क्या था जेफ्री एपस्टीन का 'बेबी रेंच' प्लान? खुद के DNA से बनाना चाहता था सुपर इंसान!

Updated at : 09 Feb 2026 11:57 AM (IST)
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Jeffrey Epstein Baby Ranch Plan

जेफ्री एपस्टीन

Jeffrey Epstein Baby Ranch Plan: अरबपति जेफ्री एपस्टीन की काली दुनिया के पीछे की सच्चाई क्या है? क्या वह सच में न्यू मैक्सिको में अपने बेबी रेंच में एक सीक्रेट कॉलोनी बनाना चाहता था? स्टीफन हॉकिंग जैसी मशहूर हस्तियों के साथ उसकी दोस्ती और अपने खुद के DNA का इस्तेमाल करके सुपरह्यूमन बनाने का उसका जुनून. उसकी खतरनाक योजना के बारे में जानें और क्या एपस्टीन के वारिस सच में दुनिया में कहीं छिपे हुए हैं.

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Jeffrey Epstein Baby Ranch Plan: यौन शोषण और मानव तस्करी के आरोपों में जेल में जान देने वाले अमेरिकी फाइनेंसर जेफ्री एपस्टीन को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. न्यूयॉर्क टाइम्स की एक विस्तृत जांच के अनुसार, एपस्टीन केवल एक अपराधी ही नहीं था, बल्कि वह अपनी दौलत और रसूख के दम पर अपनी खुद की एक ‘सुपर रेस’ (इंसानों की एक खास नस्ल) तैयार करना चाहता था. इसके लिए उसने न्यू मैक्सिको में अपने आलीशान ‘जोरो रेंच’ को एक ‘बेबी रेंच’ में बदलने का खतरनाक प्लान बनाया था.

क्या था ‘बेबी रेंच’ का पूरा खेल?

साल 2001 से 2006 के बीच एपस्टीन ने कई वैज्ञानिकों और बिजनेस टायकून्स से अपनी इस इच्छा का जिक्र किया था. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट बताती है कि एपस्टीन चाहता था कि उसके 33,000 स्क्वायर फीट के फार्महाउस पर एक साथ कम से कम 20 महिलाएं उसके बच्चों को जन्म दें. उसका प्लान था कि वह अपने स्पर्म (वीर्य) से इन महिलाओं को प्रेग्नेंट करेगा ताकि दुनिया में सिर्फ उसी के डीएनए वाले ‘बेहतर’ इंसान पैदा हों. हालांकि, इस बात का कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला है कि उसने इस प्लान को सच में अंजाम दिया था या नहीं.

बड़े वैज्ञानिकों को पैसों के दम पर जाल में फंसाया

एपस्टीन ने खुद को महान दिखाने के लिए दुनिया के चोटी के वैज्ञानिकों से दोस्ती की थी. इनमें नोबेल विजेता मरे गेल-मैन, मशहूर भौतिक विज्ञानी स्टीफन हॉकिंग, स्टीफन जे गोल्ड और जॉर्ज चर्च जैसे नाम शामिल थे. न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, एपस्टीन ने हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के एक प्रोग्राम के लिए 6.5 मिलियन डॉलर (करीब 54 करोड़ रुपये) का दान दिया था. वह इन वैज्ञानिकों को महंगी वाइन और खानों पर बुलाता था ताकि उनके बीच बैठकर खुद को ‘बुद्धिजीवी’ साबित कर सके. स्टीफन हॉकिंग तो एक बार एपस्टीन की प्राइवेट पनडुब्बी (सबमरीन) की सवारी भी कर चुके थे.

गरीबों के लिए नफरत और अजीबोगरीब सोच

हार्वर्ड के साइकोलॉजिस्ट स्टीवन पिंकर ने बताया कि एपस्टीन की सोच बहुत ही अजीब थी. एक बार बातचीत के दौरान एपस्टीन ने कहा कि गरीब देशों में भुखमरी कम करना और स्वास्थ्य सुविधाएं देना गलत है, क्योंकि इससे ‘ओवरपॉपुलेशन’ यानी जनसंख्या बढ़ती है. जब पिंकर ने इसका विरोध किया, तो एपस्टीन इतना चिढ़ गया कि पिंकर को अगली मुलाकातों से बाहर कर दिया गया. पिंकर ने बाद में एपस्टीन को एक ‘ढोंगी’ करार दिया.

मौत के बाद भी बॉडी को फ्रीज करने का था इरादा

एपस्टीन ‘ट्रांसह्यूमनलिज्म’ नाम की एक थ्योरी में यकीन रखता था, जिसमें टेक्नीक के जरिए इंसानी ताकत बढ़ाने की बात की जाती है. वह अपनी मौत के बाद भी खुद को सुरक्षित रखना चाहता था. उसके एक साथी के मुताबिक, एपस्टीन ‘क्रायोनिक्स’ (मौत के बाद शरीर को फ्रीज करना) की मदद से अपना सिर और प्राइवेट पार्ट सुरक्षित रखना चाहता था ताकि भविष्य में उसे फिर से जीवित किया जा सके.

क्या एपस्टीन के सच में बच्चे थे?

अमेरिकी न्याय विभाग (DOJ) की हालिया फाइलों में कुछ चौंकाने वाली बातें सामने आई हैं. एक महिला ने अपनी डायरी में लिखा था कि 2002 में (जब वह सिर्फ 16-17 साल की थी) उसने एक बच्ची को जन्म दिया था, जिसे एपस्टीन की पार्टनर घिसलेन मैक्सवेल ने जन्म के तुरंत बाद छीन लिया था. हालांकि, इसकी अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

दिलचस्प बात यह है कि एपस्टीन की वसीयत में किसी बच्चे का नाम नहीं है. उसने अपनी करोड़ों की संपत्ति अपनी आखिरी गर्लफ्रेंड करीना शुलियाक के नाम करने की योजना बनाई थी. वहीं, एक पुराने वीडियो में उसके न्यूयॉर्क वाले घर की टेबल पर ‘DNA पैटरनिटी टेस्ट’ की किट भी देखी गई थी, जिससे शक और गहरा जाता है.

यौन शोषण के आरोप और जेल में मौत

जुलाई 2019 में एपस्टीन को नाबालिग लड़कियों की तस्करी और साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. उसने खुद को बेगुनाह बताया था, लेकिन ट्रायल शुरू होने से पहले ही 10 अगस्त 2019 को न्यूयॉर्क की जेल में उसकी लाश मिली. मेडिकल रिपोर्ट में इसे सुसाइड बताया गया, लेकिन आज भी लोग उसकी मौत को लेकर कई सवाल उठाते हैं.

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Govind Jee

लेखक के बारे में

By Govind Jee

गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.

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