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सिंगापुर में हिंदुओं के साथ कोई भेद-भाव नहीं : मंत्री

Updated at : 07 Feb 2015 1:20 PM (IST)
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सिंगापुर में हिंदुओं के साथ कोई भेद-भाव नहीं : मंत्री

सिंगापुर : सिंगापुर के कानून मंत्री काशी विश्वनाथन षणमुगम ने आज कहा कि देश में हिंदुओं के साथ कोई भेद-भाव नहीं हो रहा है और इस हफ्ते के धार्मिक जुलूस में भारतीय मूल के तीन व्यक्तियों की हुल्लडबाजी एवं पुलिस के साथ उनकी झडपें अस्वीकार्य हैं. राक्षस सूरपादमन का नाश करने के लिए भगवान मुरुगन […]

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सिंगापुर : सिंगापुर के कानून मंत्री काशी विश्वनाथन षणमुगम ने आज कहा कि देश में हिंदुओं के साथ कोई भेद-भाव नहीं हो रहा है और इस हफ्ते के धार्मिक जुलूस में भारतीय मूल के तीन व्यक्तियों की हुल्लडबाजी एवं पुलिस के साथ उनकी झडपें अस्वीकार्य हैं. राक्षस सूरपादमन का नाश करने के लिए भगवान मुरुगन को पार्वती की ओर से भाला ‘वेल’ देने के उपलक्ष्य में मनाए जाने वाले वार्षिक हिंदू त्योहार ‘थाईपुसम’ के दौरान मंगलवार को हुल्लडबाजी करने और पुलिस अधिकारियों के साथ झडप के सिलसिले में भारतीय मूल के तीन सिंगापुरी नागरिकों को गिरफ्तार किया गया है.

तीनों को पैदल जुलूस में ढोल बजाने के लिए गिरफ्तार किया गया. उनमें से एक पर एक पुलिस अधिकारी को चोट पहुंचाने का आरोप लगाया गया है. कार्यक्रम के आयोजक ‘हिंदू धर्मादा बोर्ड’ ने पिछले कार्यक्रमों के दौरान हुल्लडबाजी के मद्देनजर जुलूस में ढोल बजाने पर प्रतिबंध लगा दिया है. विदेश मंत्री की भी जिम्मेदारी निभा रहे षणमुगम ने कहा, ‘ज्यादातर लोग महसूस नहीं करते कि सिंगापुर में सभी धार्मिक पैदल जुलूस प्रतिबंधित हैं.यह प्रतिबंध दंगों के बाद 1864 में लगाया गया था.’

उन्होंने कहा, ‘लेकिन हिंदुओं को छूट दी गई है. हिंदुओं को तीन धार्मिक पैदल जुलूस – थाईपुसम, पांगुनी उतीरम और थिमीथी की इजाजत दी गई है.’ षणमुगम ने कहा कि हिंदू धार्मिक पैदल जुलूस को प्रमुख सडकों पर निकलने की इजाजत दी गई है जबकि किसी अन्य धर्म को यह विशेषाधिकार नहीं दिया गया है. उन्होंने कहा कि धार्मिक पैदल जुलूस पर प्रतिबंध है क्योंकि इनमें खास संवेदनशीलता है और घटनाएं होने का खतरा ज्यादा है. सामाजिक एवं सामुदायिक कार्यकर्मों में ढोल बजाने, गाने और नृत्य करने की इजाजत है.

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