बंगाल चुनाव में अजब संयोग: 15 दिसंबर 1970 को जन्मे दो उम्मीदवारों का मुकाबला एक ही महिला प्रत्याशी से!

WB Assembly Election 2021: शुभेंदु अधिकारी और बाबुल सुप्रियो की. दोनों 15 दिसंबर, 1970 को जन्मे. पेशे से राजनेता शुभेंदु अधिकारी और गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो को भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में अपना उम्मीदवार बनाया है. शुभेंदु अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम से बीजेपी प्रत्याशी हैं.
कोलकाता : बंगाल चुनाव में एक अजब संयोग देखने को मिला है. दो व्यक्ति एक ही पार्टी में हैं. भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में. दोनों का जन्मदिन एक ही दिन है. 15 दिसंबर 1970. दोनों को भाजपा ने विधानसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार बनाया है. इन दोनों का मुकाबला एक ही प्रत्याशी से होने की उम्मीद है, जो महिला है.
हम बात कर रहे हैं शुभेंदु अधिकारी और बाबुल सुप्रियो की. दोनों 15 दिसंबर, 1970 को जन्मे. पेशे से राजनेता शुभेंदु अधिकारी और गायक से नेता बने बाबुल सुप्रियो को भाजपा ने बंगाल विधानसभा चुनाव 2021 में अपना उम्मीदवार बनाया है. शुभेंदु अधिकारी पूर्वी मेदिनीपुर के नंदीग्राम से बीजेपी प्रत्याशी हैं.
नंदीग्राम से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ रही हैं. बाबुल सुप्रियो को बीजेपी ने टालीगंज से अपना उम्मीदवार बनाया है. चर्चा है कि ममता बनर्जी नंदीग्राम के साथ-साथ टालीगंज से भी परचा दाखिल कर सकती हैं. यदि ममता बनर्जी टालीगंज से भी चुनाव लड़ती हैं, तो दोनों भाजपा नेताओं का मुकाबला एक ही उम्मीदवार से होगा.
वर्ष 2021 के विधानसभा चुनाव में एक संयोग से जुड़े बाबुल और शुभेंदु में अंतर इतना है कि शुभेंदु लोकसभा और विधानसभा दोनों के चुनाव लड़ चुके हैं. बाबुल सुप्रियो वर्ष 2014 से आसनसोल लोकसभा सीट से सांसद हैं और नरेंद्र मोदी की सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं.
बाबुल सुप्रियो को टालीगंज से उतारने के पीछे ममता की संभावित उम्मीदवारी ही है. ममता ने जब अपने उम्मीदवारों की सूची जारी की थी, तब कहा था कि हो सकता है कि वह टालीगंज से भी चुनाव लड़ें. लेकिन, इसके बारे में बाद में फैसला करेंगे. नंदीग्राम के घटनाक्रम के बाद इस बात की चर्चा तेज है कि ममता टालीगंज से भी चुनाव लड़ेंगी.
हालांकि, अभी टालीगंज से तृणमूल ने बंगाल के मंत्री अरूप विश्वास को अपना उम्मीदवार घोषित कर रखा है. अरूप विश्वास के पक्ष में दीवार लेखन का काम जोर-शोर से चल रहा था. इसी बीच खबर है कि अरूप से कहा गया है कि दीवार लेखन का काम धीमा करें. इसके बाद से अरूप विश्वास को टालीगंज में प्रचार करते नहीं देखा जा रहा.
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तृणमूल के अंदरखाने की खबर है कि ममता बनर्जी के लिए अरूप विश्वास ने अपना बलिदान करने का उसी दिन तय कर लिया था, जिस दिन ममता ने कहा कि वह बाद में टालीगंज से भी चुनाव लड़ सकती हैं. इस संबंध में जब उनसे पूछा गया था, तो उन्होंने कहा था कि ममता दीदी बंगाल की सभी सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं.
Posted By : Mithilesh Jha
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