फिर एक्टिव हुए ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल अड्डे! रिपोर्ट का दावा- 69 में से 50 सुरंगें खुलीं, जारी कीं सैटेलाइट तस्वीरें
Published by : Anant Narayan Shukla Updated At : 01 Jun 2026 7:18 AM
ईरान ने सीजफायर के दौरान इन सभी सुरंगों को खोला. फोटो- एक्स (@@Beefeater_Fella).
Iran Underground Missile Bases: सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों में क्षतिग्रस्त हुई अपनी अधिकांश भूमिगत मिसाइल सुविधाओं के प्रवेश मार्ग दोबारा खोल दिए हैं. रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान अब भी बड़ी मिसाइल क्षमता बनाए हुए है.
Iran Underground Missile Bases: अमेरिका और इजरायल की ओर से कई सप्ताह तक किए गए हमलों के बावजूद ईरान की मिसाइल ताकत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है. अमेरिका और ईरान के बीच अब तक युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई औपचारिक समझौता नहीं हुआ है. 28 फरवरी से शुरू हुआ यह संघर्ष अब चौथे महीने में पहुंच चुका है. शनिवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें किसी समझौते को लेकर जल्दबाजी नहीं है. इसी बीच हालिया सैटेलाइट तस्वीरों के विश्लेषण में दावा किया गया है कि ईरानन ने अपने अधिकांश अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों तक पहुंच बहाल कर ली है और युद्ध के दौरान क्षतिग्रस्त हुए कई एंट्री पॉइंट्स फिर से खोल दिए हैं.
संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने ईरान की लंबी दूरी की मिसाइल क्षमता को खत्म या सीमित करने के टारगेट से कई अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों को निशाना बनाया था. हमलों में सुरंगों के एंट्री पॉइंट, वहां तक पहुंचने के रास्ते और मिसाइल लॉन्च से जुड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर मेन टारगेट रहे. लगातार बमबारी के कारण कई सुरंगों के मुहाने मलबे से भर गए थे, जबकि उन्हें जोड़ने वाली सड़कों पर बड़े-बड़े गड्ढे बन गए थे. इसके बाद युद्धविराम लागू होने के बाद ईरान ने मरम्मत और सफाई अभियान शुरू किया.
अंडरग्राउंड मिसाइल भंडार अब भी सुरक्षित होने की आशंका
सीएनएन की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, 18 अंडरग्राउंड मिसाइल स्थलों पर किए गए हमलों में 69 सुरंग एंट्री पॉइंट्स प्रभावित हुए थे. इनमें से 50 को ईरान ने साफ कर दोबारा खोल दिया है. सैटेलाइट तस्वीरों में बुलडोजर, लोडर और डंप ट्रक जैसे भारी निर्माण उपकरण मलबा हटाते और रास्ते बहाल करते दिखाई दिए हैं. विश्लेषकों का मानना है कि सुरंगों के एंट्री पॉइंट्स को नुकसान पहुंचाना अपेक्षाकृत आसान होता है, लेकिन पहाड़ों और चट्टानों की कई परतों के नीचे छिपाए गए मिसाइल भंडार को नष्ट करना कहीं अधिक कठिन है.
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की बड़ी संख्या में मिसाइलें जमीन के काफी नीचे सुरक्षित रखी गई थीं, इसलिए माना जा रहा है कि हमलों के बावजूद उनका बड़ा हिस्सा बच गया. विशेषज्ञों का अनुमान है कि ईरान के पास अब भी करीब 1,000 मिसाइलें अंडरग्राउंड सुविधाओं में मौजूद हो सकती हैं. इनमें से कई ठिकाने पिछले दो दशकों में खास तौर पर इस तरह तैयार किए गए थे कि वे हवाई हमलों का सामना कर सकें.
सैटेलाइट तस्वीरों में दिखा तेज मरम्मत अभियान
युद्धविराम के बाद ली गई नई सैटेलाइट तस्वीरों में कई मिसाइल अड्डों पर बड़े पैमाने पर मरम्मत कार्य दिखाई दिया है. निर्माण दल मलबा हटाने, बमबारी से बने गड्ढों को भरने और क्षतिग्रस्त सड़कों को फिर से तैयार करने में जुटे नजर आए. इस्फहान के पास स्थित एक मिसाइल स्थल पर संघर्ष के दौरान कई बार हमले किए गए थे. बाद की तस्वीरों में वहां डंप ट्रकों और अन्य भारी मशीनों को क्षति की मरम्मत करते और बंद रास्तों को दोबारा खोलते देखा गया.
इसी तरह खोमेन के पास स्थित एक अन्य फैसेलिटी में कम से कम 10 निर्माण वाहन एक साथ काम करते दिखाई दिए. उनका लक्ष्य बंद हो चुके एक सुरंग के एंट्री पॉइंट्स को फिर से चालू करना था. विश्लेषकों का मानना है कि मरम्मत की यह रफ्तार दिखाती है कि साधारण निर्माण उपकरणों की मदद से कई बार अत्याधुनिक सैन्य हमलों के प्रभाव को अपेक्षाकृत कम समय में काफी हद तक सुधारा जा सकता है.
विशेषज्ञ ने क्या कहा?
जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर का कहना है कि जब तक ईरान के पास लॉन्चर और उन्हें संचालित करने वाले दल मौजूद हैं, तब तक वह मिसाइल दागने की क्षमता बनाए रख सकता है. उनके मुताबिक, ईरान के पास मौजूद मिसाइलों के भंडार को लॉन्चरों से जोड़ने में कोई बड़ी बाधा नहीं है, इसलिए उसकी मिसाइल क्षमता पूरी तरह समाप्त नहीं मानी जा सकती.
ये भी पढ़ें:- अमेरिका पर बरसे गालिबफ, कहा- अधिकारों से समझौता नहीं, नाकाम होंगे US के मंसूबे
ये भी पढ़ें:- म्यांमार में खनन विस्फोटकों के गोदाम में धमाका, 45 लोगों की मौत, दर्जनों घायल
ट्रंप ने मिसाइल कार्यक्रम को बनाया था बड़ा लक्ष्य
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के दौरान कई बार सार्वजनिक रूप से कहा था कि ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना इस अभियान का प्रमुख उद्देश्य है. पिछले साल जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के तीन परमाणु ठिकानों पर हमला किया था. वहीं इस साल मार्च में में भी अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर हमला किया. ट्रंप ने इन हमलों का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और लॉन्च सिस्टम को नुकसान पहुंचाना घोषित किया था.
मिसाइल फैसेलिटीज भी रहे निशाने पर
संघर्ष के दौरान अमेरिका और इजरायल ने केवल मिसाइल अड्डों को ही नहीं, बल्कि ईरान के मिसाइल उत्पादन नेटवर्क को भी निशाना बनाया था. हमलों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों, रॉकेट प्रोपेलेंट और मिसाइल निर्माण से जुड़ी सुविधाएं शामिल थीं. 8 अप्रैल को युद्धविराम लागू होने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा था कि ईरान के लिए नष्ट किए गए लॉन्चरों को बदलना और अपने रक्षा उद्योग का पुनर्निर्माण करना आसान नहीं होगा. हालांकि, विभिन्न खुफिया आकलनों से संकेत मिले हैं कि ईरान पहले ही अपनी सैन्य संरचना के कुछ हिस्सों को बहाल करने की दिशा में काम शुरू कर चुका है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Anant Narayan Shukla
इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










