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अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से लगा झटका, टीएमसी सांसद की याचिका पर रोक लगाने से जज का इंकार

Updated at : 03 Sep 2023 2:11 PM (IST)
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अभिषेक बनर्जी को हाईकोर्ट से लगा झटका, टीएमसी सांसद की याचिका पर रोक लगाने से जज का इंकार

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी ने पिछले महीने वहां छापेमारी के दौरान मामले के मुख्य आरोपी सुजय कृष्ण भद्र से जुड़े एक कार्यालय के कंप्यूटर से 16 निजी फाइलें डाउनलोड कीं. ईडी ने कोर्ट को सूचना दी कि 16 डाउनलोड की गयी फाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है.

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पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव व सांसद अभिषेक बनर्जी को कलकत्ता हाईकोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. टीएमसी सांसद ने याचिका दाखिल कर कहा था कि उनके नाम को जांच के दायरे से बाहर कर दिया जाए, लेकिन कोर्ट ने इससे इंकार कर दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट के जज जस्टिस तीर्थंकर घोष की एकल पीठ ने कहा कि केंद्रीय एजेंसी की जांच के दायरे से अपना नाम बाहर करने के लिए तृणमूल नेता अभिषेक बनर्जी की याचिका पर अंतिम फैसला डाउनलोड की गई निजी फाइलों की फॉरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगा.

डाउनलोड की गई निजी 16 फाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के एक अधिकारी ने पिछले महीने वहां छापेमारी के दौरान मामले के मुख्य आरोपी सुजय कृष्ण भद्र से जुड़े एक कार्यालय के कंप्यूटर से 16 निजी फाइलें डाउनलोड कीं. ईडी ने कोर्ट को सूचना दी कि 16 डाउनलोड की गयी फाइलों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. इस पर जस्टिस तीर्थंकर घोष ने ईडी अधिकारी मिथिलेश कुमार मिश्रा और कोलकाता पुलिस के साइबर अपराध प्रभाग के अधिकारी अमिताभ सिन्हा रॉय को 16 डाउनलोड की गयी फाइलों की रिपोर्ट और प्रतियां एकत्र करने और उन्हें उनके पास जमा करने का निर्देश दिया.

इसके बाद ईडी अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंपेगी, जिसके बाद पीठ मामले में अपना फैसला सुनायेगा. न्यायमूर्ति तीर्थंकर घोष ने यह भी कहा कि चूंकि अंतिम फैसला फॉरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगा, इसलिए यदि आवश्यक हुआ, तो फैसले की घोषणा का अंतिम दिन टल सकता है. मामले की अगली सुनवाई चार सितंबर को होगी. सुजय कृष्ण भद्र से जुड़ी कॉरपोरेट इकाई के एक कर्मचारी द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद कोलकाता पुलिस के साइबर-अपराध प्रभाग ने मामले की जांच शुरू की, जहां इडी ने पिछले महीने छापेमारी की थी.

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जांच एजेंसी ने शहर पुलिस को बताया था कि 16 व्यक्तिगत फाइलें उसके एक अधिकारी ने उक्त कॉरपोरेट इकाई के कंप्यूटर से अनजाने में डाउनलोड कर ली थीं, जब वह अपनी बेटी के लिए राज्य के एक प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास में सीट की तलाश कर रहा था. ईडी ने यह भी दावा किया कि छापेमारी पूरी होने के बाद फाइलें अनजाने में डाउनलोड हो गयीं और यह कंपनी के कर्मचारियों के साथ-साथ मौके पर मौजूद स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी में सीसीटीवी निगरानी के तहत किया गया था.

पार्थ चटर्जी समेत छह आरोपियों को फिर जमानत नहीं

पश्चिम बंगाल के सरकारी व सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में हुई नियुक्तियों के घोटाले में गिरफ्तार पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी व अन्य पांच आरोपियों एसपी सिन्हा, सुबीरेश भट्टाचार्य, कल्याणमय गांगुली, चंदन मंडल और अशोक साहा को फिर जमानत नहीं मिली. आरोपियों की न्यायिक हिरासत की अवधि समाप्त होने के बाद उन्हें शनिवार को अलीपुर अदालत स्थित स्पेशल सीबीआइ कोर्ट में पेश किया गया. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपियों को जमानत नहीं देते हुए सभी को फिलहाल 15 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में ही रखे जाने का निर्देश दिया.

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इस दिन अदालत में पार्थ के अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल की शारीरिक स्थिति का हवाला देते हुए उन्हें जमानत दिये जाने की अपील की. इधर, केंद्रीय जांच एजेंसी के अधिवक्ता ने इसका विरोध किया. सूत्रों के अनुसार, सुनवाई के दौरान पार्थ की ओर से मामले की सीबीआई जांच व पार्थ की जमानत मंजूर नहीं किये जाने को लेकर उनके आवेदन पर सवाल उठाया. न्यायाधीश की ओर से कहा गया कि बार-बार एक ही कारण का हवाला देकर जमानत की याचिका को नामंजूर कैसे किया जाए? इधर, सीबीआई के अधिवक्ता ने भी सवाल उठाया कि एक ही कारण का हवाला देकर बार-बार आरोपी जमानत के लिए कैसे आवेदन कर सकता है?

न्यायाधीश ने सीबीआई जांच पर जतायी नाराजगी

सूत्रों के अनुसार, मामले की सुनवाई के दौरान अलीपुर की स्पेशल सीबीआई कोर्ट के न्यायाधीश ने सीबीआई जांच पर नाराजगी जतायी. उनकी ओर से सवाल किया गया कि केंद्रीय जांच एजेंसी की ओर से बार-बार एक ही कारण सामने रखकर आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज करने की मांग कैसे की जा रही है? उन्होंने पिछली केस डायरी का हवाला देते हुए कहा कि क्या सिर्फ समय बर्बाद किया जा रहा है. जवाब में जमानत का विरोध करते हुए सीबीआइ के अधिवक्ता ने कहा कि एक ही मुद्दे पर बार-बार जमानत अर्जी दायर जा रही है. क्या ऐसा हो सकता है. इस पर जज ने कहा कि क्या वह जमानत के लिए आवेदन करने से रोक सकते हैं. ऐसा कहीं नहीं लिखा है कि जमानत के लिए आवेदन नहीं किया जा सकता. न्यायाधीश ने कहा कि यदि गलती पकड़ी गई, तो आप बच नहीं पाएंगे.

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आमने-सामने हुए पार्थ चटर्जी व शोभन चटर्जी

इसी दिन अलीपुर अदालत परिसर में पूर्व शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी और कोलकाता के पूर्व मेयर शोभन चटर्जी आमने-सामने हुए. अदालत में लाए जाने के बाद पार्थ को कोर्ट लॉकअप में रखा गया था. उस समय शोभन और बैशाखी बनर्जी निजी काम से अदालत आए थे. कोर्ट के बाहर भीड़ देखकर वे खड़े हो गए. बाद में उन्हें पता चला कि पार्थ चटर्जी को कोर्ट लाया गया है. इसके बाद शोभन कोर्ट लॉकअप के बाहर उनसे मिलने पहुंचे. दूर से ही उन्होंने उनके स्वास्थ्य के बारे में पूछा. इस मुलाकात को लेकर पत्रकारों से बातचीत के दौरान पूर्व मेयर ने कहा कि पार्थ चटर्जी परिस्थितियों के शिकार हैं. लंबे समय तक सहयोगी रहने वाले किसी शख्स से मिलना कोई गुनाह नहीं है. उनका और पार्थ चटर्जी का करीब 45 वर्षों का रिश्ता है. न मिलना भी गुनाह समान होता.

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