पोप फ्रांसिस बोले चीन का डर नहीं, दलाई लामा से मुलाकात का विकल्प है खुला
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :20 Jan 2015 12:17 PM (IST)
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रोम : पोप फ्रांसिस ने तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के साथ मुलाकात का विकल्प रखते हुए इस बात से इंकार किया है कि दिसंबर में चीन की नाराजगी के डर से उन्होंने तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता का स्वागत करने से इंकार कर दिया था.मनीला से वापस आने पर पोप फ्रांसिस ने पत्रकारों को बताया […]
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रोम : पोप फ्रांसिस ने तिब्बती धर्मगुरू दलाई लामा के साथ मुलाकात का विकल्प रखते हुए इस बात से इंकार किया है कि दिसंबर में चीन की नाराजगी के डर से उन्होंने तिब्बत के निर्वासित आध्यात्मिक नेता का स्वागत करने से इंकार कर दिया था.मनीला से वापस आने पर पोप फ्रांसिस ने पत्रकारों को बताया ‘किसी राष्ट्र प्रमुख या उच्च पदासीन व्यक्ति के किसी अंतरराष्ट्रीय बैठक के लिए रोम में आने पर उनका स्वागत करना राज्य के विदेश मंत्री के लिए निर्धारित प्रोटोकॉल में नहीं आता.’ दलाई लामा पिछले माह नोबल शांति पुरस्कार विजेताओं के एक सम्मेलन में शिरकत करने के लिए रोम आए थे.
पोप ने कहा ‘जब एफएओ (खाद्य एवं कृषि संगठन) की बैठकें थीं, मैं किसी से नहीं मिला.’ उन्होंने कहा‘कुछ अखबारों ने कहा कि मैं उनसे चीन के डर के चलते नहीं मिला.यह सच नहीं है.’
वेटिकन और चीन के बीच करीबी संबंधों के प्रयासों के बारे में उन्होंने कहा ‘चीनी लोग नम्र होते हैं और हम भी नम्र हैं. हम चीजों को चरणबद्ध तरीके से कर रहे हैं.’ उन्होंने कहा कि ‘चीनी जानते हैं कि मैं वहां जाने के लिए या चीनी अधिकारियों की वेटिकन में आगवानी करने के लिए तैयार हूं.’
जब उनका विमान मनीला से वेटिकन लौटा, पोप ने चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग को एक टेलीग्राम भेजा. वे जिस भी देश के उपर से होकर उड़ान भरते हैं, उसे ऐसा संदेश भेजते हैं. उन्होंने संदेश भेजा ‘मैं आपके लिए और चीनी लोगों के लिए सद्भाव एवं समृद्धि की प्रार्थना करता हूं.’
दिसंबर में सूत्रों ने कहा था कि वेटिकन का यह निर्णय दरअसल चीनी प्रतिक्रिया के प्रति चिंता को दर्शाता है. इसके साथ ही यह उस इच्छा को भी दर्शाता है, जो बीजिंग के साथ संबंध सामान्य करने के प्रयासों को कमजोर नहीं पड़ने देना चाहती या देश के छोटे से कैथोलिक समुदाय के खिलाफ प्रतिफल के रूप में जोखिम नहीं उठाना चाहती. वर्ष 1951 में अध्यक्ष माओ ने वेटिकन के साथ राजनयिक संबंध तोड़ लिए थे, उसके बाद से आज तक दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं.
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