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अब गजनी पर तालिबान का कब्जा, अफगानिस्तान ने दिया सत्ता में साझीदारी का ऑफर

अफगानिस्तान से अमेरिका और नाटो बलों की वापसी के बीच तालिबान ने बृहस्पतिवार को काबुल के निकट एक और प्रांतीय राजधानी पर कब्जा कर लिया.

By Prabhat khabar Digital
Updated Date
अफगानिस्तान ने तालिबान को दिया सत्ता में साझीदारी का ऑफर
अफगानिस्तान ने तालिबान को दिया सत्ता में साझीदारी का ऑफर
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काबुल: अफगानिस्तान में सरकार का इकबाल लगभग खत्म हो गया है. तालिबान एक के बाद एक प्रांत पर कब्जा करता जा रहा है. अफगानिस्तान को जहन्नुम बना देने वाला तालिबान काबुल से महज 130 किलोमीटर दूर है. ऐसे में खुद को हारता देख अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी ने अपने देश में शांति के लिए तालिबान को सत्ता में साझेदारी का ऑफर दिया है.

अशरफ गनी ने तालिबान और अफगानिस्तान सरकार के बीच मध्यस्थता कर रहे कतर को ये प्रस्ताव भेजा है. गनी सरकार हर हाल में अफगानिस्तान के लोगों की सुरक्षा और देश में शांति चाहती है. अमेरिकी प्रतिनिधि जालमाय खालिजाद इस मुद्दे पर इंटरनेशील मीटिंग में शामिल होने के लिए कतर पहुंच गये हैं. अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अफगानिस्तान के हालात पर चर्चा के लिए इस सप्ताह दोहा में दो अहम बैठकें हो रही हैं.

बहरहाल, अफगानिस्तान से अमेरिका और नाटो बलों की वापसी के बीच तालिबान ने बृहस्पतिवार को काबुल के निकट एक और प्रांतीय राजधानी पर कब्जा कर लिया. इसके साथ ही यह आतंकवादी संगठन अब तक 10 प्रांतीय राजधानियों पर कब्जा कर चुका है.

काबुल के दक्षिण-पश्चिम में 130 किलोमीटर की दूरी पर स्थित गजनी में उग्रवादियों ने श्वेत झंडे फहराये गये. दो स्थानीय अधिकारियों ने इंटरनेशनल मीडिया को बताया कि शहर के बाहर स्थित एक सैन्य प्रतिष्ठान और खुफिया ठिकाने पर छिटपुट लड़ाई अब भी चल रही है.

तालिबान की ओर से ऑनलाइन वीडियो और तस्वीरें डाली गयीं, जिनमें उसके लड़ाके गजनी प्रांत की राजधानी गजनी में नजर आ रहे हैं. कई दिनों से जारी लड़ाई पर अफगान सुरक्षा बल और सरकार कोई टिप्पणी करने को तैयार नहीं है.

लगातार बढ़त बना रहा तालिबान

लगातार बढ़त बना रहे तालिबान से काबुल को सीधे कोई खतरा नहीं है, लेकिन उसकी तेज बढ़त सवाल खड़े करती है कि अफगान सरकार अपने पास बचे इलाकों को आखिर कब तक नियंत्रण में रख पायेगी. संभवत: सरकार राजधानी और कुछ अन्य शहरों को बचाने के लिए अपने कदम वापस लेने पर मजबूर हो जाये, क्योंकि लड़ाई के कारण विस्थापित हजारों लोग काबुल भाग आये हैं और खुले स्थानों और उद्यानों में रह रहे हैं.

गजनी प्रांत के परिषद सदस्य अमानुल्ला कामरानी ने मीडिया को बताया कि शहर के बाहर बने दो बेस अब भी सरकारी बलों के कब्जे में हैं. इस बीच अफगानिस्तान के सबसे बड़े शहरों में से एक लश्कर गाह में लड़ाई तेज हो गयी है. हेलमंड से सांसद नसीमा नियाजी ने बताया कि बुधवार को आत्मघाती कार बम हमले में राजधानी के क्षेत्रीय पुलिस मुख्यालय को निशाना बनाया गया था.

बृहस्पतिवार को तालिबान ने मुख्यालय पर कब्जा कर लिया और कुछ पुलिस अधिकारियों ने उनके सामने आत्मसमर्पण कर दिया, तो कुछ ने नजदीक के गवर्नर्स कार्यालय में शरण ली, जो अब भी सरकारी बलों के कब्जे में है. नियाजी ने बताया कि प्रांतीय कारागार पर भी आत्मघाती कार बम हमला हुआ हालांकि इस पर अब भी सरकारी बलों का कब्जा है.

तालिबान ने सैकड़ों आतंकवादियों को छुड़ाया

तालिबान बीते एक हफ्ते में अपने सैकड़ों आतंकवादियों को छुड़वा चुका है तथा हथियारों और वाहनों पर कब्जा कर चुका है. नियाजी ने इलाके में हवाई हमलों की निंदा की और आशंका जतायी कि इसमें आम नागरिक मारे जा सकते हैं. उन्होंने कहा, ‘तालिबान के लड़ाके स्वयं को सुरक्षित करने के लिए आम लोगों के घरों का इस्तेमाल करते हैं और सरकार नागरिकों की परवाह किये बगैर हवाई हमले कर रही है.’

माना जा रहा है कि अमेरिकी वायु सेना हवाई हमलों में अफगान बलों की मदद कर रही है. अमेरिकी बम हमलों में कितने लोग मारे गये हैं, इसकी अभी जानकारी नहीं मिल पायी है.

Posted By: Mithilesh Jha

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