पाकिस्तानी फौज ने बलूचिस्तान के आगे टेके घुटने? रक्षा मंत्री का संसद में कबूलनामा- ‘विद्रोहियों के पास हमसे बेहतर हथियार' 

Updated at : 04 Feb 2026 11:00 AM (IST)
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Pakistan Balochistan Crisis Defence Minister Admits Military Failure

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ.

Pakistan Balochistan Crisis: बलूचिस्तान में पाकिस्तान की पकड़ ढीली पड़ गई है. रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने खुद संसद में कबूल किया कि फौज बागियों को रोकने में लाचार है. विद्रोहियों के पास हाई-टेक लेजर और महंगे हथियार हैं, जबकि सेना के पास संसाधनों की कमी है. खरबों के खनिज भंडार और CPEC प्रोजेक्ट्स पर बढ़ते खतरे के बीच, क्या पाकिस्तान अपने सबसे अमीर प्रांत को खो रहा है?

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Pakistan Balochistan Crisis: पाकिस्तान के सबसे बड़े और संसाधनों से भरे सूबे ‘बलूचिस्तान’ पर अब उसकी पकड़ ढीली पड़ती दिख रही है. हैरानी की बात यह है कि यह दावा किसी बाहरी एजेंसी ने नहीं, बल्कि खुद पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने संसद (नेशनल असेंबली) में किया है. उनके बयान से ऐसा लग रहा है जैसे पाकिस्तान ने इस बगावत के आगे घुटने टेक दिए हैं.

इलाका बहुत बड़ा है, कंट्रोल करना नामुमकिन

रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने नेशनल असेंबली में खुलकर अपनी लाचारी जाहिर की. उन्होंने कहा कि बलूचिस्तान पाकिस्तान के कुल क्षेत्रफल का 40 प्रतिशत हिस्सा है. इतने बड़े इलाके पर पूरी तरह कंट्रोल करना लगभग नामुमकिन है. उनके अनुसार, हालांकि सैनिक वहां गश्त लगा रहे हैं, लेकिन शारीरिक रूप से पूरे प्रांत को सुरक्षित करना फौज की क्षमता से बाहर है.

पाकिस्तानी फौज से ज्यादा हाई-टेक हैं बलूच विद्रोही बलूच विद्रोहियों

मंत्री ने एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया. उन्होंने बताया कि बलूच बागी पाकिस्तानी सेना से कहीं ज्यादा बेहतर हथियारों का इस्तेमाल कर रहे हैं.

लेजर गन्स: विद्रोहियों के पास 4 से 5 हजार डॉलर वाले हीट-डिटेक्टिंग लेजर हैं, जो पाकिस्तानी फौज के पास भी नहीं हैं.

महंगी राइफलें: बागी करीब 20 लाख पाकिस्तानी रुपये की राइफलें और 20 हजार डॉलर (करीब 16-17 लाख रुपये) के फुल कॉम्बैट गियर किट का इस्तेमाल कर रहे हैं.

इलाके का फायदा: उन्होंने यह भी माना कि बलूचिस्तान के पहाड़ बागियों को छिपने में मदद करते हैं, जबकि पंजाब और सिंध के मैदानों में ऐसा नहीं है.

बीएलए (BLA) का हमला और फौज की ‘भागती’ तस्वीरें

हाल के दिनों में ‘बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी’ (BLA) ने कई जिलों में एक साथ बड़े हमले किए हैं. इन हमलों में दर्जनों नागरिकों और सैनिकों की जान गई है. सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे वीडियो भी वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि हमले के वक्त पाकिस्तानी सैनिक अपनी चौकियां छोड़कर भाग रहे हैं. हालांकि इन वीडियो की पूरी तरह पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन इनसे पाकिस्तान की साख को भारी धक्का लगा है.

खरबों का खजाना, फिर भी सबसे गरीब

‘डॉन’ की रिपोर्ट के अनुसार, बलूचिस्तान में तांबा, सोना, कोयला और क्रोमाइट जैसे खनिजों का भंडार है जिनकी कीमत खरबों डॉलर है. अकेले ‘रेको डिक’ प्रोजेक्ट में ही 5.9 अरब टन तांबा और सोना है. 

लेकिन स्थानीय लोगों में गुस्सा इस बात का है कि उन्हें अपनी ही जमीन के इन संसाधनों का फायदा नहीं मिलता. स्थानीय लोगों को इन बड़े प्रोजेक्ट्स से महज 2% रॉयल्टी मिलती है, जबकि सारा मुनाफा इस्लामाबाद और विदेशी कंपनियां ले जाती हैं.

चीन के प्रोजेक्ट्स पर भी संकट

बलूच अब चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) और माइनिंग साइट्स को निशाना बना रहे हैं. जानकारों का मानना है कि अगर यह हिंसा नहीं रुकी, तो पाकिस्तान अपने हाथ से 6 से 8 ट्रिलियन डॉलर की रेयर अर्थ मेटल्स (महंगे खनिज) खो देगा, जो आज की ग्लोबल टेक्नोलॉजी के लिए बहुत जरूरी हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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