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Budget 2024: Electric Vehicles को बढ़ावा देने के लिए SIAM ने की रियायत की मांग

Updated at : 13 Jul 2024 8:49 AM (IST)
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सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने Electric Vehicles को बढ़ावा देने के लिए Budget 2024 में रियायत देने की मांग की है.

सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने Electric Vehicles को बढ़ावा देने के लिए Budget 2024 में रियायत देने की मांग की है.

Society of Indian Automobile Manufacturers (SIAM) ने सरकार से Budget 2024 में इलेक्ट्रिक वाहनों में रियायत देने की मांग की है.

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शुक्रवार को, सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (SIAM) ने इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए रियायतों की मांग की. उद्योग संघ ने साथ ही कहा कि सरकार को आगामी Budget 2024 में पुराने वाहनों को कबाड़ में बदलने के लिए और अधिक धन देना चाहिए. सियाम (Society of Indian Automobile Manufacturers) ने वृद्धि को बढ़ावा देने वाले बजट पर जोर दिया.

यहां संवाददाताओं से बोलते हुए, सियाम के अध्यक्ष विनोद अग्रवाल ने कहा, “हमें उम्मीद है कि सरकार को फेम 3 जैसी नीति लानी चाहिए… PLTI जैसे उत्कृष्ट कार्यक्रम पहले से ही लागू हैं, और इनके जारी रहने का हमें भरोसा है.इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों और तिपहिया वाहनों, साथ ही सार्वजनिक बसों को वित्तीय प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है अगर फेम 3 (इलेक्ट्रिक वाहनों को तेजी से अपनाना और बनाना) योजना शुरू की जाती है.

फेम 3 योजना, इलेक्ट्रिक गतिशीलता संवर्धन योजना (ईएमपीएस) की जगह लेगी, जिसे फेम 2 योजना के खत्म होने पर पेश किया गया था.

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“हम यह भी उम्मीद कर रहे हैं कि सरकार वाहनों को कबाड़ में बदलने के लिए प्रोत्साहन पर कुछ और घोषणाएं कर सकती है,” अग्रवाल ने कहा. उन्होंने कहा कि पुराने वाहनों को स्क्रैप करने के लिए अधिक प्रयासों की जरूरत है.

अग्रवाल ने कहा कि सरकार ऐसे उपायों को जारी रखना चाहिए जो अर्थव्यवस्था को लाभ दें. उनका कहना था कि, “हमें उम्मीद है कि एक बार फिर यह विकासोन्मुख बजट होगा… इसका मतलब यह है कि यह पूंजीगत व्यय पर अधिक ध्यान देगा क्योंकि इसका अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर अच्छा प्रभाव पड़ता है.”

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Abhishek Anand

लेखक के बारे में

By Abhishek Anand

'हम वो जमात हैं जो खंजर नहीं, कलम से वार करते हैं'....टीवी और वेब जर्नलिज्म में अच्छी पकड़ के साथ 10 साल से ज्यादा का अनुभव. झारखंड की राजनीतिक और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग के साथ-साथ विभिन्न विषयों और क्षेत्रों में रिपोर्टिंग. राजनीतिक और क्षेत्रीय पत्रकारिता का शौक.

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