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PRANJAL PANDEY
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PRANJAL PANDEY is a contributor at Prabhat Khabar.
PRANJAL PANDEY के आर्टिकल्स
Gaya News: हमारी पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जरूरत
गया >11:22 PM. 13 May

Gaya News: दुर्घटना में बाइक सवार की मौत, सड़क जाम
गया >11:19 PM. 13 May

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Gaya News: हमारी पार्टी को बूथ स्तर तक मजबूत करने की जरूरत
गया >11:22 PM. 13 May

Gaya News: दुर्घटना में बाइक सवार की मौत, सड़क जाम
गया >11:19 PM. 13 May

Gaya News: सीयूएसबी के भूविज्ञानियों की टीम ने निरंजना नदी बेसिन का किया निरीक्षणफोटो- गया बोधगया 215- सर्वेक्षण और क्षेत्र डेटा संग्रह में जुटे सीयूएसबी की टीमफोटो- गया बोधगया 216- चतरा के नावालौंग प्रखंड अंतर्गत पारामातू गांव में सूखा पड़ा कुआंफ्लैग......चट्टान व मिट्टी के नमूने एकत्र किए और खुले कुओं में पानी के स्तर को मापा.वरीय संवाददाता, गयासीयूएसबी के लैब टू लैंड कार्यक्रम के तहत भूविज्ञान विभाग के भूविज्ञानियों की एक टीम ने निरंजना नदी बेसिन (फल्गु नदी) में इसके पुनरुद्धार के प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक फील्ड सर्वे किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह की पहल ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ के तहत नमामी निरंजना पुनर्भरण मिशन के संयोजक संजय सज्जन के सहयोग से भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो प्रफुल्ल सिंह की देखरेख में फील्डवर्क आयोजित किया गया. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि सीयूएसबी के टीम के साथ प्रोजेक्ट एसोसिएट कमल नयन, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार, हंटरगंज के शिक्षक रवींद्र कुमार रवि व नवाडीह पंचायत की मुखिया बसंती पन्ना सहित अन्य शामिल थे. विस्तृत जानकारी देते हुए प्रो प्रफुल्ल सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण और क्षेत्र डेटा संग्रह का प्राथमिक लक्ष्य नदी की गतिशीलता का अध्ययन करना व बेसिन के प्रवाह और भूजल आंदोलन को प्रभावित करने वाले भूवैज्ञानिक व जल विज्ञान संबंधी कारकों का मूल्यांकन करना था. निरीक्षण के दौरान जल विज्ञानियों ने बेसिन में चट्टान और मिट्टी के नमूने एकत्र किए और भूजल की स्थिति का आकलन करने के लिए खुले कुओं में पानी के स्तर को मापा. उनका उद्देश्य यह समझना था कि जलवायु परिवर्तन और कृषि पद्धतियां भूजल उपलब्धता को कैसे प्रभावित कर रही हैं, ताकि एक स्थायी भूजल पुनर्भरण रणनीति तैयार की जा सके.स्थानीय जल उपयोग पैटर्न और भूजल पहुंच के बारे में जानकारी का प्रयासटीम ने स्थानीय जल उपयोग पैटर्न और भूजल पहुंच के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र के चतरा के नावालौंग प्रखंड अंतर्गत पारामातू गांव के निवासियों के साथ भी बातचीत की. सर्वेक्षण से प्राप्त अवलोकनों ने जिम्मेदार भूजल उपयोग को बढ़ावा देने, सूख चुके कुओं को बहाल करने व प्रमुख जल असर संरचनाओं व संरचनाओं की रक्षा करने के लिए समुदाय की भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला. ये प्रयास दीर्घकालिक जल स्थिरता प्राप्त करने व नदी प्रणाली के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं.
गया >11:01 PM. 11 May

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Gaya News: अब सप्ताह के सातों दिन शहर की साफ-सफाई
गया >11:21 PM. 10 May

Gaya News: बाइक-ट्रैक्टर व ऑटो में भिड़ंत, पांच घायल
गया >11:46 PM. 9 May

Gaya News: बुद्ध जयंती समारोह को लेकर बढ़ायी गयी चौकसी
गया >11:42 PM. 9 May

Gaya News: सीयूएसबी के भूविज्ञानियों की टीम ने निरंजना नदी बेसिन का किया निरीक्षणफोटो- गया बोधगया 215- सर्वेक्षण और क्षेत्र डेटा संग्रह में जुटे सीयूएसबी की टीमफोटो- गया बोधगया 216- चतरा के नावालौंग प्रखंड अंतर्गत पारामातू गांव में सूखा पड़ा कुआंफ्लैग......चट्टान व मिट्टी के नमूने एकत्र किए और खुले कुओं में पानी के स्तर को मापा.वरीय संवाददाता, गयासीयूएसबी के लैब टू लैंड कार्यक्रम के तहत भूविज्ञान विभाग के भूविज्ञानियों की एक टीम ने निरंजना नदी बेसिन (फल्गु नदी) में इसके पुनरुद्धार के प्रयासों का समर्थन करने के लिए एक फील्ड सर्वे किया. कुलपति प्रो कामेश्वर नाथ सिंह की पहल ‘कैंपस फॉर कम्युनिटी’ के तहत नमामी निरंजना पुनर्भरण मिशन के संयोजक संजय सज्जन के सहयोग से भूविज्ञान विभाग के अध्यक्ष प्रो प्रफुल्ल सिंह की देखरेख में फील्डवर्क आयोजित किया गया. पीआरओ मोहम्मद मुदस्सीर आलम ने बताया कि सीयूएसबी के टीम के साथ प्रोजेक्ट एसोसिएट कमल नयन, सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार, हंटरगंज के शिक्षक रवींद्र कुमार रवि व नवाडीह पंचायत की मुखिया बसंती पन्ना सहित अन्य शामिल थे. विस्तृत जानकारी देते हुए प्रो प्रफुल्ल सिंह ने बताया कि सर्वेक्षण और क्षेत्र डेटा संग्रह का प्राथमिक लक्ष्य नदी की गतिशीलता का अध्ययन करना व बेसिन के प्रवाह और भूजल आंदोलन को प्रभावित करने वाले भूवैज्ञानिक व जल विज्ञान संबंधी कारकों का मूल्यांकन करना था. निरीक्षण के दौरान जल विज्ञानियों ने बेसिन में चट्टान और मिट्टी के नमूने एकत्र किए और भूजल की स्थिति का आकलन करने के लिए खुले कुओं में पानी के स्तर को मापा. उनका उद्देश्य यह समझना था कि जलवायु परिवर्तन और कृषि पद्धतियां भूजल उपलब्धता को कैसे प्रभावित कर रही हैं, ताकि एक स्थायी भूजल पुनर्भरण रणनीति तैयार की जा सके.स्थानीय जल उपयोग पैटर्न और भूजल पहुंच के बारे में जानकारी का प्रयासटीम ने स्थानीय जल उपयोग पैटर्न और भूजल पहुंच के बारे में जानकारी हासिल करने के लिए जलग्रहण क्षेत्र के चतरा के नावालौंग प्रखंड अंतर्गत पारामातू गांव के निवासियों के साथ भी बातचीत की. सर्वेक्षण से प्राप्त अवलोकनों ने जिम्मेदार भूजल उपयोग को बढ़ावा देने, सूख चुके कुओं को बहाल करने व प्रमुख जल असर संरचनाओं व संरचनाओं की रक्षा करने के लिए समुदाय की भागीदारी और जागरूकता बढ़ाने की तत्काल आवश्यकता पर प्रकाश डाला. ये प्रयास दीर्घकालिक जल स्थिरता प्राप्त करने व नदी प्रणाली के पारिस्थितिक स्वास्थ्य को संरक्षित करने के लिए महत्वपूर्ण हैं.
गया >11:01 PM. 11 May

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गया >11:21 PM. 10 May

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गया >11:46 PM. 9 May

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गया >11:42 PM. 9 May














