पाकिस्तान में भारत का एक और दुश्मन ढेर, जानें कौन था लश्कर कमांडर अकरम गाजी जिसे मारी गई गोली

Published by : Amitabh Kumar Updated At : 10 Nov 2023 10:48 AM

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पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात बाइक सवार ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के कमांडर अकरम खान गाजी को गोली मार दी. जानें कैसे वह भारत के खिलाफ उगलता था जहर और कैसे देता था आतंकी घटना को अंजाम

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पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. भारत के एक दुश्मन के मारे जाने की खबर पड़ोसी मुल्क से आ रही है. इस संबंध में अंग्रेजी वेबसाइट टाइम्स ऑफ इंडिया ने खबर दी है. खबरों की मानें तो लश्कर ए-तैयबा के पूर्व कमांडर अकरम खान उर्फ अकरम गाजी की गोली मारी गई है जिसमें उसकी जान चली गई. अकरम भारत को अपना दुश्मन मानता था और भारत विरोधी बातें करता था. जो खबर आ रही है उसके अनुसार 2018 से 2020 तक लश्कर में भर्ती का काम अकरम गाजी के जिम्मे था. अकरम गाजी को दस नवंबर को बाजौर में अज्ञात हमलावरों ने गोली मार दी. अकरम की बात करें तो उसकी गिनती लश्कर के टॉप कमांडर्स में होती थी. काफी लंबे समय से वह आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता आ रहा था. अकरम से पहले भी कई आतंकी इसी तरह मारे जा चुके हैं. मुफ्ती कैसर फारूक हो या खालिस्तानी आतंकी परमजीत सिंह पंजवड़, इनको भी हमलावरों ने मार गिराया था. इनके अलावा एजाज अहमद अहंगर, बशीर अहमद पीर जैसे तमाम आतंकियों की जान इसी तरह जा चुकी है.

भारत के खिलाफ जहर उगलता था अकरम खान गाजी

जो खबर सामने आ रही है उसके अनुसार, पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में अज्ञात बाइक सवार ने लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के कमांडर अकरम खान गाजी को गोली मार दी. पाकिस्तानी एजेंसियां गाजी की हत्या की जांच के लिए स्थानीय गुटों में तनाव के साथ-साथ लश्कर के भीतर की लड़ाई की भी जांच कर रही हैं. गाजी के बारे में बताया जा रहा है कि वह लश्कर के सेंट्रल रिक्यूटमेंट सेल का एक प्रमुख सदस्य था और आतंकवादियों को कट्टरपंथी बनाने की जिम्मेदारी वह निभाता था. कश्मीर घाटी में घुसपैठ कराने में उसकी अहम भूमिका रहती थी. जो खबर सामने आई है उसके अनुसार पाकिस्तानी जासूसी एजेंसी आईएसआई गाजी की हत्या की खबर को दबाने का प्रयास कर रही है, जो भारत के खिलाफ जहरीला बयान देता था.

कई आतंकी मारे जा चुके हैं पहले

गाजी की हत्या पर गौर करें तो यह हाल के दिनों में लश्कर के किसी शीर्ष आतंकवादी की तीसरी हत्या है. यही नहीं यह हत्या इस साल सीमा पार से सक्रिय आतंकवादी संगठन के शीर्ष कमांडर की छठी हत्या है. गत रविवार को, 2018 आतंकी हमले के मास्टरमाइंड ख्वाजा शाहिद की लाश मिली थी जिसका सिर कटा हुआ था. इस आतंकी की लाश पाकिस्तान में नियंत्रण रेखा के पास मिली थी. इससे पहले धांगरी आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक रियाज अहमद उर्फ अबू कासिम की सितंबर में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हत्या कर दी गई थी. उसे एक मस्जिद के अंदर अज्ञात बंदूकधारियों ने गोली मार दी थी. मूल रूप से जम्मू क्षेत्र का रहने वाला अहमद 1999 में सीमा पार घुसपैठ करके चला गया था. उसे पुंछ और राजौरी के सीमावर्ती जिलों में आतंकवाद का प्रसार करने की जिम्मेदारी दी गई थी. वह ज्यादातर मुरीदके में लश्कर-ए-तैयबा बेस कैंप से काम करता था लेकिन हाल ही में रावलकोट में उसे भेज दिया गया था.

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मार्च के महीने में, प्रतिबंधित हिजबुल मुजाहिदीन के एक शीर्ष कमांडर की पाकिस्तान के रावलपिंडी में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी जिसकी चर्चा पूरे पाकिस्तान में हुई थी. जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के रहने वाले बशीर अहमद पीर उर्फ इम्तियाज आलम 15 साल से अधिक समय से पाकिस्तान को अपना ठिकाना बनाए हुए था. फरवरी के महीने में, अज्ञात बंदूकधारियों ने बंदरगाह शहर कराची में अल-बद्र मुजाहिदीन के पूर्व कमांडर सैयद खालिद रज़ा की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसे पुलिस ने टारगेट हमला करार दिया था.

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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.

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