काले धन की जानकारी के लिए भारत ने किया कैरेबियाइ देशों से समझौता
Updated at : 13 Nov 2014 3:34 PM (IST)
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संयुक्त राष्ट्र: देश में सत्ता सम्हालने के बाद काले धन का पता लगाने की मुहिम में सरकार ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में सरकार ने कालेधन का पता लगाने के लिये कर पनाहगाह माने जाने वाले छोटे द्वीप वाले देशों के साथ भी सूचनाओं के आदान प्रदान का समझौता करना शुरु […]
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संयुक्त राष्ट्र: देश में सत्ता सम्हालने के बाद काले धन का पता लगाने की मुहिम में सरकार ने तेजी दिखानी शुरू कर दी है. इसी सिलसिले में सरकार ने कालेधन का पता लगाने के लिये कर पनाहगाह माने जाने वाले छोटे द्वीप वाले देशों के साथ भी सूचनाओं के आदान प्रदान का समझौता करना शुरु कर दिया है.
ऐसे ही दो कैरिबियाई देशों सेंट किट्स और नेविस के साथ भारत ने कर सूचनाओं के अदान प्रदान का समझौता किया है.पूर्व कांग्रेसी प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव के शासन काल में हुए सेंट किट्स घोटाले से इस जगह का नाम काले धन को सुरक्षित रखने वाली पनाहगार जगह के रूप में प्रमुखता से सामने आया था.
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि अशोक कुमार मुखर्जी और सेंट किट्स तथा नेविस के उनके समकक्ष राजदूत डेलनो फ्रैंक बार्ट ने यहां स्थित भारतीय मिशन में इस कर सूचना के आदान-प्रदान करने के समझौते पर हस्ताक्षर किये.
गौरतलब है कि इस बारे में भारतीय मिशन ने एक बयान जरी कर कहा है कि यह समझौता कर सूचना आदान-प्रदान के दूसरे समझौतों जैसा ही होगा और इसके दायरे में दोनों देशों द्वारा लगाए जाने वाले कर आएंगे. इसमें दोनों देशों के कर कानून प्रशासन, आकलन, कर दावों और अभियोजन से संबंधित सूचनायें शामिल होंगी.
करार के तहत बैंकिंग ब्योरा, कंपनियों के स्वामित्व संबंधी सूचना और दोनों देशों में घरेलू कानून व करारों के बारे में प्रशासन की दृष्टि से प्रासंगिक सूचनाएं शामिल होंगी. भारत की विदेशों में जमा काले धन की लडाइ का मुख्य केंद्र हालांकि स्विट्जरलैंड है लेकिन विभिन्न एजेंसियों और जांच में यह तथ्य सामने आया है कि अन्य कई देशों के विभिन्न गंतव्यों के जरिये भी कालेधन का प्रवाह होता है. ये देश कर पनाहगाह के तौर पर जाने जाते हैं. इस तरह के गंतव्यों में कैरिबियन क्षेत्र के कई द्वीप और कैरेबियाई द्वीपीय राष्ट्रों के नाम भी शामिल हैं.
इन मामलों में हो रही बदनामी और अंतरराष्ट्रीय दबावों के चलते सेंट किट्स और नेविस सहित ऐसे कई छोटे देशों ने हाल के बरसों में अपने अधिकार क्षेत्र में कारोबारी व्यवहार सुधारने और ऐसे आरोपों से निकलने पर सहमति जताई है.
भारत ने ऐसे कई गंतव्यों मसलन बहामास, बरमुडा, लीकटेंस्टाइन, जिब्राल्टर, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, आइले ऑफ मैन, केमैन आइलैंड, जर्सी, मकाउ, लाइबेरिया, अर्जेंटीना, ग्यूर्नसे और मोनाको आदि के साथ कर मामलों पर सूचनाओं के आदान-प्रदान का करार किया है.
फिलहाल, विशेष जांच टीम (एसआईटी) काले धन के मुद्दे को देख रही है. इनमें भारतीयों द्वारा विदेशों में जमा कराए गए धन का मुद्दा भी शामिल है. एसआईटी ने हाल में सरकार को दी गई अपनी एक रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला है कि भारत व कर पनाहगाह देशों के बीच आपराधिक कानूनी संधियों का अभाव विदेशों में जमा काले धन को वापस लाने के रास्ते की सबसे बडी अड़चन है.
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