Dog Head Hat China: दुनिया में बच्चों को लेकर मां-बाप क्या-क्या नहीं करते. कहीं ताबीज, कहीं धागा, कहीं नजर उतारने के टोटके. लेकिन चीन में बच्चों की सुरक्षा के लिए एक ऐसी परंपरा रही है, जिसे सुनकर पहले हंसी आए, फिर सोचने पर दिल भर जाए. यहां बच्चों को कुत्ते के सिर जैसी टोपी पहनाई जाती थी और कई बार उनके नाम तक कुत्ता, सूअर या कीड़ा रख दिए जाते थे. सुनने में अजीब है, लेकिन मान्यता के अनुसार यही तरीका बच्चे को लंबी उम्र देने का था.
क्या होती है ‘डॉग-हेड हैट’ और कब से चली आ रही है परंपरा
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, चीन में बच्चों को पहनाई जाने वाली इस टोपी को डॉग-हेड हैट कहा जाता है. इसका मतलब है कुत्ते के सिर जैसी टोपी. इतिहास के अनुसार, यह टोपी छिंग राजवंश (1644-1912) के समय से चली आ रही है. टोपी के दोनों ओर कान जैसे हिस्से होते हैं, जो बिल्कुल कुत्ते के कानों की तरह दिखते हैं. ये टोपियां आमतौर पर रंग-बिरंगे रेशम या ऊनी कपड़े से बनती हैं और कई बार इनमें सोने के धागे, जेड पत्थर और सजावटी कढ़ाई भी की जाती है. आज भी दक्षिणी चीन में सर्दियों के मौसम में छोटे बच्चों को यह टोपी पहनाई जाती है. खासतौर पर यह टोपी तूजिया (Tujia) समुदाय की पारंपरिक पोशाक का हिस्सा मानी जाती है. (Dog Head Hat China Children Strange Naming Tradition Belief in Hindi)
कुत्ते से जुड़ी लोककथा, जहां से शुरू हुई यह सोच
लोककथाओं के अनुसार, एक बार ली (Li) उपनाम वाले परिवार ने एक नवजात बच्चे को छोड़ दिया था. कहा जाता है कि उस बच्चे की जान एक कुत्ते ने बचाई और उसकी रखवाली की. बाद में जब बच्चे को नया परिवार मिला, तो उन्होंने उस कुत्ते के प्रति आभार जताने के लिए कुत्ते के सिर जैसी टोपी बनवाई. मान्यता है कि यहीं से कुत्ते को रक्षक और जीवन बचाने वाले जानवर के रूप में देखा जाने लगा और यह टोपी बच्चों की सुरक्षा का प्रतीक बन गई.
Dog Head Hat China in Hindi: बच्चे को सादा रखो, जिंदगी सुरक्षित रहेगी
चीन की लोक संस्कृति में एक कहावत है कि कुत्ते का सिर और कुत्ते जैसी समझ हो, तो बच्चा आसानी से बड़ा होता है. इसका मतलब बच्चे को कमतर समझना नहीं, बल्कि यह मान्यता है कि जितना सादा जीवन, उतनी कम मुसीबत. इसे कहा जाता है कि महान बच्चे को सादगी में पालना. डॉग-हेड हैट इसी सोच का प्रतीक है बच्चा दिखावे से दूर रहे और बुरी नजर से बचा रहे.
बच्चों को कुत्ता, सूअर या कीड़ा जैसे नाम क्यों दिए जाते थे
साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट के अनुसार, टोपी के साथ-साथ एक और परंपरा थी, जो आज के समय में और भी अजीब लगती है. चीन के ग्रामीण इलाकों में माता-पिता अपने बच्चों के नाम जानबूझकर भद्दे या सस्ते रखते थे. जैसे कि कुत्ता, सूअर, कीड़ा, डॉग-एग, पिग-हेड और सबसे आम नाम डॉग लेफ्टओवर. लोक विश्वास था कि अगर बच्चे का नाम बहुत सुंदर या भारी होगा, तो बुरी शक्तियां उसकी तरफ आकर्षित होंगी. लेकिन अगर नाम बेकार होगा, तो बुरी आत्माएं उसे नजरअंदाज कर देंगी और बच्चा सुरक्षित रहेगा. चीन में जन्म के समय बच्चे की बाजी, यानी आठ अक्षरों की जन्म कुंडली देखी जाती थी. अगर यह कुंडली अशुभ मानी जाती, तो माता-पिता बच्चे को जानबूझकर सस्ता या अजीब नाम दे देते थे. मान्यता थी कि ऐसा करने से बुरी किस्मत धोखा खा जाएगी और बच्चा लंबी उम्र जिएगा.
जानवरों के नाम ही क्यों चुने गए
ग्रामीण चीन में यह माना जाता था कि कुत्ते और सूअर बहुत मजबूत होते हैं. वे कठिन हालात में भी जिंदा रहते हैं और जल्दी नहीं मरते. इसलिए बच्चों के नाम इन्हीं जानवरों पर रखे जाते थे, ताकि बच्चे में भी वही जीने की ताकत आ जाए. खासतौर पर कुत्ते को इसलिए चुना गया क्योंकि वह बहुत सहनशील होता है. एक साथ कई बच्चों को जन्म देता है और समृद्धि व बढ़ोतरी का प्रतीक माना जाता है
जब बच्चों के नाम बन गए औजार और बर्तन
कुछ इलाकों में यह परंपरा और आगे बढ़ गई. माता-पिता ने बच्चों के नाम घरेलू सामान और खेती के औजारों पर रख दिए. जैसे कि हल, झाड़ू, तवा, कढ़ाही, दरांती, चम्मच का हैंडल. सुनने में अजीब जरूर है, लेकिन सोच वही थी कि नाम चाहे जैसा हो, बच्चा जिंदा रहे. आज के दौर में यह सब अंधविश्वास लग सकता है, लेकिन अपने समय में यह मां-बाप की मजबूरी और ममता थी. जब बीमारी आम थी, इलाज मुश्किल था और बच्चों की मौत ज्यादा होती थी, तब नाम और टोपी ही माता-पिता का सुरक्षा कवच थे. आज भी चीन के कुछ हिस्सों में यह परंपरा किसी न किसी रूप में मौजूद है. यह बताती है कि कभी-कभी सबसे अजीब परंपराओं के पीछे सबसे सच्चा प्यार छिपा होता है.
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