Lashkar-e-Taiba: लश्कर में बगावत, आतंकी फारूक को गोलियों से भून डाला, हाफिज सईद को बड़ा झटका
Published by : Amitabh Kumar Updated At : 02 Oct 2023 9:34 AM
Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तानी मीडिया फारूक की हत्या के पीछे के संभावित मकसद पर कुछ भी बोलने से बच रहा है. हत्या के लिए लश्कर कैडरों के बीच अंदरूनी कलह को जिम्मेदार ठहराया है. जानें पूरा मामला
Lashkar-e-Taiba: पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आ रही है. जानकारी के अनुसार एक आतंकी ऑपरेटिव की रहस्यमय हत्या हुई है जिसकी चर्चा पूरे देश में हो रही है. खबरों की मानें तो अज्ञात बंदूकधारियों ने गत शनिवार कराची में लश्कर-ए-तैयबा के एक खूंखार आतंकी को गोली मार दी जिसमें उसकी मौत हो गई. मृतक की पहचान मुफ्ती कैसर फारूक के रूप में की गई, जिन्हें एधी सेंटर इलाके में गुलशन-ए-उमर मदरसा में गोलियों से भून दिया गया. पाकिस्तान के डॉन अखबार ने इस बाबत खबर प्रकाशित की है. मारे गये आतंकी की उम्र 30 वर्ष बताई जा रही है. टारगेट बनाकर उसकी हत्या की गई है. एक ओर जहां पाकिस्तानी मीडिया फारूक की हत्या के पीछे के संभावित मकसद पर कुछ भी कहने से बच रहा है. वहीं सूत्रों ने हत्या के लिए लश्कर कैडरों के बीच अंदरूनी कलह को जिम्मेदार ठहराया है. पाकिस्तानी मीडिया के रिपोर्टों की मानें तो पुलिस सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि फारूक को पीठ पर गोली मारी गई है. गोली लगने के बाद उसे अस्पताल ले जाया गया जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. हमले में एक 10 वर्षीय लड़का घायल हो गया.
हाई सिक्योरिटी वाले इलाके में हुई हत्या
फारूक की हत्या का सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है. वीडियो वायरल करके दावा किया जा रहा है कि ये फारूक की हत्या के वक्त का है. वायरल वीडियो में लोग भागते हुए नजर आ रहे हैं जबकि इसमें एक शख्स नजर आ रहा है जो गोली लगने के बाद सड़क पर गिरते हुए दिख रहा है. सूत्रों ने मामले को लेकर कहा कि हत्या को शर्प शूटरों ने अंजाम दिया है जो वहां के इलाके के बारे में पूरी तरह से अवगत थे. हत्या करने वाले स्थानीय भी हो सकते हैं. ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि ये हाई सिक्योरिटी वाला इलाका है. यहां कोई बाहरी आकर इस तरह की घटना को अंजाम नहीं दे सकता है.
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लश्कर में बगावत
यहां चर्चा कर दें सितंबर में, आतंकवादी संगठनों से जुड़े धार्मिक मौलवियों की हत्या की घटना सुनने को मिली थी. लश्कर के गुर्गों को सबसे ज्यादा निशाना बनाया गया है. हत्या ने आतंकवादी संगठन में अराजकता को भी सुर्खियों में लाने का काम किया है. बताया जा रहा है कि हाफिज सईद के बेटे का कद संग्ठन में बढ़ाने के खिलाफ लश्कर में एक बड़े वर्ग ने बगावत कर दी है.
हाफिज सईद के बेटे तल्हा को दूसरे नंबर का कमांडर बनाए जाने के खिलाफ जमकर विद्रोह की खबर आ रही है. तल्हा लश्कर-ए-तैयबा के दूसरे कमांडर के रूप में भारत के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों का नेतृत्व कर रहा है. यहां चर्चा कर दें कि वह 2019 में लाहौर में एक रेफ्रिजरेटर की दुकान के पास हुए बम विस्फोट में मारे जाने से बाल-बाल बच गया था जिसकी चर्चा ने सुर्खियां बटोरी थी.
आतंकियों को कहां दी जा रही है पनाह
पिछले दिनों लश्कर-ए-तैयबा के संचालक और प्रमुख मौलवी मौलाना जियाउर रहमान की हत्या के बाद, पाकिस्तान में एक दर्जन से अधिक आतंकवादियों और उनके समर्थकों को आईएसआई के सुरक्षित ठिकानों में जगह दी गई. उल्लेखनीय है कि रहमान की कराची के गुलिस्तान-ए-जौहर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी. रहमान को पॉइंट ब्लैंक रेंज से ताबड़तोड़ कई गोलियां मारी गई.
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अमिताभ कुमार झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और पिछले कई वर्षों से पत्रकारिता की दुनिया में सक्रिय हैं. डिजिटल न्यूज में अच्छी पकड़ है और तेजी के साथ सटीक व भरोसेमंद खबरें लिखने के लिए जाने जाते हैं. वर्तमान में अमिताभ प्रभात खबर डिजिटल में नेशनल और वर्ल्ड न्यूज पर फोकस करते हैं और तथ्यों पर आधारित खबरों को प्राथमिकता देते हैं. हरे-भरे झारखंड की मिट्टी से जुड़े अमिताभ ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जिला स्कूल रांची से पूरी की और फिर Ranchi University से ग्रेजुएशन के साथ पत्रकारिता की पढ़ाई की. पढ़ाई के दौरान ही साल 2011 में रांची में आयोजित नेशनल गेम को कवर करने का मौका मिला, जिसने पत्रकारिता के प्रति जुनून को और मजबूत किया.1 अप्रैल 2011 से प्रभात खबर से जुड़े और शुरुआत से ही डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय रहे. खबरों को आसान, रोचक और आम लोगों की भाषा में पेश करना इनकी खासियत है. डिजिटल के साथ-साथ प्रिंट के लिए भी कई अहम रिपोर्ट कीं. खासकर ‘पंचायतनामा’ के लिए गांवों में जाकर की गई ग्रामीण रिपोर्टिंग करियर का यादगार अनुभव है. प्रभात खबर से जुड़ने के बाद कई बड़े चुनाव कवर करने का अनुभव मिला. 2014, 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ झारखंड विधानसभा चुनावों (2014, 2019 और 2024) की भी ग्राउंड रिपोर्टिंग की है. चुनावी माहौल, जनता के मुद्दे और राजनीतिक हलचल को करीब से समझना रिपोर्टिंग की खास पहचान रही है.
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