चीन का खुला ऐलान: न मानेंगे और न लागू करेंगे अमेरिका के ये प्रतिबंध, ईरान के साथ हमारा ट्रेड लीगल

Published by :Anant Narayan Shukla
Published at :03 May 2026 10:17 AM (IST)
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China dismisses US sanctions on its companies over Iran crude oil links.

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग.

China Dismisses US Sanctions: चीन ने अमेरिका द्वारा 5 चीनी कंपनियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को खारिज कर दिया है. यूएस ने इन पर ईरानी तेल खरीदने का आरोप लगाकर प्रतिबंध सूची में डाला था. चीन ने इस कार्रवाई को एकतरफा बताया और वैश्विक व्यावसायिक गतिविधि के खिलाफ बताया.

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China Dismisses US Sanctions: ईरान और अमेरिका 28 फरवरी 2026 से युद्ध जैसे हालात में है. फिलहाल, 18 अप्रैल से दोनों पक्ष सीजफायर पर राजी हुए हैं. हालांकि, वाशिंगटन तेहरान को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचाने में कोई मुरौव्वत नहीं बरत रहा है. होर्मुज की नाकेबंदी की वजह से ईरान के साथ-साथ वह अन्य देशों के जहाजों पर भी सैंक्शन लगा रहा है.  अमेरिका ने इसी के तहत, चीन की पांच कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया, जिन पर ईरान से सस्ता तेल खरीदने का आरोप है.  वैश्विक ऊर्जा (तेल और गैस) संकट के बीच चीन ने भी पलटवार किया है.

चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को एक बयान जारी कर कहा कि ईरानी तेल खरीदने के आरोप में जिन पांच कंपनियों पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं, इन्हें न तो मान्यता दी जाएगी, न लागू किया जाएगा और न ही उनका पालन किया जाएगा. चीन ने अपनी कई कंपनियों को निशाना बनाकर लगाए गए अमेरिकी प्रतिबंधों को सख्ती से खारिज कर दिया है और साफ कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत मान्य नहीं हैं और चीनी संस्थाओं को इन्हें लागू नहीं करना चाहिए.

चीन ने इन उपायों को गैर-कानूनी और वाशिंगटन के ‘लॉन्ग-आर्म ज्यूरिस्डिक्शन’ (अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई करने) का एक उदाहरण बताया है. मंत्रालय का कहना है कि ये प्रतिबंध चीनी कंपनियों को अन्य देशों के साथ वैध व्यापार करने से गलत तरीके से रोकते हैं. यह अंतरराष्ट्रीय कानून और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांतों का उल्लंघन करते हैं. मंत्रालय ने कहा कि चीनी सरकार ने हमेशा संयुक्त राष्ट्र की मंजूरी के बिना और अंतरराष्ट्रीय कानून के आधार के बिना लगाए गए एकतरफा प्रतिबंधों का विरोध किया है.

किन कंपनियों पर लगा प्रितबंध

अमेरिका ने चीन के जिन 5 कंपनियों पर प्रतिबंध लागू किए हैं, उनमें शानदोंग प्रांत की 3 कंपनी (शानदोंग जिनचेंग पेट्रोकेमिकल ग्रुप, शानदोंग शौगुआंग लुकिंग पेट्रोकेमिकल और शानदोंग शेंगशिंग केमिकल) और देश के अन्य हिस्सों में स्थित दो कंपनियां (हेंगली पेट्रोकेमिकल (दालियान) रिफाइनरी और हेबेई शिनहाई केमिकल ग्रुप) हैं. शुक्रवार को अमेरिका ने एक और चीनी कंपनी (किंगदाओ हाईये ऑयल टर्मिनल कंपनी लिमिटेड) पर भी प्रतिबंध लगा दिया. इस पर आरोप है कि उसने पिछले साल फरवरी से ईरान से करोड़ों बैरल कच्चा तेल आयात किया, जिससे ईरान को अरबों डॉलर की आय हुई. 

चीन है ईरान का सबसे बड़ा तेल ग्राहक

इन प्रतिबंधों से चीन भड़क उठा है. दरअसल, चीन वेनेजुएला और ईरानी तेल का एक प्रमुख खरीदार है. जनवरी में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को सत्ता से बेदखल करने के बाद अमेरिका ने एक तरह से वेनेजुएला के तेल पर अपना नियंत्रण कर लिया. इसके बाद उसने ईरान को निशाना बनाया. चीन मुख्य रूप से छोटे स्वतंत्र रिफाइनरियों के जरिए खरीद करता है, जिन्हें आम तौर पर टीपॉट रिफाइनरी कहा जाता है. यह तेहरान से मिलने वाले रियायती तेल पर निर्भर रहते हैं. अमेरिका ने इसीलिए चीन की कंपनियों को निशाना बनाया है. 

चीन ने ईरान के साथ ट्रेड को बताया लीगल

अमेरिका ने ईरान की तेल आय को कम करने के प्रयास तेज कर दिए हैं और अपने प्रतिबंधों का दायरा बढ़ाते हुए चीन की इन रिफाइनरियों को भी शामिल कर लिया है. हालांकि, चीन ने इस कदम को हद से ज्यादा दखल बताते हुए खारिज कर दिया है. चीनी अधिकारियों ने जोर देकर कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में वैध वाणिज्यिक सहयोग का राजनीतिकरण नहीं किया जाना चाहिए. उन्होंने वाशिंगटन से आग्रह किया कि वह इन उपायों को वापस ले और उस चीज में दखल देना बंद करे. बीजिंग ने इसे संप्रभु राष्ट्रों के बीच एक लीगल ट्रेड गतिविधि बताया है.

अमेरिका ने समय-समय पर लगाए हैं सैंक्शन

यूएस ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास बंधक संकट के बाद नवंबर 1979 में पहला प्रतिबंध लगाया था. इसके बाद से परमाणु कार्यक्रम और आतंकवाद के समर्थन के आरोपों में तीन बार (1995, 2011, 2018) अन्य सख्त आर्थिक और व्यापारिक प्रतिबंध लगाए. अमेरिका के इन सैंक्शन का सिलसिला अब भी जारी है. 2026 में अमेरिका ने एक बार फिर से ईरान के ऊपर प्रतिबंध का बोझ डाला है. हालांकि, इस बार दोनों देश सीधे युद्ध में है और अमेरिका ईरान को कोई रियायत नहीं देना चाह रहा है. 

ऑयल ट्रेड को लेकर संघर्ष में चीन और अमेरिका

28 फरवरी से वाशिंगटन और तेहरान के बीच युद्ध चल रहा है. इसकी वजह से दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गतिरोध बना हुआ है. ये ताजा प्रतिबंध ऐसे समय आए हैं, जब इस टकराव का कोई स्थायी समाधान फिलहाल नजर नहीं आ रहा है. इसी के मद्देनजर, दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं चीन और अमेरिका ऑयल सप्लाई को लेकर संघर्ष में हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस महीने के अंत में चीन की यात्रा पर जाने वाले हैं, जहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. विश्लेषक इस तनातनी को दोनों देशों के बीच अपनी ताकत दिखाने के उपाय के रूप में भी देख रहे हैं.

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फिलहाल, यह ताजा गतिरोध वैश्विक तेल बाजारों पर भी असर डाल सकता है, क्योंकि प्रतिबंधों से प्रभावित रिफाइनरियां अनिश्चितता के माहौल में अपनी आपूर्ति श्रृंखलाओं और भुगतान प्रणालियों में बदलाव कर सकती हैं.  इसकी वजह से अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करना मुश्किल हो सकता है. 

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Anant Narayan Shukla

लेखक के बारे में

By Anant Narayan Shukla

इलाहाबाद विश्वविद्यालय से पोस्ट ग्रेजुएट. करियर की शुरुआत प्रभात खबर के लिए खेल पत्रकारिता से की और एक साल तक कवर किया. इतिहास, राजनीति और विज्ञान में गहरी रुचि ने इंटरनेशनल घटनाक्रम में दिलचस्पी जगाई. अब हर पल बदलते ग्लोबल जियोपोलिटिक्स की खबरों के लिए प्रभात खबर के लिए अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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