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विश्व के शीर्ष डॉक्टरों और वैज्ञानिकों ने कहा- अखबार से नहीं फैलता है वायरस संक्रमण

By Pritish Sahay
Updated Date

मीडियाकर्मी विपरीत परिस्थितियों में भी जनसामान्य तक सूचनाएं पहुंचाने से नहीं चूकते हैं. कोरोना जैसी वैश्विक महामारी के बीच भी वे अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रहे हैं, जिसकी तारीफ प्रधानमंत्री मोदी ने भी की है. लेकिन, इस बीच सोशल मीडिया पर एक भ्रामक जानकारी फैलायी जा रही है कि अखबारों से भी कोरोना का संक्रमण हो रहा है, जबकि इस बात का कोई सबूत नहीं है.

वि श्व के शीर्ष डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के अनुसार, अब तक एक भी ऐसी घटना सामने नहीं आयी है, जिससे यह पता चल सके कि अखबारों, पत्रिकाओं, चिट्ठियों से कोविड-9 का संक्रमण फैलता है. हाल ही में इस संबंध में इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन ने विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसे कई संस्थानों से इस बाबत प्रश्न पूछा कि क्या अखबारों या पत्रिकाओं से कोरोना वायरस का संक्रमण फैलता है. जानिये इस संबंध में वैश्विक संगठनों ने क्या राय व्यक्त की है.

शोध क्या कहते हैं इस बारे में

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि इस बात की संभावना बहुत कम है कि कोई संक्रमित व्यक्ति किसी वस्तु को संक्रमित कर सकता है. बाहर से आये पैकेट को लेने में कोई खतरा नहीं है, जिन इलाकों से कोविड-19 के मामले सामने आये हैं, वहां भी पैकेट रिसीव करना सुरक्षित है.

हार्टफोर्ड हेल्थकेयर ने कहा है कि अपने घर आये डिलीवरी को लेने से डरें नहीं. कोरोना वायरस लंबे समय तक किसी वस्तु पर जिंदा नहीं रहता है.

रुखे सतह पर खत्म हो जाती है वायरस की क्षमता

वाशिंगटन पोस्ट में जोएल अचेंबक ने लिखा कि निर्जीव सतह पर, वायरस धीरे-धीरे एक संक्रामक एजेंट बनने की क्षमता खो देता है. पराबैंगनी विकिरण के संपर्क में आने पर इसकी संक्रामक क्षमता कम हो सकती है. सतह पर छींक की बूंदें हजारों वायरस को जमा कर सकती है, और इनमें से कुछ वायरस कई दिनों तक सक्रिय बने रह सकते हैं. इसके बावजूद, छींक के संपर्क में आनेवाले व्यक्ति के संक्रमित होने की संभावना समय के साथ कम हो जाती है, क्योंकि अधिकांश संक्रमण बड़ी संख्या में वायरस के एकत्रित होने के कारण फैलता है.

न्यूजप्रिंट पर वायरस नहीं रहता सक्रिय

बीते हफ्ते न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की एक रिपोर्ट में अलग-अलग सतहों पर कोरोना वायरस के जिंदा रहने की अवधि के बारे में बताया गया. यह अध्ययन नेशनल इंस्टीटूट ऑफ हेल्थ, सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल, यूसीएलए और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने प्रकाशित किया है.

शोध में एयरोसोल, प्लास्टिक, इस्पात, तांबा और कार्डबोर्ड पर वायरस के जिंदा रहने के बारे में जानकारी दी गयी है. इसके अनुसार, आण्विक बनावट के कारण तांबा और संभवतः छिद्रदार होने के कारण कार्डबोर्ड के जरिये कोरोना वायरस के फैलने की संभावना सबसे कम है. कोरोना वायरस चिकने सतह पर सबसे ज्यादा समय तक जिंदा रहता है. प्लास्टिक और इस्पात पर वायरस तीन दिनों से भी ज्यादा समय तक सक्रिय रहता है.

शोध में कहा गया है कि हवा के संपर्क में आने के बाद वायरस की ताकत तेजी से कम हो जाती है. हर 66 मिनट में वायरस की क्षमता आधी हो जाती है. पहली बार सतह पर आने के तीन घंटे बाद इसके संक्रमित करने की क्षमता कुल क्षमता का आठवां हिस्सा रह जाती है. छह घंटे बाद इसकी व्यवहार्यता महज दो प्रतिशत रह जाती है. कार्डबोर्ड पर 24 घंटे रहने के बाद यह निष्क्रिय हो जाता है. इस अध्ययन की मानें तो, अखबारी कागज, जो कार्डबोर्ड से भी ज्यादा छिद्रदार होता है, पर वायरस के सक्रिय रहने की अवधि संभवतः काफी कम है.

प्रधानमंत्री ने कहा- समाचार पत्र िवश्वसनीय हैं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीते मंगलवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम मीडिया प्रमुखों के साथ बातचीत की.

उन्होंने कोरोना वायरस से जुड़ी सूचनाओं को प्रसारित करने में मीडिया की भूमिका को सराहा. प्रधानमंत्री ने कहा कि मीडिया ने देश के सुदूरवर्ती इलाकों तक सूचना का प्रसार करने में प्रशंसनीय भूमिका निभायी है. उन्होंने कहा कि समाचार पत्र जबरदस्त विश्वसनीयता रखते हैं, इसलिए यह आवश्यक है कि प्रकाशित लेखों के माध्यम से कोरोना वायरस के बारे में जागरूकता फैलायी जाये. साथ ही लोगों को इस बात की जानकारी दी जाये कि परीक्षण केंद्र कहां हैं.

परीक्षण करवाने के लिए किससे संपर्क करना चाहिए और घर के आइसोलेशन प्रोटोकॉल का पालन कैसे करना चाहिए. प्रधानमंत्री ने कहा कि यह जानकारी समाचार पत्रों और वेब पोर्टलों में साझा की जानी चाहिए. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि लॉकडाउन के दौरान आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता के स्थान जैसी जानकारी भी अखबारों के क्षेत्रीय पन्नों पर साझा की जा सकती है. प्रधानमंत्री ने मीडिया से राष्‍ट्रीय और क्षेत्रीय, दोनों स्‍तरों पर सरकार और जनता के बीच कड़ी का काम करने तथा निरंतर फीडबैक उपलब्‍ध कराने को कहा.

उन्‍होंने सोशल डिस्‍टेंसिंग के बारे में जागरूकता फैलाने, लॉकडाउन से जनता को अवगत कराने, वैश्विक आंकड़ों और अन्‍य देशों की केस स्‍टडीज के माध्‍यम से लोगों को जागरूक करने को कहा. उन्होंने प्रिंट मीडिया से संकट की इस घड़ी में गलत सूचना के प्रसार को रोकने की भी अपील की. देश के नाम अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने मीडिया को आवश्यक सेवाओं की श्रेणी में रखा है. लॉकडाउन के दौर में भी मीडिया कर्मियों को काम पर आने-जाने की छूट दी गयी है, ताकि कोरोना वायरस को फैलने से रोकने के लिए किये जा रहे हर महत्वपूर्ण प्रयासों के बारे में लोग जान सकें और इन्हें अपना सकें.

निष्कर्ष

सभी वैज्ञानिक निष्कर्षों से यह स्पष्ट है कि झिरझिरे पेपर की

सतह, जिसमें अखबारी कागज भी शामिल है, वह

कोरोनावायरस से सुरक्षित है.

अखबार के माध्यम से कोविड-19 के फैलाव की अभी तक कोई घटना सामने नहीं आयी है.

वायरस संक्रमण की शुरुआती वैज्ञानिक रिसर्च से स्पष्ट है कि झिरझिरे सतह पर वायरस के टिकने की संभावना और अवधि न्यूनतम होती है.

स्याही और प्रकाशन प्रक्रिया की वजह से भी अखबार कहीं अधिक जीवाणुरहित होते हैं.

ग्राहकों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रकाशक अपने प्रकाशन केंद्रों, वितरण केंद्रों, न्यूजस्टैंड और होम डिलीवरी के दौरान सावधानी बरत रहे हैं.

(साभार- अर्ल जे विलकिंसन, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर

व सीइओ, इंटरनेशनल न्यूज मीडिया एसोसिएशन (आइएनएमए) यूएस के आलेख का अंश)

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की प्रमुख महामारी विशेषज्ञ निवेदिता गुप्ता ने कहा है कि कोविड-19 सांस लेने की प्रक्रिया का संक्रमण है और इसका खतरा अखबार या बंडल छूने से नहीं है.

नेशनल सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल के निदेशक सुजीत सिंह ने जानकारी दी है कि केंद्र का हेल्पलाइन नंबर 24 घंटे ऐसी अफवाहों को दूर करने में लगा हुआ है. उन्होंने बताया है कि शोध करनेवाले वायरलॉजिस्टों ने ऐसा कोई भी सबूत नहीं पाया है कि कोरोना वायरस कागज पर सक्रिय या जीवित रह सकता है. सेंटर के सामने भी ऐसी अफवाहें आ रही हैं और विशेषज्ञ उनका निराकरण कर रहे हैं.

विख्यात हार्ट सर्जन देवी शेट्टी ने ऐसी किसी भी संभावना से इनकार किया है कि वायरस घंटों तक हवा में बचा रह सकता है. उनका कहना है कि वायरस सतहों पर अधिक समय तक जीवित नहीं रह सकता है. ऐसा होने के लिए उसका म्यूटेशन जरूरी है. जानकारों का कहना है कि कोविड-19 व्यक्ति से व्यक्ति में संक्रमित होता है और वह भी जो बहुत निकट संपर्क में आते हैं. अभी तक ऐसा कोई सबूत शोध में नहीं मिला है कि यह संक्रमण हवा से फैलता हो.

विश्व व्यापार संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया की क्षेत्रीय निदेशक डॉ पूनम खेत्रपाल सिंह के अनुसार, हवा के जरिये कोविड-19 के संक्रमण के प्रसार का प्रमाण अभी तक के अनुसंधान में सामने नहीं आया है. यह खांसी, छींकने आदि के माध्यम से फैल रहा है. इसीलिए संगठन ने लोगों को सांस और हाथ से जुड़ी स्वच्छता रखने का अनुरोध किया है.

देश के प्रतिष्ठित मेडिकल सन्थान दिल्ली स्थित एम्स के निदेशक डॉ रणदीप गुलेरिया ने भी साफ किया है किसी संक्रमित व्यक्ति द्वारा संक्रमण को बंडलों के माध्यम से कहीं पहुंचाने की संभावना बहुत ही कम है. कार्डबोर्ड पर वायरस स्टील या धातु की तुलना में बहुत ही कम समय के लिए जीवित रह सकता है, इसलिए अखबारों के माध्यम से वायरस के फैलने की कोई गुंजाइश ही नहीं है.

अमेरिका के सेंटर फ़ॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रीवेन्शन ने भी दावा किया है कि अखबार की डिलेवरी से कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने की संभावना न के बराबर है.

भारत के प्रमुख हृदय शल्य चिकित्सक डॉ नरेश त्रेहन ने साफ कहा है कि अखबार से संक्रमण के प्रसार की आशंका केवल अफवाह भर है.

मुश्किल है अखबार पर वायरस का िजंदा रहना: विश्व स्वास्थ्य संगठन

देश में कोरोना वायरस को प्रसार को रोकने के लिए किये जा रहे हर संभव प्रयासों के बीच लोगों में इसे लेकर कई तरह की अफवाहों व मिथकों का फैलाव भी शुरू हो गया है. ये अफवाहें उतनी ही खतरनाक हैं, जितना कि कोविड-19, क्योंकि इनसे लोगों में दहशत पैदा हो सकती है.

ऐसा ही एक अफवाह यह भी है कि समाचारपत्र कोरोना वायरस को फैलाने में वाहक बन सकते हैं. यह पूरी तरह से निराधार है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस बात की पुष्टि की है कि कोविड-19 को रोकने की लड़ाई में अखबार लेना व पढ़ना पूरी तरह सुरक्षित है. संगठन के मुताबिक, एक संक्रमित व्यक्ति से अखबार दूषित हो, इस बात की संभावना काफी कम है. अखबार का बंडल, जो लगातार सफर करता है, एक जगह से दूसरी जगह जाता है, अलग-अलग परिस्थितियों व तापमान से गुजरता है, उसमें कोरोना वायरस होने की संभावना काफी कम हो जाती है.

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