तेरह साल की एथिना ने मौत से पहले आईने के पीछे लिखा अनुभव

जिंदगी की डोर जब हाथ से छूटती जाती है तब इंसान जीवन के सार समझ पाता है. तब वह जान पाता है कि जिंदगी कितनी कीमती है और उसे किस तरह अविस्मरणीय बनाया जा सकता है. इसकी बानगी हमें तेरह साल की एथिना के जीवन से मिलती है. डेली मेल में छपी एक खबर के […]
जिंदगी की डोर जब हाथ से छूटती जाती है तब इंसान जीवन के सार समझ पाता है. तब वह जान पाता है कि जिंदगी कितनी कीमती है और उसे किस तरह अविस्मरणीय बनाया जा सकता है. इसकी बानगी हमें तेरह साल की एथिना के जीवन से मिलती है.
डेली मेल में छपी एक खबर के अनुसार एथिना को बोन कैंसर था. जिसके उससे अपने जीवन के सारे अनुभव बेडरूम के आइने के पीछे सबसे छुप कर लिखा. एथिना के माता- पिता डेन और कारोलाइन अपनी बेटी को खोकर काफी दुखी थे उन्हें पता नहीं था कि उन्हें अपनी बेटी के उन संदेशो का भी सामना करना पड़ेगा जो उसने उनसे छुपकर लिखे है. एथिना ने अपने सारे अनुभव तीन सौ शब्दो में लिखे जिसमें उसने जीवन को एक अलग रूप में ही देखा. एथिना के पिता ने कहते हैं उसके संदेशों को पढ़ना बहुत मुश्किल था उसने अपने सारे अनुभव लिखकर जीवन जीने का एक सकरात्म संदेश दिया है. एथिना बहुत जिंदादिल लड़की थी खुश रहने के लिए उसे किसी बहाने की जरूरत नहीं थी.
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