डायलॉग 2023 के दौरान सेमीकंडक्टर सप्लाई चैन स्थापित करने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो भारत को इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों का केंद्र बनने के अपने सपने को साकार करने में बड़ी मदद कर सकता है.

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सेमीकंडक्टर का कहां होता है इस्तेमाल

सेमीकंडक्टर का मतलब अर्धचालक होता है. इसका इस्तेमाल करंट को नियंत्रित करने में किया जाता है. सेमीकंडक्टर असल में सिलिकॉन से बनाए जाते हैं, जो चिप फॉर्म में होते हैं. मौजूदा समय में जितनी भी कार बाजार में उपलब्ध हैं, उन सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है. सेमीकंडक्टर का उपयोग सभी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, जैसे मोबाइल फोन, डिजिटल कैमरा, संचार उपकरण, ट्रेन, एटीएम आदि में व्यापक रूप से किया जाता है. कारों में सेमीकंडक्टर इस्तेमाल हेड्स अप डिस्प्ले, सेन्सर्स, सेलफोन और कम्यूनिकेशन इंटीग्रेशन के साथ उच्च दक्षता वाले इंजन के एलिमेंट्स में होता है. ऑटो मोबाइल मार्केट में फिलहाल जितनी भी महंगी कार उपलब्ध हैं उन सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है. इनका इस्तेमाल करंट को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और इनके बिना मौजूदा कारों की कल्पना करना बेकार है.

सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल कहा किया जाता है?

ऑटो मोबाइल मार्केट में फिलहाल जितनी भी महंगी कार उपलब्ध हैं उन सभी में सेमीकंडक्टर का इस्तेमाल किया जाता है. इनका इस्तेमाल करंट को नियंत्रित करने के लिए किया जाता है और इनके बिना मौजूदा कारों की कल्पना करना बेकार है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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