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नेपाल में भूकंप के बाद बचाव कार्य की जद्दोजहद, किशोर के जिंदा निकलने से लोगों की उम्मीदें जगी

Updated at : 30 Apr 2015 7:03 PM (IST)
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नेपाल में भूकंप के बाद बचाव कार्य की जद्दोजहद, किशोर के जिंदा निकलने से लोगों की उम्मीदें जगी

काठमांडू: शनिवार को आये विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल में आज भी हल्के भूकंप के झटके महसूस किये गये. हालांकि इसकी तीव्रता कम थी और इससे फिर किसी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. शनिवार के भूकंप से अब तक 6000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और अभी भी मलबों से […]

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काठमांडू: शनिवार को आये विनाशकारी भूकंप के बाद नेपाल में आज भी हल्के भूकंप के झटके महसूस किये गये. हालांकि इसकी तीव्रता कम थी और इससे फिर किसी जान-माल के नुकसान की कोई खबर नहीं है. शनिवार के भूकंप से अब तक 6000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और अभी भी मलबों से शव निकालने का काम जारी है.

रिक्टर स्केल पर 3 . 9 और 4 . 7 की तीव्रता वाले तीन झटकों से लोगों में आज भी घबराहट दिखी और अपने गांवों को जाने के लिए वे बेसब्री से बसों का इंतजार करते देखे गए.बचावकर्मी अब भी सुदूर पहाडी इलाकों में पहुंचने के लिए संघर्ष कर रहे हैं जहां भारी बारिश और भूस्खलन के कारण बचाव कार्य बाधित हो रहा है. भूकंप में करीब छह हजार लोग मारे जा चुके हैं और कम से कम 11 हजार लोग घायल हुए हैं.

इस बीच आज भूकंप से तबाह नेपाल में उस वक्त खुशी का एक विरल मौका आया जब शक्तिशाली झटकों के आने के पांच दिन बाद 15 वर्षीय एक किशोर को जिंदा निकाला गया. भूकंप से व्यापक क्षति हुई है और खराब मौसम एवं इसके बाद आए झटकों से दूरवर्ती इलाकों में राहत प्रयास बाधित हुए हैं.

शनिवार को आये 7 . 9 तीव्रता वाले भूकंप के बाद राजधानी में सात मंजिली इमारत के मलबे से बचावकर्मियों ने जब एक लडके को बाहर निकाला तो बडी संख्या में भीड ने उसका स्वागत किया. इसके साथ ही पिछले 80 वर्षों के इस सबसे विध्वंसक भूकंप के बाद मलबे के ढेर से जीवित लोगों के निकालने की उम्मीद एक बार फिर जग गयी.

नुवाकोट के रहने वाले पेम्बा लामा को पांच घंटे के बचाव अभियान के बाद जब बाहर निकाला गया तो वह धूल से सना हुआ था. उसे अस्पताल ले जाया गया. इससे पहले चार महीने के एक बच्चे को भक्तपुर शहर में मलबे के ढेर से जीवित बाहर निकाला गया था.

अधिकारियों ने कहा है कि देश में सहायता हासिल करने और उसे सुदूरवर्ती क्षेत्रों में जरुरतमंद लोगों तक पहुंचाने में उन्हें कठिनाई आ रही हैं.देश के लोगों में क्रोध और निराशा बढती जा रही है और लोगों को पुलिस से भिडते एवं भोजन-पानी की आपूर्ति के लिए लडते देखा जा रहा है.

चूंकि राहत और बचाव अभियान अब तक काठमांडो घाटी तक सीमित है इसलिए दूसरे प्रभावित जिलों में बचाव अभियान के लिए प्रशिक्षित लोगों की सख्त जरुरत है. मीडिया ने खबर दी है कि ब्रिटेन की एक टीम को छोडकर सभी विदेशी बचाव दलों को काठमांडो घाटी में तैनात किया गया है.

एक स्थानीय स्वास्थ्य कर्मी ने कहा कि निर्देश एवं सूचना मिलने में सरकार की तरफ से देरी होने से दूरवर्ती जिलों में राहत प्रयास में बाधा आ रही है.नेपाल के सूचना और संचार मंत्री मिनेन्द्र रिजाल ने कहा कि राहत अभियान जारी है लेकिन बहुत कुछ किए जाने की जरुरत है.

उन्होंने कहा, ‘‘जनजीवन सामान्य हो रहा है लेकिन पूरी तरह सामान्य होने में कुछ वक्त लगेगा. हम राहत प्रबंधन को अभी तक उचित तरीके से नहीं कर पाए हैं.’’विदेशों से सहयोग देने के लिए तांता लगा हुआ है लेकिन सहयोग करने वाले संगठनों का कहना है कि राजधानी में हवाई अड्डे का एक ही रनवे होने, ईंधन की कमी आने, भूकंप के कारण सडकें क्षतिग्रस्त होने और पहाडी देश की कठिन भौगोलिक स्थिति के कारण भूकंप पीडितों को सहयोग पहुंचाने में बाधा आ रही है.

राजधानी के अस्पतालों में रोगियों की काफी अधिक संख्या है और चिकित्सकों का कहना है कि उन्हें दवाओं एवं सर्जिकल उपकरणों की जरुरत है.

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