ताइवान विवाद : अमेरिका को धमकाने के बाद अब यूरोपीय देशों को आंखें दिखा रहा चीन, राजनयिकों को किया तलब
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 05 Aug 2022 2:04 PM
चीन ने अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में स्वशासी द्वीप में नौसैन्य जहाज और युद्धक विमान भेजे हैं तथा वहां मिसाइलें दागी हैं.
बीजिंग/नई दिल्ली : अमेरिकी संसद की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद से अमेरिका को लगातार धमकी देने के बाद चीन अब यूरोपीय देशों को आंखें दिखाना शुरू कर दिया है. खबर है कि सात देशों के समूह जी-7 और यूरोपीय संघ (ईयू) की ओर से ताइवान के आसपास सैन्य अभ्यासों की आलोचना करने के विरोध में चीन ने यूरोपीय राजनयिकों को समन जारी कर तलब किया है. चीन के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि उप-मंत्री देंग ली ने चीन के आतंरिक मामलों में अवांछित हस्तक्षेप को लेकर गंभीर विरोध पत्र जारी किया है.
चीन ने अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा के विरोध में स्वशासी द्वीप में नौसैन्य जहाज और युद्धक विमान भेजे हैं तथा वहां मिसाइलें दागी हैं. ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि शुक्रवार सुबह चीन ने ताइवान जलडमरूमध्य में सैन्य जहाज और युद्धक विमान भेजे. यह दशकों से चीन और ताइवान के बीच अनधिकृत ‘बफर जोन’ रहा है.
चीन के विदेश उप-मंत्री देंग ली ने कहा कि चीन हर तरह से और किसी भी कीमत पर देश को विभाजित होने से रोकेगा. उन्होंने कहा कि नैंसी पेलोसी की ताइवान यात्रा घोर राजनीतिक जोड़तोड़ और चीन की संप्रभुत्ता तथा क्षेत्रीय अखंडता का गंभीर उल्लंघन है. अमेरिका-ताइवान की मिलीभगत और उकसावे के जवाब में चीन की प्रतिक्रिया स्वाभाविक है.
चीन के विदेश मंत्रालय ने बताया कि गुरुवार रात को बैठक हुई, लेकिन उसने यह नहीं बताया कि इसमें किन देशों ने भाग लिया. इससे पहले चीन ने गुरुवार को जी-7 देशों के बयान के विरोध में जापान के साथ विदेश मंत्रियों की एक बैठक रद्द कर दी थी. जी-7 ने बयान में कहा था कि चीन के सैन्य अभ्यासों का कोई औचित्य नहीं है. चीन ने इससे पहले पेलोसी की यात्रा पर विरोध दर्ज कराने के लिए अमेरिका के राजदूत निकोलस बर्न्स को सम्मन भेजा था.
अमेरिका ने ताइवान के आसपास चीन के उकसावे वाले सैन्य अभ्यास की निंदा की और इसे गैर-जिम्मेदाराना कृत्य बताया, जो ताइवान जलडमरूमध्य और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के उसके दीर्घकालिक लक्ष्य के विपरीत है. चीनी सेना ने अमेरिकी संसद की प्रतिनिधि सभा की अध्यक्ष नैंसी पेलोसी की ताइपे की ऐतिहासिक यात्रा के जवाब में गुरुवार को चार दिवसीय युद्धाभ्यास शुरू किया और ताइवान जलडमरूमध्य में मिसाइलें दागीं. पेलोसी ने चीन के कड़े विरोध के बावजूद ताइवान की यात्रा की थी.
सामरिक संचार के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के समन्वयक जॉन किर्बी ने गुरुवार को कहा कि चीन ने रातभर ताइवान की ओर लगभग 11 बैलिस्टिक मिसाइलें दागी, जो द्वीप के उत्तरपूर्व, पूर्व और दक्षिणपूर्व क्षेत्र में गिरीं. उन्होंने कहा कि हम इन कार्रवाई की निंदा करते हैं, जो गैर जिम्मेदाराना हैं और ताइवान जलडमरूमध्य तथा क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के हमारे दीर्घकालिक लक्ष्य के विपरीत हैं.
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जॉन किर्बी ने आगे कहा कि चीन ने जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दी है और नैंसी पेलोसी की यात्रा की आड़ में ताइवान जलडमरूमध्य तथा उसके आसपास इलाके में उकसावे वाली सैन्य गतिविधि बढ़ा दी है. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने अनुमान जताया था कि चीन इस तरह के कदम उठा सकता है. उन्होंने कहा, ‘हमें यह भी उम्मीद है कि ये कदम जारी रहेंगे और चीन आने वाले कुछ दिनों तक प्रतिक्रिया देता रहेगा. बीजिंग के इन कृत्यों के लिए अमेरिका तैयार है। हम कोई संकट नहीं चाहते हैं.’
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