दुनिया के टॉप-10 कॉमर्शियल व्हीकल कंपनी बनाना चाहती है अशोक लेलेंड, जानें क्या है प्लान

Published by : KumarVishwat Sen Updated At : 07 Sep 2023 11:02 PM

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अशोक लेलेंड के सीईओ धीरज हिंदुजा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है और हमने इस बात पर कई बार चर्चा भी की है कि हमें वैश्विक स्तर पर 10 सबसे बड़ी वाणिज्यिक वाहन कंपनियों में शामिल होना है. फिलहाल, हम 20वें स्थान पर हैं.

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चेन्नई : हिंदुजा ग्रुप की प्रमुख कंपनी अशोक लेलेंड दुनिया के टॉप-10 वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली कंपनियों की सूची में शामिल होना चाहती है. अशोक लेलेंड ने गुरुवार को कहा है कि उसका लक्ष्य निकट भविष्य में दुनिया की टॉप-10 वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता कंपनियों में शामिल होना है. कंपनी के चेयरमैन धीरज हिंदुजा के अनुसार, भारी वाणिज्यिक वाहन बनाने वाली कंपनी नए बाजारों में संभावनाएं तलाश रही है. अशोक लेलेंड का मुख्यालय चेन्नई में है. कंपनी की 75वीं वर्षगांठ के मौके पर उसके आला अफसर चेन्नई आए हुए थे.

इस समय 20वें स्थान पर है अशोक लेलेंड

अशोक लेलेंड के सीईओ धीरज हिंदुजा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि हमारा लक्ष्य स्पष्ट है और हमने इस बात पर कई बार चर्चा भी की है कि हमें वैश्विक स्तर पर 10 सबसे बड़ी वाणिज्यिक वाहन कंपनियों में शामिल होना है. फिलहाल, हम 20वें स्थान पर हैं. कंपनी की योजना के बार में विस्तार से चर्चा करते हुए धीरज हिंदुजा ने आगे कहा कि कंपनी की बिक्री मात्रा भारतीय बाजार में तेजी से बढ़ रही है और अशोक लेलेंड की ओर से विकसित ‘अवतार’ एक मॉड्यूलर उत्पाद है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजार के हिसाब से तैयार किया गया है. उन्होंने कहा कि हमारे लिए भारत के बाहर सही नेटवर्क बनाना, उन बाजारों में उचित वितरक ढूंढना महत्वपूर्ण है, जहां हम अभी मौजूद नहीं हैं.

अफ्रीका में 13 डिस्ट्रिब्यूटरों को किया नियुक्त

उन्होंने कहा कि अशोक लेलेंड ने करीब पिछले 16 महीनों के दौरान अफ्रीका के बाजारों में अपने 13 डिस्ट्रिब्यूटरों को नियुक्त किया है, जिनमें से कुछ के पास अपनी खुद की असेंबलिंग प्लांट मौजूद हैं. उन्होंने कहा कि हम लगातार नए बाजार की तलाश करने में जुटे हुए हैं. कंपनी की ओर से दी जाने वालीं सेवाओं पर अशोक लेलेंड के प्रबंध निदेशक (एमडी) और मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) शेनू अग्रवाल ने कहा कि कंपनी द्वारा विकसित देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन बस दिसंबर तक सड़कों पर आ जाएगी.

हाइड्रोजन ईंधन बस विकसित करेगी अशोक लेलेंड

सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी के लिए हाइड्रोजन ईंधन बस विकसित करने के संबंध में उन्होंने कहा कि यह देश की पहली हाइड्रोजन ईंधन बस होगी. यह लेह-लद्दाख क्षेत्र के लिए होगी. अधिक ऊंचाई के कारण इसका कुछ परीक्षण किया जाएगा और शायद दिसंबर की शुरुआत में हम एनटीपीसी को हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली बस की आपूर्ति कर सकते हैं.

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अगले तीन-पांच साल में वैकल्पिक ईंधन वाले मॉडल लाएगी अशोक लेलेंड

उधर, खबर है कि प्रमुख वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता कंपनी अशोक लेलेंड अगले तीन से पांच साल में अपने सभी उत्पाद वैकल्पिक ईंधन के साथ पेश करने की योजना बना रही है. हिंदुजा समूह की प्रमुख और देश की दूसरी सबसे बड़ी वाणिज्यिक वाहन विनिर्माता कंपनी की योजना अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपना कारोबार फैलाने की है. हल्के इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों की अपनी नवीनतम शृंखला पेश करने के कार्यक्रम के मौके पर पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में हिंदुजा ने कहा कि इलेक्ट्रिक और सीएनजी खंड के अलावा कंपनी हाइड्रोजन, एथनॉल जैसे सभी प्रकार के वैकल्पिक ईंधनों पर चलने वाले वाहन पेश करने की योजना बना रही है. हिंदुजा ने कहा कि तो, प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हमारी पूरी श्रृंखला विभिन्न वैकल्पिक ईंधन में उपलब्ध हो जाए. उन्होंने कहा कि कंपनी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ज्यादा बाजारों में उतरकर अपना वैश्विक कारोबार भी बढ़ाने की योजना बना रही है. अशोक लेलेंड बस, ट्रक और हल्के वाणिज्यिक वाहनों की प्रमुख विनिर्माता कंपनी है.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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