रूस के हैकर्स कोविड-19 की वैक्सीन का ‘नुस्खा’ चुरा रहे हैं, ब्रिटेन, अमेरिका और कनाडा के आरोप पर क्रेमलिन ने क्या कहा ?
Author : Prabhat Khabar Digital Desk Published by : Prabhat Khabar Updated At : 17 Jul 2020 8:41 AM
coronavirus, Covid-19 vaccine: कोरोना महामारी दुनियाभर में काबू में नहीं आ रही है. दुनिया में एक करोड़ 36 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि मरने वालों की संख्या छह लाख के करीब है. पूरी दुनिया कोविड-19 वैक्सीन का इंतजार कर रही है, वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और रूस के बीच एक अलग ही खेल शुरू हो गया है.
coronavirus, Covid-19 vaccine: कोरोना महामारी दुनियाभर में काबू में नहीं आ रही है. दुनिया में एक करोड़ 36 लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हैं, जबकि मरने वालों की संख्या छह लाख के करीब है. पूरी दुनिया कोविड-19 वैक्सीन का इंतजार कर रही है, वहीं अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और रूस के बीच एक अलग ही खेल शुरू हो गया है. ब्रिटेन के नेशनल साइबर सिक्योरिटी सेंटर (एनसीएससी) ने कहा है कि रूस के हैकर्स उन संगठनों को निशाना बना रहे हैं, जो कोरोना वायरस की वैक्सीन विकसित करने की कोशिश कर रहे हैं.
एनसीएससी का दावा है कि हैकर्स अपना काम निश्चित रूप से रूसी खुफिया सेवा के हिस्से के रूप में कर रहे हैं. सेंटर का कहना है कि हैकर्स ग्रुप ने मैलवेयर का इस्तेमाल करके कोविड-19की वैक्सीन से जुड़ी जानकारियां चुराने की कोशिश की. एनसीएससी के निदेशक पॉल चिचेस्टर ने इसे घिनौना कार्य कहा है. रायटर्स के मुताबिक, अमेरिका और कनाडा ने भी रूस पर आरोप लगाए हैं. तीनों देशों का दावा है कि सरकार द्वारा समर्थित रूसी हैकर्स कोरोना वैक्सीन के शोध में जुटे मेडिकल संगठनों और यूनिवर्सिटीज पर साइबर हमले कर रिसर्च चुराने की कोशिश कर रहे हैं.
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तीनों देशों ने संयुक्त बयान में कहा है कि एपीटी 29 (कोजी बियर) नाम के हैकिंग ग्रुप ने उनके शोध से जुड़ी जानकारी चुराने का अभियान छेड़ रखा है. हालांकि, रूस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है. क्रेमलिन के प्रवक्ता दमित्रि पेस्को ने कहा है कि अगर ऐसा कुछ है तो सबूत दिखाएं. उन्होंने कहा कि वेबजह का आरोप नहीं लगाना चाहिए. ब्रिटेन के साइबर सिक्योरिटी शोधकर्ताओं के मुताबिक, एपीटी 29 हैकिंग टूल का इस्तेमाल पिछले साल अमेरिका, जापान, चीन और अफ्रीका के क्लाइंट्स के खिलाफ भी किया गया था.
ब्रिटेन के विदेश मंत्री डॉमिनिक राब ने कहा है कोरोना महामारी से लड़ रहे संस्थानों पर रूस की खुफिया एजेंसियों का हमला दुर्भाग्यपूर्ण है और इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा. गौरतलब है कि ब्रिटेन और अमेरिका ने मई में कहा था कि हैकर्स के नेटवर्क ने कोरोना से निपटने के प्रयासों में जुटे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को निशाना बनाया है, लेकिन रूस के शामिल होने की बात नहीं कही गई थी. अब अमेरिका, ब्रिटेन के साथ ही कनाडा का भी कहना है कि रूस हैकरों के जरिये वैक्सीन प्रोग्राम की अहम् जानकारी चुरा रहा है.
वहीं एक अलग मामले में ब्रिटेन ने रूसी एक्टर्स पर लीक हुए दस्तावेजों को ऑनलाइन वायरल करने का आरोप लगाया है. ब्रिटेन का कहना है कि रूसी एक्टर्स ने 2019 के चुनाव में हस्तक्षेप के प्रयासों के तहत लीक दस्तावेजों को ऑनलाइन फैलाने की साजिश रची थी. ब्रिटेन अगले हफ्ते ब्रिटिश राजनीति में रूसी प्रभाव को दर्शाती के विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित कर सकता है.
कोरोना की वैक्सिन बनी है नहीं इसे लेकर अब तक साफ नहीं कहा जा सकता. दुनिया के कई देश वैक्सिन बनाने और उसके ट्रायल का दावा कर रहे हैं. इन सब के बीच वैक्सिन चोरी करने के आरोप भी लगने लगे है. इससे पहले अमेरिका, जर्मनी समेत कई देशों ने आरोप लगाया था कि चीन उनके यहां कोरोना वैक्सीन पर हो रहे रिसर्च को चुराने की कोशिश में लगा है. हैकिंग के जरिए डेटा चुराने की कोशिशें हो चुकी हैं. यहां तक की ये माना जा रहा है कि दुनिया में जहां कहीं भी कोरोना को लेकर महत्वपूर्ण जानकारियां रखी जा रही हैं और शोध हो रही है, वो पिछले दिनों में हैकिंग के संदिग्ध प्रयास हुए हैं. आरोप ये भी है कि ये काम चीनी सरकार से जुड़े हैकर्स कर रहे हैं.
Posted By: Utpal kant
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