कौन हैं निक स्टीवर्ट? ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के समर्थक, बने हैं पीस डील करने वाली टीम के सलाहकार

Published by :Anant Narayan Shukla
Published at :03 May 2026 1:16 PM (IST)
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Who is Nick Stewart appointed adviser to diplomatic team for Iran peace talks

जेरेड कुश्नर (बाएं) और स्टीव विटकॉफ (दाएं) बीच में निक स्टीवर्ट.

Who is Nick Stewart: अमेरिका की ईरान से कूटनीतिक वार्ता करने वाली टीम का सलाहकार निक स्टीवर्ट को नियुक्त किया गया है. वह ऐसे सलाहकार हैं, जो ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई के हिमायती हैं.

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Who is Nick Stewart: अमेरिका ने ईरान के साथ जारी संघर्ष को समाप्त करने के लिए वार्ताकारों की टीम का सलाहकार निक स्टीवर्ट को बनाया है. व्हाइट हाउस ने इस बात की पुष्टि की है. सीबीएस न्यूज की एक रिपोर्ट के मुताबिक,  व्हाइट हाउस की प्रवक्ता ओलिविया वेल्स ने स्टीवर्ट को तेज-तर्रार और अनुभवी नीति विशेषज्ञ बताया, जो विशेष दूत स्टीव विटकॉफ के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल के लिए महत्वपूर्ण साबित होंगे.

स्टीवर्ट को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और सलाहकार जेरेड कुशनर ने शामिल किया है. कुश्नर और स्टीव विटकॉफ अमेरिका की ओर से ईरान से कूटनीतिक वार्ता कर रहे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल में पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई बातचीत के असफल दौर से पहले ही स्टीवर्ट को टीम में शामिल कर लिया गया था.

कौन हैं निक स्टीवर्ट?

व्हाइट हाउस की प्रवक्ता वेल्स ने बताया कि स्टीवर्ट को ईरान से जुड़े मामलों का गहरा अनुभव है. वह राष्ट्रपति ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिकी विदेश विभाग और कैपिटल हिल में काम कर चुके हैं. इससे पहले वे फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज से जुड़े थे, जिसने ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई का समर्थन किया था. स्टीवर्ट ने ट्रंप प्रशासन के पहले कार्यकाल में तत्कालीन विशेष प्रतिनिधि ब्रायन हुक के अधीन विदेश विभाग के ईरान एक्शन ग्रुप में चीफ ऑफ स्टाफ के रूप में काम कर चुके हैं.

निक स्टीवर्ट का पूरा नाम निकोलस जे स्टीवर्ट है. उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के मुताबिक उन्होंने अमेरिकन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ इंटरनेशनल सर्विस से इंटरनेशनल स्टडीज, पीस एंड कन्फ्लिक्ट स्टडीज, अरब स्टडीज में ग्रैजुएशन किया है. उन्होंने कैंब्रिज विश्वविद्यालय (इंग्लैंड) से इंटरनेशनल पॉलिटिक्स में एमफिल भी किया है. फिलहाल वह अमेरिकी संसद के हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स के चीफ ऑफ स्टाफ के तौर पर भी काम कर रहे हैं.

अमेरिका-ईरान के मध्य चल रहा शांति स्थापना का प्रयास

यह कूटनीतिक बदलाव ऐसे समय आया है जब ईरान ने अमेरिका के 9-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के जवाब में 14-सूत्रीय योजना पेश की है. तसनीम न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, यह प्रस्ताव पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए भेजा गया और इसका उद्देश्य अस्थायी युद्धविराम से आगे बढ़कर स्थायी समाधान निकालना है.

जहां अमेरिका ने शुरुआत में दो महीने के युद्धविराम का सुझाव दिया था, वहीं ईरान ने इसे खारिज करते हुए 30 दिनों के भीतर सभी विवादों के समाधान की मांग की है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वे प्रस्ताव की समीक्षा करेंगे, लेकिन तेहरान के इरादों को लेकर संदेह बरकरार है. उन्होंने कहा कि ईरान ने अभी तक पर्याप्त कीमत नहीं चुकाई है.

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तसनीम के मुताबिक, ईरानी प्रस्ताव में लेबनान सहित कई क्षेत्रीय तनावों को सुलझाने की बात है. इसमें भविष्य में हमलों को रोकने के लिए सुरक्षा गारंटी, अमेरिकी सेना की वापसी, नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने, जमे हुए अंतरराष्ट्रीय फंड जारी करने और प्रतिबंधों से हुए नुकसान की भरपाई की मांग शामिल है. 

आर्थिक मोर्चे पर, ईरान ने सभी अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध हटाने और हॉर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन के लिए विशेष तंत्र प्रस्तावित किया है, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति स्थिर बनी रहे. ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि यह प्रस्ताव थोपी गई जंग को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए है और अब फैसला अमेरिका को करना है.

हालांकि ट्रंप ने माना कि वे समझौता करना चाहते हैं, लेकिन उन्होंने ईरानी नेतृत्व को अव्यवस्थित बताते हुए शक जताया और चेतावनी दी कि वार्ता विफल होने पर सैन्य कार्रवाई भी संभव है.

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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