Gaza : गाजा पर अब नहीं गिरेगा बम, 10 प्वाइंट में जानें डोनाल्ड ट्रंप के पीस प्लान की खास बातें

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 30 Sep 2025 7:12 AM

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डोनाल्ड ट्रम्प (बाएं) और नेतन्याहू (दाएं) एक साथ (Photo: PTI)

Gaza : पीस प्लान के अनुसार, यदि इजराइल और हमास दोनों इसे स्वीकार करते हैं तो गाजा युद्ध तुरंत समाप्त हो जाएगा. सभी बंधकों को 72 घंटों के भीतर रिहा कर दिया जाएगा. जानें अमेरिकी राष्ट्रपति के मन में आखिर क्या चल रहा है प्लान? दो साल से जारी युद्ध का अब होगा क्या?

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Gaza : दुनियाभर में युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अचानक गाजा को लेकर बड़ी घोषणा की. उन्होंने सोमवार को गाजा शांति योजना यानी पीस प्लान की घोषणा की, जिसका उद्देश्य दो साल से जारी युद्ध को समाप्त करना है. इस प्रस्ताव को इजराइल द्वारा स्वीकार कर लिया गया है. ट्रंप ने इस पीस प्लान को व्हाइट हाउस में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की यात्रा के दौरान जारी किया. उम्मीद जताई जा रही है कि इस पहल से क्षेत्र में जो बमों के गिरने का सिलसिला है वो थम जाएगा.

गाजा में युद्ध तुरंत समाप्त होगा

इस पीस प्लान में गाजा में तुरंत युद्धविराम, फिलिस्तीनी क्षेत्रों से इजरायली सेना की वापसी, बंधकों की रिहाई के अलावा फिलिस्तीनी क्षेत्रों में नई सरकार के गठन का रोडमैप शामिल है. ट्रंप के 20 प्वाइंट के प्रपोजल में कहा गया है कि दोनों पक्षों की सहमति होने पर गाजा में युद्ध तुरंत समाप्त होगा. इसके तहत इजरायली सेना की वापसी होगी और हमास के कब्जे में मौजूद अंतिम बंधकों को 72 घंटे में रिहा किया जाएगा.

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व्हाइट हाउस की ओर से पेश पीस प्लान में है क्या जानें यहां

1. गाजा में एक अस्थायी सरकार बनेगी और इजराइल पट्टी को अपने कब्जे में नहीं लेगा. इस अस्थायी सरकार में फिलिस्तीनी और दुनिया भर के विशेषज्ञ शामिल होंगे.
2. यदि दोनों पक्ष शांति प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं. इसके बाद हमास हथियार छोड़ देता है, तो फिलिस्तीनियों को गाजा छोड़ने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा. इजराइली सेना फिलिस्तीनी क्षेत्रों से वापस हटना शुरू कर देगी.
3. हमास 7 अक्टूबर 2023 को कब्जे में लिए गए सभी बंधकों को रिहा करेगा, चाहे वे जीवित हों या मृत. एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार, हमास के कब्जे में कुल 48 बंधक हैं, जिनमें से 20 के जीवित होने की संभावना है.
4. इसके बदले में, इजराइल 250 आजीवन कैदियों और युद्ध शुरू होने के बाद से गाजा में हिरासत में लिए गए 1,700 फिलिस्तीनियों को रिहा करेगा. इसके अलावा, इजराइल हर रिहा किए गए बंधक के बदले 15 फिलिस्तीनी शव सौंपेगा.
5. पीस प्लान के स्वीकार होने पर तुरंत युद्धविराम लागू होगा. इसके अलावा, अमेरिका फिलिस्तीनियों और इजराइलियों के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा.
6. प्रपोजल में यह भी कहा गया है कि हमास,फिलिस्तीनी सैन्य समूह, भविष्य में गाजा के मामलों में कोई भूमिका नहीं निभाएगा. नेतन्याहू ने शांति प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है, हमास ने अभी तक इस पर रिएक्शन नहीं दिया है.
7. हमास फिलिस्तीनी क्षेत्र का कंट्रोल जनीतिक रूप से निष्पक्ष फिलिस्तीनी ग्रुप को सौंप देगा, जो सार्वजनिक सेवाओं की जिम्मेदारी संभालेगी.
8. इस संस्था की निगरानी एक “शांति बोर्ड” करेगा, जिसकी अध्यक्षता ट्रंप करेंगे. इसमें दुनिया के अन्य नेताओं के साथ पूर्व ब्रिटिश प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर भी शामिल होंगे.
9. इज़राइल गाजा के अंदर “सुरक्षा घेरा” बनाए रखेगा.
10. “सुरक्षा घेरा” का अर्थ यह हो सकता है कि इजराइल गाजा के भीतर एक बफर जोन बनाए रखे.

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लेखक के बारे में

By Amitabh Kumar

अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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