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कोरोना वायरस से निबटने के लिए भारत के पास अब भी वक्त

By Pritish Sahay
Updated Date

भा रत बीते कुछ तिमाहियों से आर्थिक विकास और राजस्व की चुनौतियों से जूझ रहा है. कोरोना वायरस की वजह से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और निवेशकों में भय का माहौल बना है. हालांकि, सरकार को उम्मीद है कि नये वित्त वर्ष की शुरुआत में हालात में परिवर्तन आयेंगे, लेकिन 6 से 6.5 प्रतिशत के लक्ष्य को हासिल करने की चुनौती बनी रहेगी. कच्चे तेल की कीमतों में तेज गिरावट से राजस्व में बढ़त हो सकती है.

हालांकि, आर्थिक विशेषज्ञों और बैंकर्स का मानना है कि भारत के हालात आगे भी चिंताजनक बने रहेंगे. सरकार भी मान रही है कि मौजूदा वित्त वर्ष में लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है और नये साल में लक्ष्य को कम करना होगा. माना जा रहा है कि उपभोक्ता मांग में कमी आने से प्राप्तियों में कमी आयी है. ऑटो सेल्स, पैसेंजर ट्रैफिक, होटल बुकिंग और रिटेल सेल्स बुरी तरह से प्रभावित हुआ है. हालांकि, भारत की स्थिति अन्य देशों के मुकाबले अभी बेहतर है.

कोरोना की वजह से नौकरियों पर संकट : विदेश व्यापार, आयात, पर्यटन सेक्टर मंदी की मुश्किलों से जूझ रहे हैं, जिसकी वजह से विभिन्न सेक्टर में पेशेवरों की मांग में कमी आयी है. कई सर्वे रिपोर्ट में दावा किया गया है कि फरवरी और मार्च महीने में टैलेंट डिमांड में काफी कमी आयी है. बीते फरवरी महीने में प्रोजेक्ट/ इन्फ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में सर्वाधिक कमी दर्ज की गयी. इसके अलावा पेट्रोकेमिकल/ ऑयल व गैस, एक्सपोर्ट/ इंपोर्ट/ मर्चेंडाइजिंग और लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग सेक्टर में टैलेंट डिमांड कम हुआ है.

फरवरी-मार्च, 2020 में टैलेंट

डिमांड में कमी

प्रोजेक्ट/ इन्फ्रास्ट्रक्चर/ पावर/ एनर्जी -17%

पेट्रोकेमिकल्स/ ऑयल व गैस/ पावर -15% एक्सपोर्ट/ इंपोर्ट/ मर्चेंडाइजिंग -15%

लॉजिस्टिक्स व वेयरहाउसिंग -14%

हालांकि, क्वालिटी/ प्रॉसेस कंट्रोल में डिमांड दर्ज की गयी है. फरवरी, 2020 में इस सेक्टर में 30 प्रतिशत की ग्रोथ रही.

कार्यात्मक क्षेत्र, जहां फरवरी-मार्च में टैलेंट डिमांड कम रहा

लॉजिस्टिक्स/ सप्लाई चेन -17 %

कस्टमर सर्विस / टेलीकॉलिंग -14%

फ्रंट ऑफिस/ एडमिनिस्ट्रेशन -13%

पर्यटन उद्योग बुरी तरह प्रभावित : कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण वैश्विक स्तर पर भय का माहौल है. चीन के हुबेई प्रांत से शुरू हुआ यह संक्रमण 100 से अधिक देशों को अपनी गिरफ्त में ले चुका है. इस आपदा का असर हमारे पर्यटन उद्योग पर भी पड़ रहा है. हिमाचल प्रदेश के पसंदीदा रिसॉर्ट्स में 20 से 30 फीसदी की गिरावट आयी है. हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम (एचपीटीडीसी) के अनुसार, सामान्य दिनों में प्रमुख पर्यटन स्थलों के होटलों की लगभग 50 प्रतिशत और सप्ताहांत में 70 प्रतिशत तक बुकिंग रद्द करनी पड़ रही है. मनाली में एडवेंचर टूरिज्म के लिए जून के महीने में पर्यटक आना शुरू होते हैं, जिनमें विदेशी सैलानियों की संख्या काफी होती है. कोराेना का प्रभाव यहां देखा जा सकता है.

इस महीने की पांच तारीख को ताजमहल देखने आये पांच लोगों में काेरोना का संक्रमण पाया गया था. इसके बाद से ताजमहल परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गयी है. अागरा आनेवाले पर्यटकों, खासकर विदेशी पर्यटकों की संख्या में कमी आयी है. एक अन्य आकलन के अनुसार, बीते लगभग 10 दिनों में आगरा के पर्यटन उद्योग को 25 करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है. तिरुपति बालाजी आनेवाले भक्तों की संख्या में भी कमी आयी है.

फेडरेशन ऑफ होटल एंड रेस्टोरेंट इंडस्ट्री के पूर्व निदेशक के मुताबिक, संक्रमण के डर से आजकल लोग होटल और रेस्तरां आने से बच रहे हैं. राजस्थान के हॉस्पिटेलिटी व टूरिज्म फेडरेशन के मुताबिक, सरकार द्वारा वीजा पर प्रतिबंध लगाने से अगले महीने राजस्थान के महलों और किले को देखने आनेवाले कई पर्यटकों ने अपनी योजना स्थगित कर दी है.

भारत के डोमेस्टिक टूर ऑपरेटर्स एसोसिएशन का कहना है कि वीजा प्रतिबंध के कारण पर्यटन और इससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियाें पर गहरा संकट मंडरा रहा है. कोच्चि के एक फाइव स्टार होटल के निदेशक के मुताबिक, होटल में आनेवालों की संख्या में 20 प्रतिशत की गिरावट आयी है. जबकि बीते वर्ष हमारे देश के दो-तिहाई होटल लोगों से भरे हुए थे.

क्या कहती है सीआइआइ की रिपोर्ट : कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (सीआइआइ) भी मानती है कि आगामी महीनों में कोराेना वायरस के कारण भारतीय पर्यटन उद्योग काफी प्रभावित होगा. अक्तूबर 2019 से मार्च 2020 के बीच भारतीय पर्यटन उद्योग सेे 28 अरब डॉलर के राजस्व प्राप्ति का अनुमान था, लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण इसके 60 से 65 प्रतिशत हिस्से पर असर पड़ने का अनुमान है.

इतना ही नहीं, सीआइआइ के अनुमान के मुताबिक, इस वर्ष मार्च तक लगभग 80 प्रतिशत होटलों की बुकिंग कैंसिल की जा चुकी है. अक्तूबर 2020 से मार्च 2021 के टूरिस्ट सीजन के लिए होटल की बुकिंग आम तौर पर मार्च से शुरू हो जाती है. लेकिन संक्रमण के डर से अब तक लोगों ने बुकिंग ही शुरू नहीं की है. इसी छह मार्च को कन्फेडरेशन द्वारा जारी आकलन के अनुसार, विदेशों में बसे भारतीय हर वर्ष अप्रैल से सितंबर के बीच देश आते हैं, लेकिन संक्रमण के कारण इस बार इस संख्या में भारी कमी की आशंका है.

आम उत्पादकों को घाटे की आशंका : अमेरिका, यूरोप से लेकर खाड़ी देशों में भारतीय आम की काफी मांग है. आम का मौसम आ चुका है, लेकिन कोराेना के कारण इन देशों में आम की आपूर्ति में बाधा आ रही है. इससे आम उत्पादकों को घाटे का सामना करना पड़ सकता है. एक अनुमान के मुताबिक, हमारे देश में अाम के कुल उत्पादन का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा निर्यात किया जाता है. इसलिए किसान आम में बहुत ज्यादा निवेश करते हैं. अगर आम का निर्यात नहीं होगा तो किसानों को बहुत ज्यादा घाटा होगा.

वर्तमान में हवाई मार्ग से आम का निर्यात पूरी तरह बंद है. हालांकि समुद्री मार्ग से निर्यात भी एक विकल्प है, लेकिन इसमें बहुत अधिक समय लगता है. जहाज के माध्यम से आम पहले पहले दुबई जाता है और वहां से सड़क के रास्ते खाड़ी के अन्य देशों में भेजा जाता है. लेकिन कोरोना के कारण अन्य देशों ने निर्यात को अभी हरी झंडी नहीं दी है.

अगर निर्यात नहीं होता है तो आम के दाम काफी कम हो सकते हैं. अभी एक पेटी की कीमत छह हजार रुपये है, लेकिन निर्यात नहीं हुआ तो दाम अभी और कम होंगे. एक पेटी में बड़े आकार के चार से पांच दर्जन आम आते हैं जबकि छोटे आकार के आठ से नौ दर्जन आम आते हैं. आम निर्यात से किसानों को अच्छी कमाई होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थिति में आम की कीमतों में भारी कमी की आशंका जतायी जा रही है, जिसका सीधा असर आम उत्पादकों और व्यापारियों पर पड़ेगा.

मनोरंजन जगत भी असर से अछूता नहीं

विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना वायरस के फैलाव को रोकने के लिए एहतियात के तौर पर देश के कुछ हिस्सों में सिनेमाघरों को बंद कर दिया गया है, शूटिंग और प्रचार कार्यक्रम व साक्षात्कार पर रोक लगा दी गयी है. जिससे टेलीविजन और फिल्म उद्योग को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.

डब्ल्यूएचओ द्वारा इसे महामारी घोषित किये जाने के बाद इस वायरस के प्रसार को रोकने के लिए केरल, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, कर्नाटक और मुंबई समेत देश के अनेक हिस्सों में मॉल, जिम और सिनेमाघर बंद कर दिये गये हैं. फिल्म वितरक जोगिंदर महाजन के अनुसार, इस बात का अनुमान लगाना मुश्किल है कि मनोरंजन उद्योग का कितना पैसा दांव पर लगा है, लेकिन आगामी 10 दिनों में दिल्ली के सिनेमाघरों को बिना एक पैसा कमाये दो से दस लाख रुपये का घाटा हो सकता है. दिल्ली में तकरीबन 150 स्क्रीन हैं, जिसे सरकार के आदेशानुसार 31 मार्च तक बंद कर दिया गया है.

ट्रेड पंडितों की मानें तो हिंदी भाषा के बड़े बजट की एक फिल्म के प्रचार पर 15 से 20 करोड़, जबकि मध्यम या छोटे बजट के फिल्म के प्रचार पर पांच करोड़ रुपये खर्च किये जाते हैं. अक्षय कुमार की सूर्यवंशी समेत कई फिल्मों की रिलीज टाल दी गयी है. जो फिल्में पहले से सिनेमाघरों में लगी हैं उनके दर्शकों में भारी कमी आयी है. मुंबई स्थित फिल्म वितरक रमेश थाडानी का इस संबंध में कहना है कि कोरोना के प्रभाव के कारण मनोरंजन जगत का कम से कम चालीस से पचास प्रतिशत व्यवसाय प्रभावित होगा.

भारत के सिनेमा ऑनर्स व एग्जिबिटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, नितिन दत्तार का कहना है कि महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और गुजरात के 1000 सीटों वाले सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों की आठ से दस प्रतिशत सीटें ही भर पा रही हैं. इस संक्रमण के डर से 13 मार्च को मुंबई में होनेवाले कई बड़े कार्यक्रम टाल दिये गये, जिनमें हॉटस्टार प्रेस कॉन्फ्रेंस से जुड़ी डिज्नी प्लस का भारत में लाॅन्च और एक वेब सीरीज का इंटरव्यू शामिल है.

सरकार ने लगायी वीजा पर रोक : कोराना संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए केंद्र सरकार ने 15 अप्रैल तक राजनयिक, आधिकारिक, अंतरराष्ट्रीय संगठनों, रोजगार और प्रोजेक्ट वीजा को छोड़ कर दूसरे सभी वीजा पर रोक लगा दी है. इससे देश के पर्यटन उद्योग के प्रभावित होने की आशंका जतायी जा रही है. पर्यटन व्यापार से जुड़े लोगों का मानना है कि एक विदेशी नागरिक जब भारत घूमने आता है तो उसके जरिये सात लोगों को रोजगार मिलता है, जिसमें होटल, गाइड से लेकर खाना खिलाने वाले, सामान उठाने वाले और सैर कराने वाले आदि शामिल होेते हैं.

फेडरेशन ऑफ एसोसिएशन ऑफ इंडियन टूरिज्म एंड हॉस्पिटेलिटी के जनरल सेक्रेटरी ने पर्यटन मंत्री से मिलकर कोरोना वायरस से जुड़े सरकारी आदेश की समीक्षा करने की बात की है. साथ ही, पूरे वर्ष के लिए पर्यटन क्षेत्र को कर मुक्त करने की मांग भी की है. हालांकि उन्होंने सरकार द्वारा उठाये गये कदम का स्वागत भी किया है.

क्या हैं यूनिसेफ के दिशा-निर्देश : यूनिसेफ ने कोरोना वायरस को लेकर कहा है कि घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना जरूरी है. उसने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि सबसे प्रमुख सावधानी यही है कि भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में जाने से बचें.

किसी मेटल, दरवाजा आदि को छूने के बाद अपने हाथ बीस सेकंड तक धोयें.

बाहर से आने के बाद कपड़े धोयें, नहीं धो सकते हैं, तो कुछ देर के लिए धूप में रखें.

किसी से हाथ मिलाना पड़े, तो फिर अपने हाथ सेनेटाइजर से साफ करें.

यदि आपको छींक आ रही है या कोई और छींक रहा है, तो उससे चार मीटर दूर हो जायें, छींकते समय मुंह पर कपड़ा जरूर रखें.

कोरोना वायरस ठंड में ज्यादा प्रभावी होता है, लिहाजा ठंडी चीजें खाने से बचें.

जितना हो सके घर में ही बने गर्म और ताजा भोजन का सेवन करें.

थोड़ी-थोड़ी देर पर गर्म पानी पीते रहें, भोजन में मिर्च, अदरक का उपयोग करें.

पहला चरण

ज्यादातर मामले प्रभावित देशों से आते हैं.

दूसरा चरण

प्रभावित लोगों से स्थानीय स्तर पर संक्रमण

तीसरा चरण

सामुदायिक स्तर पर बीमारी का फैलाव, बड़ा भू-भाग प्रभावित

चौथा चरण

बीमारी महामारी का रूप ले लेती है, जिसका कोई अंत नजर नहीं आता. चीन और इटली इस चरण में प्रवेश कर चुके हैं.

हम कैसे इसे दूसरे-तीसरे चरण में रोक सकते हैं

पृथक करके : कोविड-19 से प्रभावित देशों से आनेवाले व्यक्ति को बीमारी के लक्षण की परवाह किये गये बगैर 14 दिनों के लिए पृथक कर दिया जाता है.

संपर्क पर निगरानी : अगर कोई व्यक्ति संक्रमित पाया जाता है, तो उसके संपर्क में आनेवाले व्यक्ति को भी निगरानी में रखा जाता है. अगर कोई लक्षण उभरता है, तो उसके पृथक किया जा सकता है.

भीड़ पर रोक : ज्यादातर राज्यों में स्कूल, सिनेमा हाल या अन्य सार्वजनिक जुटाव कार्यक्रमों पर रोक लगा दी जाती है.

जागरूकता : आम जनता को हाथ को साफ रखने और श्वांस से संबंधित जागरूकता दी जाती है.

तैयारी : ढांचागत व्यवस्था को बेहतर बनाने पर जोर देना, जैसे- टेस्टिंग सुविधा, अाइसोलेशन बेड, संक्रमित मामलों की कड़ी निगरानी. विभिन्न स्तरों पर तैयारी.

क्या अंतर है फ्लू और कोविड-19 में : उत्तरी गोलार्ध में फ्लू के मौसम में तेजी से फैलते कोरोना वायरस की वजह से पूरी दुनिया में अफरा-तफरी का माहौल है. यहां तक की डॉक्टरों को भी फ्लू और इस वायरस के लक्षण स्पष्ट करने में मुश्किलें हो रही हैं.

लक्षण को पहचानने में होनेवाली देरी की वजह से कई देशों में इसका संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है. सामान्य तौर पर फ्लू के संक्रमण में बुखार, मांसपेशियों में दर्द, गले में खराश, सिरदर्द, सिहरन, नजला और थकान होती है. अस्पतालों में लाये गये कोविड-19 के मरीजों में बुखार और फ्लू के लक्षण पाये गये. कोरोना वायरस के ज्यादातर मरीजों में निमोनिया (फेफडों में संक्रमण) के लक्षण हैं, जिससे सांस लेने में दिक्कतें हो रही हैं.

कोरोना संक्रमण कितना खतरनाक : चीन में कोरोना संक्रमण पर हुए विस्तृत अध्ययन से स्पष्ट है कि 80 प्रतिशत लोगों में इसके मामूली लक्षण (फेफड़ों में कोई गंभीर संक्रमण नहीं) पाये गये हैं. हालांकि, 15 प्रतिशत लोगों में गंभीर संक्रमण पाया गया, जिसकी वजह से सांस लेने में दिक्कत, ब्लड ऑक्सीजन में कमी या फेफड़ों से जुड़ी अन्य समस्याएं हो रही हैं. संक्रमित लोगों में से पांच प्रतिशत से कम की हालत गंभीर हैं, जिससे श्वसन तंत्र या शरीर के कई हिस्सों के फेल होना का डर रहता है. हार्ट और डायबिटीज के मरीजों के लिए कोरोना का संक्रमण अधिक खतरनाक हो सकता है.

सार्वजनिक परिवहन से संक्रमण संभव?

संक्रमण की संभावना परिवार में एक सदस्य से दूसरों सदस्य को सकती है. एक से दो मीटर के दायरे में आने पर संक्रमण हो सकता है. कफ या बात करते समय मुंह से थूक निकलने से इन्फेक्शन का डर रहता है. हालांकि, सार्वजनिक यातायात में इसकी संभावना कम रहती है. कोरोना मरीज के स्पर्श या वस्तु के लेन-देने से भी इन्फेक्शन हो सकता है. वायरस अधिकतम 48 घंटे तक जिंदा रह सकता है, लेकिन सख्त सतह पर यह 72 घंटे तक रह सकता है. इसीलिए यह सलाह दी जाती है कि अपने हाथ को नियमित अंतराल पर धोते रहें.

मास्क और सेनेटाइजर की कालाबाजारी की करें शिकायत : बीते कई दिनों से बाजार में मास्क और सेनेटाइजर की बढ़ती मांग का फायदा उठाकर इसकी कालाबाजारी की जा रही है. इसके मद्देनजर सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 की अनुसूची में संशोधन कर इन वस्तुओं को शामिल कर लिया है. विधिक माप विज्ञान अधिनियम के तहत एक एडवाइजरी भी जारी की गयी है. सरकार ने एक नंबर और वेब पोर्टल जारी किये हैं, जिसमें इन चीजों की प्रिंट रेट यानी एमआरपी से ज्यादा बेचने, कालाबाजारी, मिलावट की शिकायतें भी की जा सकती हैं.

राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1800-11-4000

वेब पोर्टल : www.consumerhelpline.gov.in,

www.consumeraffairs.nic.in, dsadmin-ca@nic.in, dirwm-ca@nic.in, secy.doca@gov.in

सात साल का हो सकता कारावास

उल्लंघनकर्ता को सात साल के कारावास अथवा जुर्माने या दोनों की सजा हो सकती है. चोरबाजारी निवारण एवं आवश्यक वस्तु प्रदाय अधिनियम के तहत, उसे छह माह के लिए नजरबंद किया जा सकता है.

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