ट्रंप की 'समुद्री घेराबंदी' से डरा ईरान? महाशक्तिशाली 'आर्माडा' देख बदले तेहरान के सुर; बोले- बातचीत की तैयारी जारी

ट्रंप के 'महाबेड़े' से घबराया ईरान, बातचीत को तैयार.
ईरान-अमेरिका के बीच छिड़ी 'कोल्ड वॉर' अब निर्णायक मोड़ पर है. एक तरफ ट्रंप का विशाल समुद्री बेड़ा ईरान की दहलीज पर है, तो दूसरी तरफ तेहरान ने बातचीत के संकेत दिए हैं. क्या आर्थिक तंगी और घरेलू दंगों से जूझता ईरान युद्ध टालने के लिए झुकेगा?
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस वक्त एकदम पीक पर है. एक तरफ जहां समंदर में अमेरिकी युद्धपोतों का बड़ा काफिला (Armada) ईरान की ओर बढ़ रहा है, वहीं दूसरी ओर ईरान ने बातचीत के संकेत देकर सबको चौंका दिया है. आसान भाषा में कहें तो माहौल काफी गरम है, लेकिन पर्दे के पीछे ‘डील’ की खिचड़ी भी पक रही है.
ईरान का बड़ा बयान- बातों का सिलसिला जारी है
ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव अली लारीजानी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के जरिए दुनिया को अपडेट दिया है. लारीजानी के अनुसार, मीडिया में जो लड़ाई-झगड़े की खबरें चल रही हैं, उनसे अलग पर्दे के पीछे बातचीत के लिए जरूरी इंतजाम (Structural Arrangements) किए जा रहे हैं. उन्होंने साफ कहा कि मीडिया की बातों पर न जाएं, काम आगे बढ़ रहा है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि यह बातचीत किस बारे में और कैसे होगी.
ट्रम्प की ‘वॉर्निंग’- समंदर में उतर चुका है बड़ा बेड़ा
दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने सख्त अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उन्होंने 28 जनवरी को ‘ट्रुथ सोशल’ पर पोस्ट करते हुए बताया कि USS अब्राहम लिंकन नाम के एयरक्राफ्ट कैरियर की लीडरशिप में एक बहुत बड़ी ‘आर्माडा’ (जंगी जहाजों का ग्रुप) ईरान की तरफ बढ़ रही है.
ट्रम्प ने इसे वेनेजुएला भेजे गए बेड़े से भी बड़ा बताया है. उन्होंने सीधे शब्दों में चेतावनी दी कि अगर ईरान ने बातचीत की मेज पर आकर ‘फेयर डील’ नहीं की, तो अंजाम बहुत बुरा हो सकता है. ट्रंप का सीधा सा फंडा है कि ईरान को परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) छोड़ने होंगे.
डेडलाइन का सस्पेंस और ईरान की अपनी शर्तें
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि ईरान खुद डील करना चाहता है ताकि मिलिट्री एक्शन से बच सके. उन्होंने यह भी खुलासा किया कि ईरान को बातचीत शुरू करने के लिए एक डेडलाइन (समय सीमा) दी गई है, लेकिन वह तारीख क्या है, यह अभी सीक्रेट रखा गया है.
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने इस पर ईरान का पक्ष रखते हुए कहा:
- ईरान बातचीत के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए ‘बराबर का सम्मान’ (Mutual Respect) जरूरी है.
- दबाव में आकर कोई बात नहीं होगी.
- सबसे जरूरी बात यह कि ईरान अपनी मिसाइल और डिफेंस पावर को लेकर कोई समझौता नहीं करेगा. यानी डिफेंस के मामले में कोई ‘नो नेगोशिएशन’ वाली स्थिति है.
क्यों सुलग रहा है ईरान?
दिसंबर 2025 के आखिरी हफ्ते से ईरान के अंदर हालात काफी खराब हैं. इसकी बड़ी वजहें ये हैं:
- इकनॉमिक क्राइसिस: वहां की करेंसी ‘रियाल’ की वैल्यू गिर गई है और महंगाई आसमान छू रही है.
- जनता का गुस्सा: लोग सड़कों पर हैं. शुरुआत तो महंगाई को लेकर हुई थी, लेकिन अब लोग सरकार की नीतियों के खिलाफ भी नारे लगा रहे हैं.
- इंटरनेट पर पाबंदी: ईरानी सरकार ने कई इलाकों में इंटरनेट बंद कर दिया है और प्रदर्शनकारियों पर सख्ती बरती जा रही है. ह्यूमन राइट्स संगठनों के अनुसार, कई लोगों की जान गई है और गिरफ्तारियां हुई हैं.
मौतों का आंकड़ों नें भारी अंतर
प्रदर्शनों में कितनी जानें गईं, इसे लेकर दो अलग-अलग दावे सामने आए हैं:
- ईरान सरकार के अनुसार: अब तक 3,117 लोगों की मौत हुई है, जिनमें सुरक्षा बल भी शामिल हैं.
- NGO ‘ईरान मानवाधिकार’ के अनुसार: रॉयटर्स और एएफपी की रिपोर्ट के मुताबिक, मरने वालों की असली संख्या 25,000 के करीब हो सकती है.
विदेशी साजिश या घरेलू गुस्सा?
ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेजेशक्यान का मानना है कि ये प्रदर्शन घरेलू नहीं, बल्कि अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों की एक सोची-समझी साजिश है. उनका कहना है कि विदेशी ताकतें ईरान को अस्थिर करना चाहती हैं.
वहीं, राष्ट्रपति ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों का खुलकर सपोर्ट किया है. उन्होंने सोशल मीडिया पर उनके वीडियो शेयर किए और ईरानी सरकार को चेतावनी दी कि अगर लोगों पर जुल्म हुआ, तो अमेरिका चुप नहीं बैठेगा. ट्रंप ने तो यहां तक कह दिया कि ईरान को अब नई लीडरशिप की जरूरत है.
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लेखक के बारे में
By Govind Jee
गोविन्द जी ने पत्रकारिता की पढ़ाई माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय भोपाल से की है. वे वर्तमान में प्रभात खबर में कंटेंट राइटर (डिजिटल) के पद पर कार्यरत हैं. वे पिछले आठ महीनों से इस संस्थान से जुड़े हुए हैं. गोविंद जी को साहित्य पढ़ने और लिखने में भी रुचि है.
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