क्या रूसी जासूस था एपस्टीन? नई फाइल्स में 1000 से भी ज्यादा बार आया पुतिन का नाम
Published by : Govind Jee Updated At : 11 Feb 2026 10:17 AM
क्या रूसी जासूस था एपस्टीन?
Jeffrey Epstein: जेफ्री एपस्टीन की नई फाइलों ने दुनिया को चौंका दिया है. इनसे पता चलता है कि वह कैसे रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ करीबी रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहा था. पुतिन का नाम 1,000 से ज्यादा बार आया है और सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एपस्टीन एक रूसी जासूस था?
Jeffrey Epstein: जेफ्री एपस्टीन, वो नाम जिसने पूरी दुनिया के अमीर और ताकतवर लोगों की नींद उड़ा रखी थी, उससे जुड़ी नई फाइल्स ने अब रूस में भी हलचल मचा दी है. 13 लाख से ज्यादा दस्तावेजों के इस नए भंडार ने खुलासा किया है कि एपस्टीन केवल पश्चिमी देशों तक सीमित नहीं था, बल्कि उसने रूस के टॉप सरकारी अधिकारियों और यहां तक कि राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पहुंचने के लिए तगड़ी सेटिंग कर रखी थी.
पुतिन से मिलने की थी भारी इच्छा: 1000 से ज्यादा बार आया नाम
अमेरिकी न्याय विभाग द्वारा जारी 35 लाख पन्नों के पत्राचार में रूसी राष्ट्रपति पुतिन का नाम 1,005 बार आया है. फाइल्स बताती हैं कि एपस्टीन पुतिन से मिलने के लिए बहुत बेताब था. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे यह साबित हो सके कि उनकी कभी आमने-सामने मुलाकात हुई थी. एपस्टीन ने पुतिन से मिलने के लिए नॉर्वे के पूर्व पीएम थोरबजर्न जगलैंड और इजरायल के पूर्व पीएम एहुद बराक जैसे बड़े नामों का इस्तेमाल किया था.
रूसी अधिकारियों के साथ ‘लेन-देन’ का खेल
द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 2014 में एपस्टीन ने रूस के तत्कालीन उप आर्थिक विकास मंत्री सर्गेई एल. बेल्याकोव से दोस्ती की. बेल्याकोव रूसी जासूसी एजेंसी (KGB की उत्तराधिकारी FSB) की एकेडमी से पढ़े हुए थे. एपस्टीन ने बेल्याकोव से एक मामले में मदद मांगी थी, जहां एक रूसी महिला अरबपति फाइनेंसर लियोन ब्लैक को ब्लैकमेल कर रही थी. इसके बदले में एपस्टीन ने बेल्याकोव को सिलिकॉन वैली के बड़े दिग्गजों (जैसे पीटर थिएल) से मिलवाया.
रूस को ‘लड़कियों’ का एक्सपोर्ट हब मानता था एपस्टीन
इन दस्तावेजों में एक बहुत ही डार्क साइड भी सामने आई है. एपस्टीन रूस को अपनी घिनौनी गतिविधियों के लिए लड़कियों का ‘सोर्स’ मानता था. स्लोवाकिया के पूर्व विदेश मंत्री मिरोस्लाव लाजकैक के साथ हुई एक चैट में एपस्टीन ने रूसी लड़कियों को वहां का बेस्ट एक्सपोर्ट बताया था. उसने यहां तक कहा कि सऊदी के पास तेल है, तो मॉस्को के पास लड़कियां. इस खुलासे के बाद लाजकैक को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा.
इंटेलिजेंस और जासूसी का शक: पोलैंड ने शुरू की जांच
पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने इन फाइल्स के आधार पर जांच के आदेश दिए हैं. उनका कहना है कि इस बात की पूरी संभावना है कि एपस्टीन का यह पूरा नेटवर्क रूसी इंटेलिजेंस सेवाओं की मदद से चल रहा था. हालांकि, क्रेमलिन (रूस) के प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने इन दावों को मजाक बताते हुए खारिज कर दिया है.
एपस्टीन की रूसी ‘करीबी’ दोस्त
फाइल्स में कई ऐसी महिलाओं के नाम हैं जिन्हें एपस्टीन ने आर्थिक मदद दी:
करीना शुलियाक: बेलारूस की इस महिला की पढ़ाई (डेंटल स्कूल) का खर्च एपस्टीन ने उठाया. जेल में जान देने से पहले एपस्टीन ने आखिरी कॉल इसी को किया था.
मारिया प्रुसाकोवा: ये एक रूसी स्नोबोर्डिंग चैंपियन हैं. एपस्टीन ने इनकी लॉ स्कूल की पढ़ाई और पेरिस-कैलिफोर्निया में रहने का खर्चा उठाया. मारिया ने एपस्टीन के लिए अन्य महिलाओं को लाने का काम भी किया.
मारिया द्रोकोवा: ये पुतिन समर्थक यूथ ग्रुप ‘नाशी’ की प्रवक्ता रह चुकी हैं. उन्होंने एपस्टीन की इमेज सुधारने के लिए मीडिया मीटिंग्स फिक्स की थीं.
ट्रंप को समझने के लिए रूस को दिया ‘ऑफर’
2016 में जब डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बने, तब एपस्टीन ने रूसी अधिकारियों को ऑफर दिया कि वो उन्हें ट्रंप की कार्यशैली समझने में मदद कर सकता है. उसने सुझाव दिया कि रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव को उससे बात करनी चाहिए ताकि वो ट्रंप के बारे में इनसाइट्स दे सके.
रूस का पलटवार
रूस की विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता मारिया जखारोवा ने इन फाइल्स का इस्तेमाल पश्चिमी देशों को नीचा दिखाने के लिए किया और इसे ‘पश्चिमी सभ्यता की नैतिक गिरावट’ बताया. लेकिन रूसी विपक्ष के नेताओं का कहना है कि रूस खुद भी ऐसे घरेलू एपस्टीन से भरा पड़ा है और वहां की सरकार का नैतिकता की बात करना ढोंग है.
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By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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