जंग थमी, खुलेगा होर्मुज… लेकिन क्या दुनिया से कीमत वसूलेगा ईरान?

Published by : Pritish Sahay Updated At : 08 Apr 2026 10:04 AM

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होर्मुज स्ट्रेट, फोटो सोर्स- पीटीआई, एएनआई

US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान दो हफ्ते के सीजफायर पर राजी हो गए हैं. ट्रंप ने हमले रोकने का ऐलान किया है, ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट खोलने पर सहमति जताई है. इस बीच सवाल है कि क्या तेहरान यहां से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलेगा?

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US Iran Ceasefire: अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते का सीजफायर हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार देर रात ईरान पर बड़े हमलों की अपनी धमकी से पीछे हटते हुए युद्धविराम का ऐलान किया. यह फैसला उन्होंने तेहरान को समझौते के लिए दी गई तय डेडलाइन खत्म होने से करीब दो घंटे पहले लिया. ईरान भी दो हफ्ते के सीजफायर के लिए राजी हो गया है. मिडिल ईस्ट में टेंशन फिलहाल खत्म होने के बाद ईरान होर्मुज खोलने को भी तैयार है. इस बीच सवाल उठ रहा है कि क्या अब ईरान होर्मुज से गुजरने के लिए टोल वसूलेगा?

अराघची ने सोशल मीडिया पर कही यह बात

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने सोशल मीडिया पर कहा- दो हफ्तों के लिए होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित आवाजाही हो सकती है. इस बीच उन्होंने यहां से गुजरने वाले जहाजों के लिए टोल वसूले जाने को लेकर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. लेकिन उन्होंने अपने पोस्ट में ईरानी फोर्स से कॉर्डिनेशन और टेक्निकल लिमिटेशन की बात कही है. यानी ईरान होर्मुज में अपना दावा जारी रख रहा है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से टोल वसूल सकता है ईरान!

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लंबे समय से अंतर्राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता रहा है, इसपर कोई टोल नहीं लगता था. लेकिन मिडिल ईस्ट युद्ध के दौरान ईरान ने इस रूट को बंद कर दिया. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि ईरान और ओमान होर्मुज़ स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों से फीस वसूल सकता है. यह भी उम्मीद की जा रही है कि ईरान होर्मुज से होने वाली कमाई का इस्तेमाल युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए करेगा.

कितने जहाज होर्मुज से गुजरते हैं?

शिपिंग इंडस्ट्री के बारे में जानकारी देने वाली वेबसाइट लॉयड्स लिस्ट के मुताबिक होर्मुज से आमतौर पर हर दिन 100 से 120 जहाज गुजरते हैं. दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई इसी रूट से होती है. अगर होर्मुज पर ईरान टैक्स लगाता है, तो दुनिया भर में तेल और गैस की कीमत बढ़ जाएगी. एशियाई देश होर्मुज पर बहुत अधिक निर्भर हैं. इसी रास्ते चीन, भारत, जापान, साउथ कोरिया और यूरोप के कई देशों तक Liquefied Natural Gas (LNG) पहुंचता है. ऐसे में होर्मुज से ईरान को अच्छी कमाई हो सकती है. वैसे अगर ईरान टोल वसूलता है तो इससे अंतर्राष्ट्रीय बाजार में तेज और गैस महंगे हो सकते हैं.

ईरान को होर्मुज से कैसे हो सकती है मोटी कमाई?

कुछ मीडिया रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि अगर ईरान होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से प्रति जहाज 15 लाख डॉलर (करीब 14 करोड़ रुपये) तक वसूल सकता है. इस लिहाज से वह अकेले कच्चे तेल टैंकरों से हर महीने 4.5 अरब डॉलर की मोटी कमाई कर सकता है. ईरान ने जंग के दौरान भी कुछ जहाजों से टोल वसूला था. हालांकि इसकी पुख्ता जानकारी नहीं है कि ईरान ने कितना टोल लिया था. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक 10 से 15 मिलियन डॉलर टोल वसूला गया था.

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Pritish Sahay

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By Pritish Sahay

प्रीतीश सहाय, इन्हें इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया इंडस्ट्री में 12 वर्षों से अधिक का अनुभव है. ये वर्तमान में प्रभात खबर डॉट कॉम के साथ डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया जगत में अपने अनुभव के दौरान उन्होंने कई महत्वपूर्ण विषयों पर काम किया है और डिजिटल पत्रकारिता की बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट रखा है. इनकी शिक्षा-दीक्षा झारखंड की राजधानी रांची में हुई है. संत जेवियर कॉलेज से ग्रेजुएट होने के बाद रांची यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. इसके बाद लगातार मीडिया संस्थान से जुड़े रहे हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत जी न्यूज से की थी. इसके बाद आजाद न्यूज, ईटीवी बिहार-झारखंड और न्यूज 11 में काम किया. साल 2018 से प्रभात खबर के साथ जुड़कर काम कर रहे हैं. प्रीतीश सहाय की रुचि मुख्य रूप से राजनीतिक खबरों, नेशनल और इंटरनेशनल इश्यू, स्पेस, साइंस और मौसम जैसे विषयों में रही है. समसामयिक घटनाओं को समझकर उसे सरल भाषा में पाठकों तक पहुंचाने की इनकी हमेशा कोशिश रहती है. वे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय राजनीति से जुड़े मुद्दों पर लगातार लेखन करते रहे हैं. इसके साथ ही विज्ञान और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों पर भी लिखते हैं. डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में काम करते हुए उन्होंने कंटेंट प्लानिंग, न्यूज प्रोडक्शन, ट्रेंडिंग टॉपिक्स जैसे कई क्षेत्रों में काम किया है. तेजी से बदलते डिजिटल दौर में खबरों को सटीक, विश्वसनीय और आकर्षक तरीके से प्रस्तुत करना पत्रकारों के लिए चुनौती भी है और पेशा भी, इनकी कोशिश इन दोनों में तालमेल बनाते हुए बेहतर और सही आलेख प्रस्तुत करना है. वे सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म की जरूरतों को समझते हुए कंटेंट तैयार करते हैं, जिससे पाठकों तक खबरें प्रभावी ढंग से पहुंच सकें. इंटरनेशनल विषयों में रुचि होने कारण देशों के आपसी संबंध, वार अफेयर जैसे मुद्दों पर लिखना पसंद है. इनकी लेखन शैली तथ्यों पर आधारित होने के साथ-साथ पाठकों को विषय की गहराई तक ले जाने का प्रयास करती है. वे हमेशा ऐसी खबरों और विषयों को प्राथमिकता देते हैं जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय लिहाज से महत्वपूर्ण हों. रूस यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट संकट जैसे विषयों से लेकर देश की राजनीतिक हालात और चुनाव के दौरान अलग-अलग तरह से खबरों को पेश करते आए हैं.

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