पाक ने कश्मीरी अलगाववादियों को कहा ''पक्षकार'', भारत ने किया पलटवार

By Prabhat Khabar Digital Desk
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नयी दिल्‍ली: पाकिस्तान ने आज स्पष्ट किया कि वह कश्मीरी अलगाववादियों से बातचीत जारी रखेगा. साथ ही यह भी कहा कि कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाक वार्ता के लिए सभी पक्षों से संवाद करना 'महत्वपूर्ण' है. लेकिन भारत इससे सहमत नहीं है. भारत ने इस रुख की कडी आलोचना करते हुए पाकिस्तान पर शिमला समझौते से अलग रुख अपनाने का आरोप लगाया.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित द्वारा कश्मीरी अलगाववादियों के साथ उनकी बैठक को सही ठहराने के कुछ घंटों के भीतर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि यह भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दा है तथा किसी अन्य तरह के रुख से 'कोई हल नहीं निकलेगा.' ताजा बयानों से वार्ता प्रक्रिया के जल्द पटरी पर आने की संभावनाओं पर संदेह खडा हो गया है.

हमारा संवाद शांति प्रक्रिया के लिए: पाक

बासित ने भारत के इस रुख पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, 'हमें सभी पक्षों से बात करनी है. जहां तक हमारी बात है, इस पर कोई सवाल पैदा नहीं होता है. हम शांतिपूर्ण रास्ता निकालने के लिए भारत से संवाद कर रहे हैं.' कश्मीरी अलगाववादियों से मुलाकात को सही ठहराते हुए बासित ने यहां कहा, 'हमारा विश्वास है कि (कश्मीरी अलगाववादियों से) हमारा संवाद शांति प्रक्रिया के लिए मददगार है. सभी पक्षों के साथ बातचीत करना महत्वपूर्ण है. इसलिए यह हमारे लिए महत्वपूर्ण है.'

बासित की टिप्पणियों के बारे में पूछे जाने पर, अकबरुददीन ने कहा, 'वर्ष 1972 और भारत तथा पाकिस्तान के प्रधानमंत्रियों द्वारा शिमला समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद, जम्मू कश्मीर के मुद्दे पर केवल दो 'पक्षकार' भारत संघ और पाकिस्तान इस्लामी गणतंत्र हैं.' उन्होंने कहा, 'यह एक सिद्धांत है जो हमारे द्विपक्षीय संबंधों का आधार है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और प्रधानमंत्री वाजपेयी के बीच वर्ष 1999 के लाहौर घोषणापत्र में इस की फिर से पुष्टि की गई थी.'

उन्होंने कहा, 'शिमला समझौता और लाहौर घोषणापत्र से अलग रुख से कोई नतीजा नहीं निकलता.' भारत ने 25 अगस्त को प्रस्तावित विदेश सचिवों की बातचीत रद्द करते हुए कहा था कि पाकिस्तान को भारत-पाक वार्ता और अलगाववादियों के साथ मेलजोल रखने में से एक को चुनना होगा. बासित ने कहा कि उन्होंने अलगाववादी नेताओं के साथ बातचीत कर किसी प्रोटोकोल का उल्लंघन नहीं किया है.

लंबे अर्से से चली आ रही है यह प्रथा

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने कहा, 'इस तरह का सिलसिला लंबे अर्से से चला आ रहा है. हम कश्मीरी नेताओं से मुलाकात करते हैं. कश्मीर मुद्दे का शांतिपूर्ण हल ढूंढने के लिए सभी पक्षकारों के साथ संवाद करना जरुरी है.' यह पूछे जाने पर कि भारत ने अतीत में पाकिस्तान और हुर्रियत के बीच बैठकों की अनुमति क्यों दी, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा, 'पाकिस्‍तान ने हमें पूरी तरह से आश्वस्त किया था कि वे जम्मू कश्मीर के मुददे पर शांतिपूर्ण बातचीत के लिए प्रतिबद्ध है और पाकिस्तान या उनके नियंत्रण की सरजमीं को हमारे खिलाफ आतंकवाद के लिए उपयोग नहीं होने देगा.'

उन्होंने कहा, 'हम अब जानते हैं, खासकर मुंबई आतंकी हमलों तथा इसके बाद पाकिस्तान द्वारा इस मामले की जांच और सुनवाई के तरीके से, कि इस आश्वासन का कोई मतलब नहीं है और शिमला समझौते तथा लाहौर घोषणापत्र से अलग रुख अपनाने से कोई हल नहीं निकलता.' बासित ने कहा कि पाकिस्तान शांतिपूर्ण, परिणामोन्मुखी और अर्थपूर्ण वार्ता प्रक्रिया के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भारत के साथ अपने रिश्तों को 'बेहद अहमियत' देता है और विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द होने पर 'निराशावादी' होने की जरुरत नहीं है.

निराशावादी होने की जरुरत नहीं: बासित

बासित ने कश्मीर को एक 'द्विपक्षीय विवाद' के रुप में रेखांकित करते हुए कहा कि विदेश सचिव स्तर की वार्ता रद्द होने पर 'निराशावादी' होने की कोई जरुरत नहीं है और दोनों देशों को आगे बढना चाहिए. पाकिस्तानी उच्चायुक्त बासित ने कहा, 'नाकामी हमें मायूस नहीं करे, सरहद के दोनों तरफ हमारे नेतृत्व की दृष्टि के अनुरुप प्रक्रिया को आगे बढाने के रास्ते और तौर-तरीके खोजने से हमें हतोत्साहित नहीं करे. अत: हम इसके लिए ज्यादा से ज्यादा कोशिश करेंगे कि कैसे इस प्रक्रिया को आगे ले जाया जा सकता है.'

बासित ने कहा कि पाकिस्तान समझता है कि यह एक 'पेचीदा स्थिति' है, लेकिन वह सकारात्मक है और समस्याओं के हल खोजने की राह में बाधाओं को आने की इजाजत नहीं देगा. पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने कहा कि कश्मीर मुद्दा 'निरपेक्ष रुप' से देखा जाना चाहिए और कहा कि कश्मीरी अलगाववादियों के साथ उनकी मुलाकात का मकसद मुद्दे का व्यवहार्य हल खोजने का था. बासित ने कहा कि इस्लामाबाद में भी भारतीय राजनयिक तमाम तरह के लोगों से मिलते हैं. बहरहाल, पाकिस्तानी उच्चायुक्त से जब पूछा गया कि क्या उनकी सरकार भारतीय राजनयिकों को बलोच क्षेत्र के स्थानीय नेताओं से मिलने की इजाजत देगी तो वह जवाब देने से कतरा गए.

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