बीजिंग को विदा कर मोदी पहुंचे शंघाई, कल करेंगे भारतीय समुदाय को संबोधित

Published at :15 May 2015 2:45 PM (IST)
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बीजिंग को विदा कर मोदी पहुंचे शंघाई, कल करेंगे भारतीय समुदाय को संबोधित

शंघाई : शियान और बीजिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी तीन दिन की चीन यात्रा के तीसरे चरण में आज शंघाई पहुंच गए. मोदी कल शियान पहुंचे थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर स्तर की बातचीत की. उसके बाद वह बीजिंग रवाना हो गए, जहां आज चीन के प्रधानमंत्री ली केक्यांग […]

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शंघाई : शियान और बीजिंग के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी तीन दिन की चीन यात्रा के तीसरे चरण में आज शंघाई पहुंच गए. मोदी कल शियान पहुंचे थे, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर स्तर की बातचीत की.
उसके बाद वह बीजिंग रवाना हो गए, जहां आज चीन के प्रधानमंत्री ली केक्यांग के साथ व्यापक मुद्दों पर विचार विमर्श किया. मोदी कल चीन की शीर्ष कंपनियों के सीईओ से मिलेंगे और इस दौरान 10 अरब अमेरिकी डालर के समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है. मोदी अपनी तीन देशों की यात्रा के दूसरे चरण के लिए मंगोलिया रवाना होने से पहले यहां भारतीय समुदाय को भी संबोधित करेंगे. शंघाई हवाई अड्डे पर मोदी का भव्य स्वागत देखने को मिला. हवाई जहाज की सीढियों के दोनों तरफ सैकड़ों की तादाद में छोटे बच्चों ने दोनों तरफ से नरेंद्र मोदी को हाथ हिलाकर और भारत-चीन के झंडे लहराकर स्वागत किया.
इसके पहले आज बीजिंग मेंभारत और चीन ने आज सीमा मुद्दे का राजनीतिक समाधान निकालने की प्रतिबद्धता व्यक्त की और आगे बढकर इसे जल्द से जल्द हल करने का संकल्प जताया. इस बीच, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि हाल के दशकों में जटिल हुए ये विवाद हमारे संबंधों के विकास को बाधित नहीं करें. मोदी ने चीन से उन कुछ मामलों में अपने रुख पर पुनर्विचार करने को कहा जो द्विपक्षीय संबंधों की पूर्ण क्षमता प्राप्त करने में बाधक हैं. इनमें अरुणाचल प्रदेश के लोगों को नत्थी वीजा देने का विषय भी शामिल है.
उन्होंने कहा, अपनी सरकार के पहले वर्ष में चीन यात्रा से मैं प्रसन्न हूं. यह हमारी महत्वपूर्ण सामरिक भागीदारियों में से एक है. कारण स्पष्ट है. भारत और चीन का पुर्नोदय और दोनों के संबंध दोनों देशों एवं नि:संदेह इस शताब्दी पर व्यापक प्रभाव डालेंगे. प्रधानमंत्री ने हालांकि साथ ही कहा, हाल के दशकों में हमारे संबंध पेचीदा रहे हैं. लेकिन हम पर यह ऐतिहासिक जिम्मेदारी है कि हम अपने संबंधों को एक दूसरे की ताकत के स्रोत और दुनिया की भलाई की शक्ति के रुप में बदल दें. उन्होंने स्पष्ट किया कि पीछे हटने का कोई सवाल ही नहीं है और जोर दिया कि ठहराव कोई विकल्प नहीं है. संबंधों में आगे बढना ही एक मात्र रास्ता है जो पिछले कुछ दशकों से पेचीदा रहे हैं. इसके साथ ही उन्होंने चीन को सुझाव दिया कि वह दोनों देशों के संबंधों को सामरिक और दीर्घकालिक परिपेक्ष्य में देखे.
प्रधानमंत्री ने बीजिंग में चीनी प्रधानमंत्री ली क्विंग से व्यापक विषयों पर बातचीत की और वीजा मुद्दे पर ठोस प्रगति चाही. अरुणाचल प्रदेश के लोगों को चीन द्वारा नत्थी वीजा देने से यह विषय जुडा है. दोनों नेताओं ने अपने सैन्यकर्मियों के बीच सीमा बैठकों की संख्या बढाने का निर्णय किया और सीमा पर शांति एवं स्थिरता बनाये रखने की जरुरत को रेखांकित किया जो विकास एवं संबंधों को आगे बढाने के लिए महत्वपूर्ण गारंटी देने वाला है. मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देशों को एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील होने की जरुरत है.
उन्होंने आपसी विश्वास और भरोसे को मजबूत बनाने की जरुरत पर बल दिया और सभी लंबित मुद्दों का समाधान निकालने को कहा. दोनों पक्षों ने 24 समझौतों पर हस्ताक्षर किये जिनमें रेलवे, खनन, अंतरिक्ष, भूकंप विज्ञान, इंजीनियरिंग, पर्यटन, सिस्टर सिटी और चीन में चेंगदू तथा भारत में चेन्नई में महा-वाणिज्यदूतावास स्थापित करने के विषय शामिल हैं.
बैठक के बाद संयुक्त बयान में कहा गया है, दोनों पक्षों ने इसकी पुष्टि की कि सीमा से जुडे सवाल के जल्द समाधान से दोनों देशों के बुनियादी हित सधेंगे और दोनों सरकारों को इसे सामरिक उद्देश्य के रुप में आगे बढाना चाहिए. बयान में कहा गया है, सम्पूर्ण द्विपक्षीय संबंधों और दोनों देशों के लोगों के दीर्घकालिक हितों को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्ष सीमा के सवाल का एक राजनीतिक समाधान सक्रियता से निकालने के लिए प्रतिबद्ध हैं.
संयुक्त बयान के अनुसार, दोनों पक्ष सीमा के सवाल समेत लंबित मतभेदों का समाधान सक्रियता से निकालेंगे. इन मतभेदों को द्विपक्षीय संबंधों का विकास जारी रखने के मार्ग में बाधक नहीं बनने दिया जायेगा. प्रधानमंत्री ने चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से बातचीत के दौरान पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में चीन की ओर से 46 अरब डालर निवेश करने के प्रस्ताव पर चिंता जताये जाने के अगले दिन चीनी प्रधानमंत्री से आज बातचीत के दौरान यह सुझाव दिया कि चीन को चाहिए कि वह दोनों देशों के संबंधों को सामरिक और दीर्घकालिक नजरिये से देखे.
चीन के प्रधानमंत्री ली के साथ ग्रेट हाल आफ पीपुल में वार्ता के बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए संयुक्त बयान में मोदी ने कहा, हमारी बातचीत बेबाक, रचनात्मक और दोस्ताना रही. हमने सभी मुद्दों पर बात की जिनमें वे विषय भी शामिल हैं जो हमारे संबंधों को ठीक ढंग से आगे बढाने में समस्या हैं.
पडोसी देश को प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि वह आपसी संबंधों को लेकर सामरिक और दीर्घकालिक दृष्टिकोण अपनाये. उन्होंने कहा, मैंने पाया कि चीनी नेतृत्व का रुख अनुकूल है. वहीं, चीन के प्रधानमंत्री ली ने स्वीकार किया कि सीमा मुद्दे को लेकर दोनों पक्षों के बीच मतभेद हैं और दोनों देशों को शांति और स्थिरता बनाये रखने की आवश्यकता है.
ली ने कहा, हम इस बात से इंकार नहीं करते कि हमारे बीच कुछ मतभेद हैं. लेकिन उन्हें सुलझाने के लिए एक व्यवस्था और पर्याप्त राजनीतिक परिपक्वता मौजूद है. चीनी प्रधानमंत्री ने कहा, हम चीन-भारत संबंधों को नई उंचाइयों पर ले जाने के लिए भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं. उन्होंने कहा कि दोनों देशों को चाहिए कि वे एशिया और उसके बाहर और बडी भूमिका निभाने के अवसर को हासिल करें. उन्होंने कहा कि बहु-ध्रुवीय विश्व बनाने के लिए भारत और चीन दो महत्वपूर्ण देश हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने सीमा से जुडे मुद्दे पर कहा कि हमने उचित, व्यावहारिक और आपसी सहमति से स्वीकार्य समाधान तलाशने पर सहमति व्यक्त की. हम दोनों ने सीमा क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाये रखने के लिए हर तरह के प्रयास करने के प्रति अपनी मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की.
उन्होंने कहा, मैंने यह भी दोहराया है कि इस संबंध में वास्तविक नियंत्रण रेखा के प्रति स्पष्टता महत्वपूर्ण है. मोदी ने कहा कि हम इस बात पर सहमत हुए कि हम आगे बढें, एक दूसरे के हितों के प्रति संवेदनशील हों, आपसी विश्वास को मजबूत करें, अपने मतभेदों से परिपक्वता के साथ निपटें और लंबित मुद्दों का समाधान खोजें. संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने विशेष प्रतिनिधियों के तंत्र के जरिये हुई महत्वपूर्ण प्रगति का सकारात्मक मूल्यांकन किया.
आर्थिक मोर्चे पर प्रधानमंत्री मोदी ने बढते व्यापार असंतुलन से संबंधित विशिष्ट चिंताओं को उठाया जो अभी चीन के पक्ष में हैं. उन्होंने कहा कि इसके प्रति राष्ट्रपति शी और प्रधानमंत्री ली का रुख काफी सकारात्मक रहा. चीन के साथ भारत का 38 अरब डालर का व्यापार घाटा है जो भारत के लिए चिंता का विषय है.
उन्होंने बताया, हम इस बात पर भी सहमत हुए कि आर्थिक संबंधों को और व्यापक बनाने का सामरिक खाका विकसित करने के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यबल बनाया जाए. इसमें आधारभूत संरचना, आईटी, फार्मा, कृषि और विनिर्माण क्षेत्र शामिल हैं. वहीं, चीनी प्रधानमंत्री ने कहा, चीन, भारत के साथ सहयोग बढाने और व्यापार संतुलन बनाने के कदम उठाने के लिए तैयार है.
संयुक्त बयान में कहा गया है, दोनों पक्षों ने द्विपक्षीय व्यापार से जुडे विषयों के समाधान निकालने की प्रतिबद्धता व्यक्त की ताकि व्यवहार्यता बनाई जा सके. बयान के अनुसार, इन कदमों में फार्मास्यूटिकल्स क्षेत्र में निरीक्षण सहयोग का विषय शामिल है जिसमें पंजीकरण, कृषि उत्पादों के लिए दो तरफा व्यापार, भारतीय आईटी कंपनियों एवं चीनी उद्यमों के बीच मजबूत सहयोग, पर्यटन, फिल्म, स्वास्थ्य सेवा, आईटी एवं लाजिस्टिक के क्षेत्र में सेवा कारोबार बढाना शामिल है. इसमें कहा गया है कि दोनों पक्ष इस बारे में भारत-चीन संयुक्त आर्थिक समूह का पूरा उपयोग करेंगे.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों नेताओं ने बातचीत को तेज करने का स्वागत किया जो आपसी सहयोग और परस्पर आदान प्रदान की भावना के अनुरुप है. एशिया प्रशांत कारोबार समझौते के ढांचे के तहत संबंधित भारतीय उत्पादों के संबंध में शुल्क कम करने का मुद्दा भी सामने आया.
दोनों पक्षों ने विश्व व्यापार संगठन से जुडे विषयों पर चर्चा के लिए विशेष तंत्र स्थापित करने का भी निर्णय किया क्योंकि दोनों के समान रुख हैं. मोदी और ली ने आतंकवाद के मुद्दे पर साझी चिंता व्यक्त की और करीबी सहयोग करने की जरुरत पर सहमति जतायी.
मोदी ने कहा, आतंकवाद हमारे समक्ष साझा खतरा है. पश्चिम एशिया में अस्थिरता हम दोनों के समक्ष अहम विषय है. अफगानिस्तान में शांति एवं विकास से हम दोनों को लाभ होगा. दोनों देशों ने आतंकवाद की निंदा करने और सभी स्वरुपों में विरोध करने का संकल्प व्यक्त किया और आतंकवाद विरोधी प्रयास में सहयोग करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि आतंकवाद को उचित नहीं ठहराया जा सकता और सभी देशों एवं निकायों से आतंकवादी नेटवर्क एवं उनके वित्त पोषकों को ध्वस्त करने एवं सीमा पार आतंकी गतिविधियों को रोकने के लिए गंभीरता से मिलकर काम करने का आग्रह किया.
इन्होंने अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर समग्र संधि पर बातचीत को जल्द से जल्द पूरा करने की जरुरत बतायी. भारत और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में व्यापक सुधार का समर्थन किया जिसमें संयुक्त राष्ट्र मामलों में विकासशील देशों की भागीदारी बढाने की जरुरत महसूस की ताकि संयुक्त राष्ट्र को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.
संयुक्त बयान में कहा गया है कि चीन अंतरराष्ट्रीय मामलों में भारत के उस बडे महत्व को समझता है जो बडे विकासशील देश की है और सुरक्षा परिषद समेत संयुक्त राष्ट्र में उसकी वृहद भूमिका निभाने की इच्छा का समर्थन करता है.
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