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दीपोत्सव: 26 को नरक चतुर्दर्शी, करें यम-तर्पण और दीपदान, 25-26 दोनों दिन करें धनतेरस की खरीदारी, जानें शुभ मुहूर्त

Updated at : 22 Oct 2019 8:22 AM (IST)
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दीपोत्सव: 26 को नरक चतुर्दर्शी, करें यम-तर्पण और दीपदान, 25-26 दोनों दिन करें धनतेरस की खरीदारी, जानें शुभ मुहूर्त

पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव की शुरुआत आज से तीसरे दिन शुक्रवार (25 अक्तूबर) को धनवंतरी जयंती (धनतेरस) से हो रही है. शास्त्रानुसार इस दिन आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था. माता लक्ष्मी भी अवतरित हुई थीं. इसलिए विशेष मुहूर्त में यह पूजा की जाती है. इससे धन-धान्य और आरोग्य […]

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पांच दिवसीय दीपावली महोत्सव की शुरुआत आज से तीसरे दिन शुक्रवार (25 अक्तूबर) को धनवंतरी जयंती (धनतेरस) से हो रही है. शास्त्रानुसार इस दिन आयुर्वेद के जनक धनवंतरी का जन्म समुद्र मंथन के दौरान हुआ था. माता लक्ष्मी भी अवतरित हुई थीं. इसलिए विशेष मुहूर्त में यह पूजा की जाती है. इससे धन-धान्य और आरोग्य की प्राप्ति होती है. दैवज्ञ पंडित श्रीपति त्रिपाठी के मुताबिक पूजन के लिए शुभ मुहूर्त 25 की शाम 5:12 से 6:00 बजे और शाम 6:24 से 8:22 बजे तक है. संध्या काल में यमदेव के निमित्त घर के बाहर दक्षिणाभिमुख होकर दीप प्रज्जवलित करने से अकाल मृत्यु का हरण होता है.

25-26 दोनों दिन करें धनतेरस की खरीदारी
शुभ मुहूर्त: पंडित त्रिपाठी ने बताया कि त्रयोदशी 25 अक्तूबर की शाम 04.31 बजे से प्रारंभ होकर 26 अक्तूबर की दोपहर 02.08 बजे तक रहेगी. इसलिए खरीददारी का शुभ मुहूर्त दोनों दिन रहेगा. शुक्रवार को शाम 06.55 से 08.50 बजे तक जबकि शनिवार को भी सुबह 08.05 बजे से 10.21 बजे तक खरीदारी हो सकेगी. स्थिर लग्न में 11.24 से 12.27 तक खरीदारी कर सकेंगे. वृष, सिंह, वृश्चिक, कुंभ स्थिर लग्न हैं.

26 को नरक चतुर्दर्शी, करें यम-तर्पण और दीपदान

कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि यानि शनिवार (26 अक्तूबर) को नरक चतुर्दशी है. इस दिन यम-तर्पण और दीपदान किया जाता है. यम-तर्पण के निमित्त संध्या काल में दक्षिण दिशा की ओर मुखकर जल, तिल और कुश लेकर दीपक प्रज्वलित किया जाता है. जबकि दीपदान में प्रदोष काल के समय तिल तेल भरे प्रज्वलित सुसज्जित 14 दीपक लेकर पूजन कक्ष, बाग-बगीचे, खेत-खलिहान, तुलसी चौरा, नजर निवास, गली, गौशाला व अन्य सूने स्थानों पर दीप प्रज्वलित किये जाते हैं. माना जाता है, ऐसा करने से यमराज संतुष्ट होते हैं.

शुभ दीपावाली 27 को :
कार्तिक अमावस्या के दिन रविवार (27 अक्तूबर) को दीपावली, लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजा, महाकाली पूजा है. पंडित श्रीपति त्रिपाठी के मुताबिक पूजन के लिए शुभ मुहूर्त संध्या 5:10 से 5:58, 6:16 से रात्रि 8:14 के बीच है. वहीं, लक्ष्मी-गणेश-कुबेर पूजन के विशिष्ट मुहूर्त रात्रि 12:44 से 2:55 बजे है. विशिष्ट मुहूर्त में कल-कारखाने, दफ्तर आदि में पूजा की जाती है. महानिशिथ काल में मां काली की पूजा होगी. इसके लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 11:04 से 11:52 बजे तक है.

अन्नकूट व गोवर्धन पूजा 28 को: सोमवार (28 अक्तूबर) को अन्नकूट, गोवर्धन पूजा है. इसके लिए शुभ मुहूर्त दिवा 9:45 से 10:03, दिवा 11:06 से 11:52, दोपहर 12:54 से संध्या 5:08 बजे तक है. शास्त्र के मुताबिक भगवान श्रीकृष्ण ने इंद्रदेव के दर्प दमन के लिए गोवर्धन की पूजा शुरू करवायी थी. आंगन में गोबर से गोवर्धन पर्वत बनाकर पूजन किया जाता है. नैवेद्य के रूप में विशेष व्यंजन अर्पण किये जाते हैं. गोवर्धन को गो दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. गौ व पशुधन को साफ कर विभिन्न प्रकार उसे सजाया जाता है. उनकी भी पूजा की जाती है.

भाई दूज व चित्रगुप्त पूजा 29 को : कार्तिक शुल्क पक्ष की द्वितीया तिथि यानि मंगलवार (29 अक्तूबर) को भाई दूज व चित्रगुप्त पूजा है. इस दिन बहन के घर जाकर भाई भोजन करते हैं. बहन को भेंट देते हैं. शास्त्रों में उल्लेख है कि यमदेव की बहन यमी (यमुना) ने इसी दिन यमदेव को बुलाकर हाथों से सुस्वाद भोजन करवाया था. यमदेव ने उसे वरदान दिये थे. इस दिन कायस्थ समाज के लोग भगवान चित्रगुप्त की पूजा भी करते हैं. यम द्वितीय, भ्राति द्वितीया व चित्रगुप्त पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दिवा 8:40 से दोपहर 12:54 बजे तक है.

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