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बाल दिवस आज : बच्चों से स्नेह ने एक प्रधानमंत्री को बनाया ''चाचा नेहरू''

Updated at : 14 Nov 2019 6:55 AM (IST)
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बाल दिवस आज : बच्चों से स्नेह ने एक प्रधानमंत्री को बनाया ''चाचा नेहरू''

पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री पद की कितनी भी व्यस्तता रहती, मगर बच्चों के लिए समय मिल ही जाता था. उन्हें दो चीजों से गहरा लगाव था, एक तो गुलाब का फूल और दूसरा बच्चों के साथ समय बिताना. चाचा नेहरू बच्चों में भारत का भविष्य देखते थे, इसलिए वे इनके लिए अच्छी शिक्षा […]

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पंडित जवाहर लाल नेहरू को प्रधानमंत्री पद की कितनी भी व्यस्तता रहती, मगर बच्चों के लिए समय मिल ही जाता था. उन्हें दो चीजों से गहरा लगाव था, एक तो गुलाब का फूल और दूसरा बच्चों के साथ समय बिताना. चाचा नेहरू बच्चों में भारत का भविष्य देखते थे, इसलिए वे इनके लिए अच्छी शिक्षा व स्वास्थ्य पर बहुत जोर देते थे.
भारतीय बच्चों के लिए 14 नवंबर का दिन बेहद खास होता है, क्योंकि इस दिन को ‘बाल दिवस’ के रूप में मनाया जाता है. देश के विकास में बच्चों की महती भूमिका होती है, जिसे हमारे पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने पहचाना था. दरअसल, चाचा नेहरू बच्चों में देश का भविष्य देखते थे. उनका मानना था कि बच्चों के समुचित विकास से ही देश का विकास होगा.
इसलिए वे बच्चों के कल्याण, उनकी शिक्षा के लिए प्रयासरत रहते थे. वे अपने हर जन्मदिन पर अनाथ बच्चों से मिलने जाते और उनके साथ समय बिताते. बच्चों को कपड़े और मिठाइयां बांटते. बच्चों को भी उनसे गहरा लगाव था.
इसलिए बच्चे उन्हें प्यार से ‘चाचा नेहरू’ बुलाते थे और वे इसी नाम से प्रसिद्ध हो गये. उन्होंने देश के कई गांवों, तहसील और छोटे शहरों में स्कूल खुलवाये. सभी बच्चों को नि: शुल्क और अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा की गारंटी देने के लिए पांच साल की योजनाएं बनायीं. साथ ही ललित कला अकादमी और साहित्य अकादमी की स्थापना में मदद की थी और वह इन संस्थानों के पहले अध्यक्ष बने. वह हमेशा कहते थे कि बच्चों का पालन-पोषण प्यार से किया जाना चाहिए, क्योंकि वे ही देश के भविष्य हैं.
बच्चे कलियों की तरह होते हैं, इसलिए उन्हें सावधानीपूर्वक और प्यार से पालें, क्योंकि वे देश के भविष्य और कल के नागरिक हैं. केवल सही शिक्षा के जरिये ही उन्हें सही दिशा दी जा सकती है.
पं जवाहरलाल नेहरू
बचपन में शर्मीले व जिज्ञासु स्वभाव के थे बाल जवाहर
चाचा नेहरू बच्चों को गुलाब के फूल की पंखुड़ियों की तरह कोमल मानते थे.
बचपन में चाचा नेहरू भी तुम्हारी तरह ऊंची उड़ती रंग−-बिरंगी पतंगों को देख बहुत खुश होते थे. पिता मोतीलाल नेहरू जब पतंग को उड़ाकर उसकी डोर नन्हे जवाहर के हाथ में थमाते तो वे सांस रोककर पतंग थामे रहते. संपन्न परिवार में राजकुमारों की तरह उनका पालन-पोषण हुआ. इसके बावजूद बालक जवाहर गरीब लोगों को देखकर बहुत दुखी होते. वे कई बार कहते थे− ‘यदि मेरे पास अलादीन का चिराग होता, तो मैं एक फूंक मारकर दुनिया से गरीबी दूर कर देता.’ पिताजी ने बेटे जवाहर का लंदन के बोर्डिंग स्कूल ‘हैरो’ में दाखिला कराया. आगे कैंब्रिज के ट्रिनिटी कॉलेज से नेचुरल साइंस में डिग्री ली.
फिर वकालत की पढ़ाई भी की. हैरो लंदन के प्रसिद्ध स्कूलों में था, जहां से पिट, बॉल्डविन, विंस्टन चर्चिल, पामरस्टन और फिर पंडित जवाहर लाल नेहरू भी प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचे.
नेहरू जी बचपन में शर्मीले व जिज्ञासु स्वभाव के थे. बोर्डिंग स्कूल में रहते हुए अपनी बातों, जिज्ञासाओं को पत्रों द्वारा पिता से शेयर करते. उनके पसंदीदा खेल घुड़सवारी और निशानेबाजी थी.
ऐसे शुरू हुई बाल दिवस मनाने की परंपरा
भारत की स्वतंत्रता में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का जन्म 14 नवंबर, 1889 को हुआ था. उनका निधन 27 मई, 1964 को हुआ. उनके निधन के बाद 14 नवंबर को हर साल उनकी याद में बाल दिवस के तौर पर मनाये जाने का फैसला लिया गया. इस फैसले का कारण चाचा नेहरू का बच्चों से के प्रति असीम प्यार और स्नेह था. 1964 के पहले तक हर साल 20 नवंबर को बाल दिवस मनाने की परंपरा थी, क्योंकि संयुक्त राष्ट्र की घोषणा के अनुरूप कई देशों में इसी दिन बाल दिवस मनाया जाता है. वहीं कई देशों में 1 जून को बाल दिवस के तौर पर मनाया जाता है.
14 नवंबर की तारीख में कुछ प्रमुख घटनाएं
1922 : ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने ब्रिटेन में रेडियो सेवा की शुरुआत की.
1935 : आधुनिक जार्डन के निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाने वाले शाह हुसैन का जन्म. उन्होंने 1953 से 1999 तक जार्डन पर शासन किया.
1948 : प्रिंस चार्ल्स का जन्म. वह महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और प्रिंस फिलिप के सबसे बड़े पुत्र हैं.
1969 : अपोलो-12 को प्रक्षेपित किया गया, जो तीन अंतरिक्षयात्रियों को लेकर आकाश की अनंत गहराइयों को पार करते हुए चंद्रमा पर पहुंचा था.
सर्दियों में चांद
सर्दी में क्यों ठिठुर रहे हो
नभ के चांद छबीले,
बीमार कहीं मत हो जाना-
नन्हे पथिक हठीले.
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