इस दिवाली घर लाएं मिट्टी के गुल्लक, बच्चों को भी बताएं बचत के फायदे

By Prabhat Khabar Digital Desk
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आज के मिलेनियम युवा भविष्य की वित्तीय जरूरतों के प्रति सचेत और गंभीर नहीं हैं. वे इसके महत्व को नहीं जानते. ऐसा लगता है कि वे भविष्य की वित्तीय जरूरतों से बेखबर हैं.यह आप भी जानते हैं कि बढ़ती उम्र में जब आय के साधन सीमित हो जाते हैं या कहें खत्म हो जाते हैं, तो न्यूनतम जरूरतों को पूरा करने और जीवन शैली को बनाये रखने के लिए बढ़ते खर्च को पूरा करना मुश्किल होता है. इसलिए यह जरूरी है कि हम आप इस दीपावली के शुभ अवसर पर अपने बच्चों को शुरू से ही बचत और निवेश करना सीखाएं. इसके महत्व पर प्रकाश डालता पेश है आज का यह कल्पवृक्ष...
भारतीय परिवार में छोटी बचत का रिवाज बहुत पुराना है. लगभग हर घर में मिट्टी के गुल्लक होते थे और बच्चे उनमें पैसे जमा करते थे. यह चलन अब बहुत कम ही देखने को मिलता है. नयी पीढ़ी, जिसे मिलेनियम भी कहा जाता है, बचत और अपनी आर्थिक जिम्मेवारियों के प्रति लापरवाह दिखती है. यह भविष्य के लिए ज्यादा चिंतित नहीं रहती और आज में ही जीवन व्यतीत करने में विश्वास करती है.
तकनीक और सुविधाओं का इस्तेमाल करना युवाओं के स्वभाव में आ गया है जैसे बार-बार स्मार्टफोन बदलना, गाड़ियां बदलना, होटल-रेस्तरां में पार्टी करना, घर-परिवार की जिम्मेवारियों से बेखबर अपनी दुनिया में जीना. वेदांत एसेट्स के निदेशक ललित त्रिपाठी बताते हैं कि ऐसा इसलिए भी है, क्योंकि इस पीढ़ी को बचत करने या निवेश के बारे में ज्यादा न सोचते हैं और न विश्वास करते हैं.
यह गुल्लक वाली पीढ़ी नहीं है. इस पीढ़ी को नहीं पता कि भविष्य में इसे किन मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है. तेजी से बदलती हुई इस दुनिया में खुद के भविष्य के लिए कितनी आर्थिक तैयारी करनी है, इस पीढ़ी को नहीं पता. आज स्कूलों में प्लस टू के स्टूडेंट से बात करें, तो स्थिति का आभास होगा कि उन्हें बचत और निवेश बारे में कुछ भी नहीं पता और वे इसको लेकर गंभीर नहीं हैं. अगर आनेवाली पीढ़ी के भविष्य को सुखमय बनाना चाहते हैं, तो यह जरूरी है कि बच्चों में बचत करने की प्रवृत्ति को विकसित करना होगा, ताकि निवेश करने के तरीके को वे समझें.
छोटे बच्चों को गुल्लक से जोड़ें
कच्ची उम्र में ही बच्चों को बचत की आदत डालने के लिए सबसे बेहतर उपाय है उसके लिए मिट्टी के गुल्लक लाना. इस गुल्लक की खासियत होती है कि इसे बिना तोड़े जमा किये पैसे नहीं निकाले जा सकते. ये पर्यावरण के अनुकूल भी होते हैं और सस्ते भी.
एक-दो-पांच-दस रुपये के सिक्कों को जमा करते हुए कैसे एक बड़ी रकम तैयार की जा सकती है, बच्चों को यह तब पता चलता है जब गुल्लक को फोड़ने का समय आ जाता है. जमा किये हुए छोटे-छोटे पैसों से तैयार हुई बड़ी रकम को देख कर उनके अंदर की खुशी बाहर आ जाती है और फिर वे बड़ी गुल्लक की मांग करने लगते हैं. इन्हें निवेश के बारे में भी बताना चाहिए.
जन्मदिन के मौके को बनाएं अवसर
बच्चों के जन्मदिन के अवसर पर परिवार के कई सदस्य उपहार स्वरूप पैसे देते हैं. आप भी बच्चे के जन्मदिन को धूमधाम से मनाते हैं. बच्चों के जन्मदिन में मिले हुए उनके पैसों का एकमुश्त निवेश शुरू कर दें. जैसे इक्विटी या म्यूचुअल फंड में. या फिर इनके जन्मदिन पर एक एसआइपी शुरू कर दें. हर साल जन्म दिन पर पैसे जमा करते जायें. 15 साल की लंबी अवधि में यही छोटी-छोटी रकम इतनी बड़ी पूंजी बन जायेगी कि आपको बच्चों के उच्च शिक्षा या अन्य खर्च को आसानी से पूरा करने में मदद होगी. साथ ही बच्चों को बचत और निवेश की जानकारी होगी.
किशोरों को जरूर दें निवेश की जानकारी
बच्चों को बचत के साथ-साथ निवेश की भी जानकारी देना जरूरी है. किशोरावस्था में जब उनके मन में तेजी से नये कदम उठाने दुनिया को अपनी नजर से देखने और समझने का प्रयास तेज पकड़ने लगता है, तो उसी समय उनको आर्थिक दुनिया की आधारभूत जानकारी भी उपलब्ध करा देनी चाहिए. उन्हें पावर ऑफ कंपाउंडिंग की जानकारी देनी चाहिए. उनके ही नाम पर या उनके हाथों निवेश कराना शुरू कर देना चाहिए. फुरर्सत के क्षण उनसे इस विषय पर विचार विमर्श करते हुए उन्हें निवेश की बारिकीयों के बारे में जरूर बताना चाहिए ताकि वे भी आपके निर्णय को समझ पायें कि बचत और निवेश कितना महत्वपूर्ण है.
लाइफ और हेल्थ इंश्योरेंस की जानकारी जरूर दें
जीवन के रास्ते में कब कौन-सी घटना घटेगी, इसका कोई पूर्वानुमान नहीं कर सकता. यानी आप कब बीमार पड़ जायेंगे और उस बीमारी के इलाज में कितना खर्च होगा, इसका अनुमान लगाना संभव नहीं है. जीवन के किस मोड़ पर कौन-सी अप्रत्याशित घटना हो जाए, यह भी नहीं कहा जा सकता और फिर परिवार के सदस्यों के लिए आप कुछ कर नहीं पायेंगे. इन सबका समाधान है इंश्योरेंस यानी बीमा. जीवन बीमा के साथ-साथ स्वास्थ्य बीमा आज की जरूरत बन चुका है. समय के साथ इलाज का खर्च भी बढ़ता जा रहा है. बच्चों को बतायें कि वे अपने और पूरे परिवार का हेल्थ इंश्योरेंस जरूर कराएं.
नौकरी शुरू करते ही उठाएं कदम
कैरियर की शुरुआत करते ही बच्चों से निवेश करवाना शुरू करा दें. आप उस दौर से गुजर चुके होते हैं, इसलिए अपने अनुभव के अनुसार छोटी अवधि, मध्यम अवधि और लंबी अवधि के लक्ष्यों को लेकर निवेश शुरू करवाना चाहिए.
यही उम्र है, जब उन्हें बाजार की जोखिमों की भी जानकारी जरूर दी जानी चाहिए. उन्हें बताया जाना चाहिए कि ऐसी लापरवाही न बरतें कि ज्यादा लालच में आकर खुद का नुकसान न उठाना पड़े. इक्विटी, डेब्ट, बैंक, पोस्ट ऑफिस, बॉन्ड आदि की जानकारी जरूर विस्तार से दें. अगर आप खुद इसमें सक्षम नहीं हैं, तो किसी स्थापित वित्तीय सलाहकार से बात करवाएं. बच्चों में जितनी जल्दी इन सभी की जानकारी होगी, वे उतना बेहतर निवेश विकल्प अपनी जोखिम क्षमता के अनुसार चुन सकेंगे.
मुद्रास्फीति को देखते हुए उनके रिटायरमेंट के समय उन्हें कितनी पूंजी की जरूरत होगी, इस पर विस्तार से चर्चा जरूर करनी चाहिए.
वित्तीय लक्ष्य निर्धारित करना सिखाएं
किशोरावस्था के दौरान ही बच्चों को उनकी आर्थिक जरूरतों के विषय में जरूर बतायें और उस पर उनसे चर्चा भी करें. उन्हें परिवार की पूरी आय-व्यय की जानकारी भी दें. मासिक खर्च के अलावे कई अन्य त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और वार्षिक खर्च होते हैं. परिवार के लिए इमरजेंसी फंड भी जरूरी होता है और उसमें कितनी रकम रखी जा सकती है. इन सब की जानकारी देते हुए अन्य वित्तीय लक्ष्यों की भी जानकारी जरूर दें. साथ ही बताएं कि छोटी बचत कर वे कैसे इन वित्तीय लक्ष्यों को पूरा कर सकते हैं.
बेहिसाब खर्च करने से रोकें
बार-बार फोन बदलने या आकर्षक गाड़ी के लिए मनमानी कीमत चुकाने के लिए तत्पर रहने जैसी खर्चीली प्रवृत्ति को रोकना भी बड़ी बचत है.
कर बचत के उपायों को बताएं
बच्चे जब नयी नौकरी में जाते हैं और कमाने लगते हैं तो उनमें अधिक खर्च करने की प्रवृत्ति विकसित हो जाती है, क्योंकि उस समय उनके ऊपर परिवार की कोई जिम्मेदारी का बोझ नहीं होती. उन्हें नहीं पता होता कि आयकर विभाग द्वारा दिये गये कई विकल्पों से वे अपने आयकर को बचा सकते हैं. इसलिए यह सही समय होता है जब आप उन्हें आयकर बचाने के विभिन्न विकल्पों की भी जानकारी प्रदान करें.
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