हॉर्स ट्रेडिंग के गवाह के अपहरण का मामला,विधायक सीता सोरेन के खिलाफ आरोप पत्र दायर

Published at :27 Nov 2014 12:27 AM (IST)
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हॉर्स ट्रेडिंग के गवाह के अपहरण का मामला,विधायक सीता सोरेन के खिलाफ आरोप पत्र दायर

रांची: सीबीआइ ने हॉर्स ट्रेडिंग के गवाह के अपहरण के आरोप में झामुमो विधायक सीता सोरेन के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया है. पटना सीबीआइ ने 26 नवंबर को रांची स्थिति सीबीआइ के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी आरके मिश्र की अदालत में आरोप पत्र दायर किया. सीबीआइ द्वारा दायर आरोप पत्र में विधायक सीता सोरेन […]

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रांची: सीबीआइ ने हॉर्स ट्रेडिंग के गवाह के अपहरण के आरोप में झामुमो विधायक सीता सोरेन के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया है. पटना सीबीआइ ने 26 नवंबर को रांची स्थिति सीबीआइ के विशेष न्यायिक दंडाधिकारी आरके मिश्र की अदालत में आरोप पत्र दायर किया. सीबीआइ द्वारा दायर आरोप पत्र में विधायक सीता सोरेन पर सीबीआइ के गवाह का अपहरण कराने का आरोप लगाया गया है.

इसमें कहा गया है कि हॉर्स ट्रेडिंग में विकास पांडेय उर्फ संटी पांडेय द्वारा अदालत में दर्ज कराये गये बयान से नाराज हो कर विधायक के इशारे पर उसका अपहरण किया गया था. अपहरण का उद्देश्य गवाह को डरा धमका कर हॉर्स ट्रेडिंग की जांच को प्रभावित करना था. विधायक सीता सोरेन हॉर्स ट्रेडिंग मामले में आरोपी हैं और न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रही हैं. विकास पांडेय ने सीता सोरेन द्वारा वोट देने के बदले पैसा लेने से संबंधित गवाही दी थी.

सरकार ने हाइकोर्ट के फैसले को दी थी चुनौती

इस बीच राज्य सरकार ने सीबीआइ जांच से संबंधित हाइकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के क्रम में स्थगन आदेश जारी किया था. इसकी वजह से जांच पूरी होने के बावजूद आरोप पत्र दायर नहीं कर पा रही थी. पिछले माह सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की याचिका को निरस्त करते हुए इस अपहरण कांड में सीबीआइ से संबंधित हाइकोर्ट के आदेश को बहाल रखा. इसके बाद सीबीआइ ने 26 नवंबर 2014 को इस मामले में विधायक सीता सोरेन के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया.

क्या है मामला

सीबीआइ के गवाह विकास पांडेय का अपहरण 24 दिसंबर 2012 को हो गया था. विकास की पत्नी ने अपहरण की जानकारी पुलिस और सीबीआइ को दी थी. सीबीआइ के हस्तक्षेप के बाद देर रात सीता सोरेन के सरकारी आवास से विकास पांडेय को मुक्त कराया जा सका था. इस मामले में विकास की पत्नी की शिकायत पर अरगोड़ा थाने में एक प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. पुलिस द्वारा जांच में विलंब करने की वजह से इस सिलसिले में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी. हाइकोर्ट ने जनहित याचिका की सुनवाई के बाद अपहरण कांड की जांच भी सीबीआइ से कराने का आदेश दिया था. इस आदेश के आलोक में सीबीआइ मुख्यालय ने मामले की जांच की जिम्मेवारी सीबीआइ पटना को सौंपी थी.

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