चीन की तानाशाही पर लगेगा ब्रेक, एशिया में तैनात होगी अमेरिकी सेना, LAC पर तनाव के बीच बड़ी खबर

Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 26 Jun 2020 7:45 AM

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India china border tension, us-china: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन की तनातनी के बीच अमेरिका से बड़ी खबर सामने आयी है. चीन की एशिया में बढ़ती तानाशाही के खिलाफ अमेरिका ने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनात करने का फैसला किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने ये ऐलान किया है. अमेरिका यह कदम ऐसे समय उठा रहा है कि जब चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं

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India china border tension, us-china: पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर भारत-चीन की तनातनी के बीच अमेरिका से बड़ी खबर सामने आयी है. चीन की एशिया में बढ़ती तानाशाही के खिलाफ अमेरिका ने यूरोप से अपनी सेना हटाकर एशिया में तैनात करने का फैसला किया है. अमेरिकी विदेश मंत्री ने ये ऐलान किया है. अमेरिका यह कदम ऐसे समय उठा रहा है कि जब चीन ने भारत में पूर्वी लद्दाख में एलएसी के पास युद्ध जैसे हालात पैदा कर दिए हैं , तो दूसरी ओर वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलिपींस और साउथ चाइना सी में खतरा बना हुआ है.

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने कहा है कि भारत और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के लिए खतरा उत्पन्न कर रहे चीन के कारण उनका देश यूरोप से अपनी सेनाएं कम करके अन्य जगहों पर तैनात कर रहा है. पोंपियो ने ब्रसेल्स फोरम में जर्मन मार्शल फंड के अपने एक वर्चुअल संबोधन के दौरान एक सवाल के जवाब में यह बात कही.

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अमेरिकी विदेश मंत्री की यह टिप्पणी भारत और चीन के बीच जारी तनाव के संदर्भ में बेहद अहम है. गौरतलब है कि एक ओर चीन ने भारत में एलएसी के पास तनावपूर्ण स्थिति को हवा दे रखा है, तो दूसरी ओर साउथ चाइना सी में भी आक्रामक रवैया अपना रहा है. कोरोना वायरस को लेकर भी दुनिया के सामने कड़े तेवर अपना रहा है. 15 जून को पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय जवानों के शहीद होने के बाद क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर है.

कहां-कहां तैनात होगी अमेरिकी सेना

अमेरिका जर्मनी से इसकी शुरुआत करेगा. पोंपियो ने कहा कि चीन का ‘विस्तार’ हमारे लिए इस वक्त का सबसे बड़ा चैलेंज है. बता दें कि हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप से सैनिकों की तैनाती कम करने की घोषणा की थी. अब पोंपियो के बयान के बाद मानाजा रहा है कि जर्मनी में तैनात 52 हजार अमेरिकी सैनिकों में से 9,500 सैनिकों को एशिया में तैनात करेगा. पोम्पिओ ने कहा कि सैनिकों की तैनाती जमीनी स्थिति की वास्तविकता के आधार पर की जाएगी. साथ ही कहा कि हम सुनिश्चित करेंगे कि हमारी तैनाती ऐसी हो कि चीनी आर्मी(पीएलए) का मुकाबला किया जा सके.

उन्होंने कहा, कुछ जगहों पर अमेरिकी संसाधन कम रहेंगे. कुछ अन्य जगह भी होंगेअमेरिकी विदेश मंत्री ने जर्मनी से सैन्‍य तैनाती घटाने के फैसले को जायज ठहराया और इसी दौरान उन्‍होंने कहा कि भारत तथा पूरे दक्षिण पूर्व एशिया क्षेत्र को चीन से खतरा पैदा हो गया है. यहां तक कि चीन यूरोप के हितों को भी नुकसान पहुंचा रहा है. चीन के खिलाफ अमेरिका और यूरोपीय देशों की एकजुटता का आह्वान करते हुए पॉम्पिओ ने यह भी कहा कि वह इस मुद्दे पर यूरोपीय संघ से आगे भी बातचीत करेंगे.

एशियाई देशों को भी चीन से खतरा

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि भारत के साथ-साथ वियतनाम, इंडोनेशिया, मलेशिया, फ‍िलीपींस और दक्षिण चीन सागर में भी चीन से खतरा पैदा हो गया है। अमेरिका मौजूदा दौर की इन चुनौतियों से निपटने का प्रयास कर रहा है। इस दौरान उन्‍होंने दक्षिण चीन सागर में चीन के बढ़ते दखल और भारत के साथ वास्‍तविक नियंत्रण रेखा पर हिंसक झड़प का भी जिक्र किया और कहा कि इन सबके खिलाफ एकजुट होकर कदम उठाने की जरूरत है। उन्‍होंने कहा कि बीते दो साल में ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी सैन्‍य तैनाती की रणनीतिक तरीके से समीक्षा की है। अमेरिका ने खतरों को देखा है और समझा है कि साइबर, इंटेलिजेंस और मिलिट्री जैसे संसाधनों को कैसे अलग किया जाए।

Posted By: Utpal kant

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