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आज नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे : बेटियों से घरों में आयी खुशियां

Updated at : 24 Jan 2020 8:05 AM (IST)
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आज नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे : बेटियों से घरों में आयी खुशियां

आज नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे है. बेटियों को नया अवसर और बराबरी का अधिकार देने का खास दिन. इस विशेष मौके पर राजधानी की ऐसी पांच फैमिली से बातचीत की गयी, जिनके लिए बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है. बिटिया अंशिका से गहरा लगाव किशोरगंज चौक निवासी बिजनेसमैन सुनील कुमार की दो बेटियां हैं. सुनील […]

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आज नेशनल गर्ल्स चाइल्ड डे है. बेटियों को नया अवसर और बराबरी का अधिकार देने का खास दिन. इस विशेष मौके पर राजधानी की ऐसी पांच फैमिली से बातचीत की गयी, जिनके लिए बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है.
बिटिया अंशिका से गहरा लगाव
किशोरगंज चौक निवासी बिजनेसमैन सुनील कुमार की दो बेटियां हैं. सुनील और उनकी पत्नी प्रियंका अपनी दोनों बेटियों से बहुत प्यार करते हैं. छोटी बेटी अंशिका विशेष बच्ची है, लेकिन माता-पिता को कोई अफसोस नहीं है कि उनकी बेटी सामान्य बच्चों की तरह क्यों नहीं है़ इनकी ज्वाइंट फैमिली है़ इसमें 16 सदस्य हैं. सभी अंशिका को बहुत प्यार करते हैं. सुनील कहते हैं कि छोटी बेटी मेरे लिए काफी लक्की है. इच्छा है कि मेरी बेटी भी अन्य बच्चों की तरह नाॅर्मल स्कूल में जाये. फिलहाल उसे खास बच्चों के स्कूल में भेज रहा हूं.
दोनों बेटियों से घर की रौनक है
आइटीआइ निवासी मंगरा उरांव की दो बेटियां हैं. बड़ी बेटी मंजूषा पांच साल की है. छोटी बेटी स्वरा की उम्र एक वर्ष है़ मंगरा उरांव और उनकी पत्नी उर्मिला दोनों बेटियों से काफी प्यार करते हैं. बड़ी बेटी खास बच्ची है फिर भी उन्हें इस बात का जरा भी अफसोस नहीं है. वे कहते हैं : उनके लिए बेटा-बेटी समान है. मंगरा बताते हैं कि मंजूषा को बोलने और चलने की समस्या है. हालांकि वह नॉर्मल बच्चों की तरह ही है़ कोशिश है कि अपनी बेटी को अच्छी जिंदगी दे सकूं. वह कहते हैं : दोनों बेटियां घर की रौनक हैं.
गौरव हैं हमारी जुड़वा बेटियां
बसंत विहार निवासी प्रकाश रंजन और डॉ रुचि कुमारी की जुड़वा बेटियां है़ं दोनों 20 महीने की है, लेकिन अभी से ही पिता ने बेटियों के जीवन संवारने और बेहतर भविष्य के लिए सेविंग शुरू कर दी है़ पिता प्रकाश रंजन कहते हैं : हमारी बेटियां बेटों से कम नहीं है़ इन्हीं से हमारा परिवार पूरा हो गया है़ उन्हें अच्छी शिक्षा मिले इसलिए अभी से ही प्लानिंग शुरू हो गयी है़ दोनों के लिए अलग-अलग से प्रोपर्टी ले रहे है़ं हमारी बेटियां गौरव है़ं
इनका है सृष्टि-समृद्धि निवास
हटिया के रहनेवाले विजय कुमार सिंह और सोनी सिंह बेटी सृष्टि और समृद्धि के नाम पर अपना घर का नाम रखा है़ दोनों ने बेटियों के भविष्य के लिए जन्म से ही तैयारी शुरू कर दी थी. सोनी सिंह बताती हैं कि दोनों बेटियों से हमारा परिवार है़ बेटियों को अच्छी शिक्षा देनी है़ उनके भविष्य के लिए तैयारी जन्म के बाद से ही करने लगे थे. बेटियों के नाम से घर का नाम सृष्टि-समृद्धि निवास रखा. आज बेटा-बेटी में कोई फर्क नहीं है़
लाइब्रेरी को देंगे बेटी समीक्षा का नाम
पंडरा निवासी डॉ प्रशांत गौरव और डॉ गरिमा कुमारी की पुत्री समीक्षा ही उनकी दुनिया है. वह कहते हैं : जिस घर में बेटियां नहीं होती, वह घर अधूरा सा लगता है़ बेटी समीक्षा के आने से परिवार कंप्लीट हुआ़ अब तो कटहल मोड़ में बन रहे नये घर और अपने पुस्तकालय का नाम बेटी के नाम पर ही रखने की तैयारी है़ अभी इनकी लाइब्रेरी में 2000 से अधिक किताबें हैं. निर्माणधीन आवास में अलग से पुस्तकालय का निर्माण हो रहा है़
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