ईरान से युद्ध चाहते थे नेतन्याहू: ट्रंप ने की 'हां', पर ओबामा, बुश और बाइडन ने क्यों कहा था 'नो'?


Netanyahu Iran War Plan: अमेरिकी पूर्व विदेश मंत्री जॉन केरी ने इजरायली पीएम नेतन्याहू की जिद पर चौंकाने वाली जानकारी साझा की है. न्यूयॉर्क टाइम्स और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स के आधार पर जानिए कैसे तीन राष्ट्रपतियों के इनकार के बाद ट्रंप ने 'ऑपरेशन एपिक फ्यूरी' को हरी झंडी दी और इस फैसले का ईरान पर क्या असर हुआ.
Netanyahu Iran War Plan: पूर्व अमेरिकी विदेश मंत्री जॉन केरी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है. ‘द लेट शो विद स्टीफन कोलबर्ट’ में बातचीत के दौरान केरी ने बताया कि नेतन्याहू ने कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों के सामने ईरान पर हमले का प्रस्ताव रखा था, लेकिन हर बार उन्हें मना कर दिया गया. केरी के मुताबिक, जब ओबामा राष्ट्रपति थे और वे खुद विदेश मंत्री, तब भी नेतन्याहू युद्ध चाहते थे, लेकिन अमेरिका ने साफ ‘नो’ कह दिया था.
तीन राष्ट्रपतियों ने ठुकराया प्रस्ताव
जॉन केरी ने बताया कि सिर्फ ओबामा ही नहीं, बल्कि जॉर्ज डब्लू बुश और जो बाइडन ने भी नेतन्याहू के युद्ध वाले प्लान को खारिज कर दिया था. केरी ने कहा कि वे खुद उन चर्चाओं का हिस्सा थे और उन्हें सब अच्छे से याद है. इन नेताओं का मानना था कि शांति के लिए बातचीत के रास्ते अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुए हैं, इसलिए सीधे युद्ध करना ठीक नहीं होगा.
Former US Secretary of State John Kerry says that Israeli Prime Minister Netanyahu had proposed the war on Iran to Presidents Obama, Bush, and Biden, but they all refused. The prediction was regime change, that people would rise up, but we saw that none of that happened. pic.twitter.com/932qTbqj31
— Press TV 🔻 (@PressTV) April 22, 2026
नेतन्याहू का गलत अनुमान
द न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए जॉन केरी ने कहा कि नेतन्याहू का मानना था कि ईरान पर हमला करने से वहां के लोग सरकार के खिलाफ विद्रोह कर देंगे और तख्तापलट हो जाएगा. केरी ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. नेतन्याहू का यह अंदाजा पूरी तरह गलत साबित हुआ.
डोनाल्ड ट्रंप ने दी मंजूरी
‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ की रिपोर्ट के मुताबिक, जहां तीन राष्ट्रपतियों ने मना किया, वहीं डोनाल्ड ट्रंप ने इस पर सहमति जताई थी. जब नेतन्याहू ने ट्रंप के सामने अपनी बात रखी, तो ट्रंप ने कहा था, “ओके, बाय मी” (मेरी तरफ से ठीक है). हालांकि, रिपोर्ट बताती है कि ट्रंप की टीम के कुछ सदस्यों ने इस प्लान को बकवास बताया था, लेकिन ट्रंप की सोच नेतन्याहू से मिल रही थी. इसके दो हफ्ते बाद ही ट्रंप ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को मंजूरी दे दी थी.
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वियतनाम और इराक युद्ध की सीख
जॉन केरी ने वियतनाम युद्ध का उदाहरण देते हुए चेतावनी दी कि अमेरिकी जनता से झूठ बोलकर उन्हें युद्ध में नहीं झोंकना चाहिए. उन्होंने कहा कि वियतनाम और इराक की तरह इस मामले में भी गुमराह करने की कोशिश की गई. केरी का कहना है कि सरकार को अपने देश के बच्चों को तब तक लड़ने के लिए नहीं भेजना चाहिए जब तक सच सामने न हो.
युद्ध का असर
11 फरवरी को जब नेतन्याहू व्हाइट हाउस गए, तब से इस पूरे विवाद की शुरुआत हुई. इस महीने भर चले संघर्ष में ईरान में 2,000 से ज्यादा लोगों की जान जा चुकी है और दुनिया की अर्थव्यवस्था पर भी बुरा असर पड़ा है. रॉयटर्स की 8 अप्रैल की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने इजरायल के समर्थन से ईरान पर हमले को दो हफ्ते के लिए टाला था ताकि बातचीत हो सके. इजरायल इस शर्त पर राजी हुआ था कि ईरान तुरंत समुद्री रास्ते (स्ट्रेट) खोलेगा और हमले रोकेगा. अमेरिका ने इजरायल को भरोसा दिया है कि वह ईरान को परमाणु खतरा नहीं बनने देगा, हालांकि लेबनान में सीजफायर लागू नहीं हुआ है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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