डब्ल्यूटीओ में मिली भारत को बड़ी सफलता, खाद्य सुरक्षा पर अमेरिका का मिला साथ
Updated at : 13 Nov 2014 1:50 PM (IST)
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नयी दिल्ली: विश्व व्यापर संगठन (डब्ल्यूटीओ) में बड़ी सफलता हासिल करते हुए भारत ने देश के गरीबों और किसानों के हित में खाद्यान्न के भंडारण के मुद्दे पर अपने प्रस्ताव पर अमेरिका का समर्थन पाने की सहमति प्राप्त कर ली है. इससे डब्ल्यूटीओ में व्यापार सुगमता करार (टीएफए) के कार्यान्वयन का रास्ता खुल गया है. […]
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नयी दिल्ली: विश्व व्यापर संगठन (डब्ल्यूटीओ) में बड़ी सफलता हासिल करते हुए भारत ने देश के गरीबों और किसानों के हित में खाद्यान्न के भंडारण के मुद्दे पर अपने प्रस्ताव पर अमेरिका का समर्थन पाने की सहमति प्राप्त कर ली है. इससे डब्ल्यूटीओ में व्यापार सुगमता करार (टीएफए) के कार्यान्वयन का रास्ता खुल गया है. इस मामले पर लम्बी खींच-तान के बाद आज भारत व अमेरिका ने भारतीय किसानों के हितों को सुरक्षित रखते हुए खाद्य-सुरक्षा के मुद्दे पर गतिरोध को दूर कर लिया है.
अमेरिका ने खाद्यान्न के भंडारण के मुद्दे पर भारत के प्रस्ताव का समर्थन करने की सहमति दी है. अब इसे डब्ल्यूटीओ की आम परिषद में अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा ताकि व्यापार सुगमता करार पर दस्तखत हो सकें.
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस सफलता की घोषणा करते हुए कहा कि भारत व अमेरिका ने डब्ल्यूटीओ में खाद्य खुरक्षा के उद्देश्य से सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण के मुद्दों पर मतभेदों को हल करने में सफलता हासिल की है.
उन्होंने कहा कि इससे डब्ल्यूटीओ को और अधिक सफलताओं के लिए तैयार किया जा सकेगा. इसके साथ ही सीतारमण ने भरोसा जताया कि सदस्य डब्ल्यूटीओ में इस मामले को रचनात्मक भावना के साथ आगे लेकर जाएंगे.मंत्री ने आगे कहा कि कई देशों को डब्ल्यूटीओ में भारत के दृष्टिकोण को उचित माना है और अब अमेरिका ने भी इसकी सराहना की है. हमारी सरकार की तरफ से अपनी चिंता को बताने के बाद अमेरिका ने खुलकर सार्वजनिक खाद्यान्न भंडारण पर हमारी चिंता का समर्थन किया है.
सीतारमण ने कहा कि भारत ने कभी भी व्यापार सुगमता में बाधा नहीं डाली बल्कि हम सिर्फ अपने किसानों के हितों का संरक्षण चाहते हैं. वाणिज्य मंत्री ने कहा कि डब्ल्यूटीओ की आम परिषद को भारत का प्रस्ताव मिलेगा और अमेरिका हमारा समर्थन करेगा. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा के बाद भारत के रुख को लेकर अमेरिका और अन्य विकसित देशों की समझ बेहतर हो पाई.
सीतारमण ने कई बार ट्वीट करके कहा था कि भारत बहुपक्षीय व्यापारिक प्रणाली का मजबूत समर्थक है और हम इसे और मजबूत करने को प्रतिबद्ध हैं. बाली करार परिपूर्ण नहीं था. इसलिए हमने यह मुद्दा उठाया था और अब हमें यह कहते हुए खुशी हो रही है कि इस मुद्दे को लेकर हुए मतभेदों को दूर कर लिया गया है.
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