मधेसियों की मांगाें के लिए नेपाल करेगा संविधान में संशोधन
Updated at : 21 Dec 2015 4:52 PM (IST)
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काठमांडो : एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में नेपाल सरकार ने अनुपातिक प्रतिनिधित्व एवं निर्वाचनक्षेत्र परिसीमन से संबंधित मधेसियों की दो अहम मांगों का समाधान करने के लिए नये संविधान में संशोधन करने का फैसला किया है जिसका भारत द्वारा स्वागत किये जाने की संभावना है. मंत्रिमंडल की कल रात यहां सिंहदरबार में हुई आपात बैठक में […]
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काठमांडो : एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में नेपाल सरकार ने अनुपातिक प्रतिनिधित्व एवं निर्वाचनक्षेत्र परिसीमन से संबंधित मधेसियों की दो अहम मांगों का समाधान करने के लिए नये संविधान में संशोधन करने का फैसला किया है जिसका भारत द्वारा स्वागत किये जाने की संभावना है.
मंत्रिमंडल की कल रात यहां सिंहदरबार में हुई आपात बैठक में इस आशय का फैसला किया गया. बैठक में एक राजनीतिक प्रणाली पर भी सहमति बनी जो अपने गठन के तीन माह के भीतर प्रस्तावित प्रांतीय सीमाओं को लेकर विवाद के समाधान के लिए सुझाव देगा.
मधेसियों के आंदोलनरत राजनीतिक दल नये संविधान में प्रस्तावित सात प्रांतीय मॉडल का चार महीने से विरोध करते आ रहे हैं क्योंकि इससे उनके पुरखों के होमलैंड का इसतरह विभाजन होगा कि वे अपने ही क्षेत्र में राजनीतिक रूपसे हाशिये पर पहुंच जाएंगे. उन्होंने भारत के साथ लगती सीमा व्यापार मार्गों को बंद कर रखा है जिससे देश में जरूरी वस्तुओं और दवाइयों की भारी किल्लत पैदा हो गयी है.
अगस्त से जारी भारतीय मूल के मधेसियों के आंदोलन में कम से कम 50 लोगों की जान जा चुकी है. नेपाल की जनंसख्या में मधेसी 52 फीसदी हैं. बैठक में नये संविधान में संशोधन से संबंधित उस विधेयक के साथ आगे बढने का निर्णय किया गया जो संसद में पहले ही पेश किया जा चुका है.
नेपाल के इस नये प्रस्ताव को वहां के दो बड़े मधेशी नेताओं ने खारिज कर दिया है. तराई मधेश सद्भावना पार्टीकेअध्यक्षमहेंद्रराय यादव व सह अध्यक्ष लक्ष्मण लाल कर्ण ने कहा है कि ये प्रस्ताव मौजूदा संकट का समाधान नहीं कर सकते हैं.
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