बिल गेट्स के कार्यालय में महिला उम्मीदवारों से पूछे गये यौन संबंध से जुड़े सवाल, वाॅल जर्नल का सनसनीखेज खुलासा
जर्नल के अनुसार कुछ महिला उम्मीदवारों ने दावा किया कि उनसे इंटरव्यू के दौरान काफी आपत्तिजनक और अनुचित प्रश्न पूछे गये,जिसमें उनके पिछले यौन संबंधों और उनके अनुभवों के बारे में सवाल पूछा गया.
माइक्रोसॉफ्ट के संस्थापक बिल गेट्स के निजी कार्यालय में महिला उम्मीदवारों से यौन संबंध से जुड़े ( sexually explicit)सवाल पूछे गये हैं. द वाॅल स्ट्रीट जर्नल ने यह सनसनीखेज खुलासा किया है. वाॅल स्ट्रीट जर्नल के अनुसार गेट्स वेंचर्स में इंटरव्यू के दौरान महिला उम्मीदवारों से यौन संबंध से जुड़े सवाल पूछे जाने के प्रमाण मिले हैं.
जर्नल के अनुसार कुछ महिला उम्मीदवारों ने दावा किया कि उनसे इंटरव्यू के दौरान काफी आपत्तिजनक और अनुचित प्रश्न पूछे गये,जिसमें उनके पिछले यौन संबंधों और उनके अनुभवों के बारे में सवाल पूछा गया. इतना ही नहीं उनसे फोन पर अंतरंग तस्वीरें रखने, पोर्नोग्राफी और यौन संचारित रोगों के बारे में भी पूछा गया. इतना ही नहीं कुछ महिला उम्मीदवारों का आरोप है कि उनसे विवाहेत्तर संबंध रखने और विदेशी डांस में शामिल होने से सवाल भी पूछे गये.
ज्ञात हो कि उम्मीदवारों का इंटरव्यू एक थर्ड पार्टी कंपनी कॉन्सेंट्रिक एडवाइजर्स ने किया था. इस कंपनी के बारे में कहा जाता है कि वो अपने काम में माहिर है. कॉन्सेंट्रिक एडवाइजर्स कंपनी ने महिलाओं के आरोपों को गलत बताया है और कहा कि उनकी स्क्रीनिंग प्रक्रिया का उद्देश्य उम्मीदवार की सत्यता और ब्लैकमेल के प्रति संवेदनशीलता का आकलन करना है. कंपनी ने दावा किया कि साक्षात्कार के डेटा को सार्वजनिक नहीं किया जाता है.
वहीं इस संबंध में गेट्स वेंचर्स की ओर से अभी तक कुछ भी नहीं कहा गया है. उनका कहना है कि उनकी नियुक्ति प्रक्रिया किसी भी तरह के अनुचित व्यवहार को बर्दाश्त नहीं करती है और वे हर उम्मीदवार का सम्मान करते हैं. लेकिन वाॅल स्ट्रीट जर्नल की इस रिपोर्ट के बाद बिल गेट्स के साथ एक और विवाद जुड़ गया है. ज्ञात हो कि 2019 में बिल गेट्स पर यह आरोप लगा था कि उनका एक कर्मचारी के साथ यौन संबंध है, जिसके बाद उन्हें माइक्रोसाॅफ्ट के बोर्ड से इस्तीफा देना पड़ा था. हालांकि इस विवाद का अंत सुखद था, लेकिन इसमें कोई दो राय नहीं कि बिल गेट्स के साथ एक विवाद जुड़ा था.
गेट्स वेंचर्स माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक और बिल गेट्स की निजी सेवा कंपनी है . इसकी स्थापना 2008 में हुई थी. इसमें उनका निजी स्टाफ है, जो स्वास्थ्य और वैश्विक विकास की समस्याओं के निदान पर काम करता है. जिनमें जलवायु परिवर्तन ,सच्छ ऊर्जा और अल्जाइमर रोग शामिल हैं .
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By Rajneesh Anand
रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत है.पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों का अनुभव रखती हैं. झारखंड की राजधानी रांची में रहने वाली रजनीश ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक की शिक्षा प्राप्त की और वर्ष 2000-01 में पत्रकारिता की शुरुआत की. इन्होंने पहली नौकरी झारखंड जागरण दैनिक अखबार में की. उसके बाद इन्होंने प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस तथा दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य संस्करणों में काम करने के बाद वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं. रजनीश आनंद की पहचान तथ्यपरक रिपोर्टिंग, गहन शोध और विश्लेषणात्मक लेखन के लिए है. उनकी रुचि राजनीति, सामाजिक सरोकारों, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों में रही है। उन्होंने हमेशा उन मुद्दों को प्राथमिकता दी है जो समाज के हाशिये पर खड़े लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की चर्चा में अपेक्षाकृत कम स्थान पाते हैं. वे कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर विस्तृत अध्ययन और रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान उन्होंने महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर कार्य किया. इसके अतिरिक्त सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत उन्होंने बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की. आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है. हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में भविष्य की चुनौतियों, रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण प्रश्न उठाए हैं. उनका मानना है कि ऊर्जा परिवर्तन की प्रक्रिया तभी सफल होगी जब उसमें प्रभावित समुदायों की भागीदारी और हितों को केंद्र में रखा जाए.पत्रकारिता उनके लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है. जमीनी रिपोर्टिंग, तथ्यों की पड़ताल और जनसरोकारों को केंद्र में रखकर लिखना उनकी कार्यशैली की विशेषता रही है. इसके अतिरिक्त रजनीश आनंद कहानियां और कविताएं लिखने का शौक भी रखती है.
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