उत्तर कोरिया के स्कूलों में ''क्रांति'' का पाठ, बच्चों को दी जा रही है युद्ध की ट्रेनिंग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :27 Aug 2017 9:03 AM (IST)
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महाशक्तियों की चेतावनियों को नजर अंदाज कर उत्तर कोरिया इन दिनों लगातार मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है. वहां के राष्ट्रपति किम जोंग उन को सनकी माना जाता है. इस देश ने बच्चों की शिक्षा के लिए ऐसे प्रावधान किये हैं कि वे भविष्य में न केवल अपने देश के प्रति वफादार रहें, बल्कि वे […]
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महाशक्तियों की चेतावनियों को नजर अंदाज कर उत्तर कोरिया इन दिनों लगातार मिसाइलों का परीक्षण कर रहा है. वहां के राष्ट्रपति किम जोंग उन को सनकी माना जाता है. इस देश ने बच्चों की शिक्षा के लिए ऐसे प्रावधान किये हैं कि वे भविष्य में न केवल अपने देश के प्रति वफादार रहें, बल्कि वे एक योग्य सैनिक भी बनें.
उत्तर कोरिया में बच्चों को ऐसी शिक्षा दी जाती है, जिससे भविष्य में वे लड़ने वाले वफादार क्रांतिकारी पीढ़ी तैयार हो जायें. उत्तरी कोरिया में एक कहावत प्रचलित है कि पैसे मत बचाओ, लेकिन बच्चे को पढ़ने और लिखना जरूर सिखाओ.
2013 में उत्तरी कोरिया में एक नया स्कूल एजुकेशन सिस्टम लाया गया. इसके तहत सात वर्ष की उम्र से बच्चों को स्कूल भेजना अनिवार्य है. वहां उन्हें 11 साल बिताना होगा. पांच साल एलिमेंटरी स्कूल, तीन साल मिडिल स्कूल और तीन साल हाइ स्कूल में गुजारना पड़ेगा. इस तरह ग्रेजुएशन का प्रमाण पत्र मिलने के बाद बच्चे कॉलेज या विश्वविद्यालय जा सकते हैं.
किंगडर गार्डेन स्तर पर बच्चों को पूर्व कोरियाई नेता किम अल संग के घर का मॉडल बनाना होता है. गणित के कक्षा में बच्चों को अलग तरीके से राजनीतिक शब्दों का प्रयोग करते हुए पढ़ाया जाता है. इसके तहत गणित के सवाल इस तरह होते हैं. जैसे, हमारे नायकों ने कितने अमेरिकी जासूसों को पकड़ा. बच्चे अपना पूरा दिन स्कूल में यूनियन ऑफ सोशलिस्ट लेबर यूथ और यूथ रेड गार्ड के संरक्षण में बिताते हैं.स्कूली शिक्षा के पाठ्यक्रम का एक तिहाई हिस्सा सामाजिक व राजनीतिक अनुशासन के अधीन होता है.
बच्चों को इतिहास के नाम पर सिर्फ सुप्रीम नेता किम अल संग, किम जोंग इल,उनकी माता किम जोंग सक और नेता किम जोंग उन के बारे में पढ़ाया जाता है. इसके अलावा भूगोल के रूप में जोसिओन (1897 तक कोरिया का नाम था) के बारे में बताया जाता है. वहीं कोरियाई साहित्य, मनोविज्ञान और तर्क शास्त्र जैसे विषय की भी पढ़ाई होती है. हालांकि गणित, भौतिकी और शारीरिक शिक्षा का ज्ञान भी दिया जाता है.
उत्तर कोरिया की शिक्षा का सबसे अहम हिस्सा मेमोरी ट्रेनिंग है. इसके तहत शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बच्चों को दृढ़ बनना सिखाया जाता है.
इसका उद्देश्य किम अल संग द्वारा विकसित सिद्धांत के अनुरूप बच्चों को एक क्रांतिकारी बनाने पर जोर देना है. उत्तर कोरियाई शिक्षा के तीन मूल हैं. बच्चों में उच्च कोटि की गहराई और एकाग्रता विकसित करना, सूचनाओं को अलग और गूढ़ रखने की क्षमता विकसित करना और दृढ़ता विकसित करने पर जोर देना है. यह शिक्षा उन्हें राष्ट्रवादी किस्सों से प्रभावित कर उनमें क्रांतिकारी के तौर पर तैयार करता है. यहां की शिक्षा व्यवस्था का सबसे अहम हिस्सा यह है कि हमेशा बच्चों को युद्ध के चेतावनी के साथ शिक्षित किया जाता है.
इसके तहत बच्चों को पूरी तरह से ड्रील, सैन्य प्रशिक्षण, सिविल डिफेंस और सेना के साथ युद्ध प्रशिक्षण करवाया जाता है. बच्चों में टीम भावना विकसित करने के लिए बच्चों को फुटबॉल और बेसबॉल जैसे खेलों में भाग लेना अनिवार्य होता है. इसके अलावा एक अलग तरह का सैन्य खेल जरनिस्ता में भी बच्चे स्कूली पढ़ाई के दौरान हिस्सा लेते हैं.
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