वर्षांत 2018 : सुधरा स्वास्थ्य व शिक्षा का हाल

Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 25 Dec 2018 6:31 AM

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स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर ही किसी देश के विकास की वास्तविक बुनियाद टिकी होती है तथा इनकी उपलब्धता और गुणवत्ता ही नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने व सुचारू ढंग से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. वर्ष 2018 में भारत ने शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई अहम पड़ाव पार किये हैं, वहीं […]

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स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर ही किसी देश के विकास की वास्तविक बुनियाद टिकी होती है तथा इनकी उपलब्धता और गुणवत्ता ही नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने व सुचारू ढंग से चलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. वर्ष 2018 में भारत ने शिक्षा व स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई अहम पड़ाव पार किये हैं, वहीं कई चुनौतियां अभी बरकरार हैं, जिनसे हमें पार पाना है. गुजरते साल, देश में स्वास्थ्य एवं शिक्षा की स्थिति पर आधारित आज की विशेष प्रस्तुति…
स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति
ग्यारह हजार लोगों पर औसतन एक सरकारी एलोपैथिक डॉक्टर
स्वास्थ्य से जुड़े जरूरी मानव संसाधनों की उपलब्धता किसी भी देश केनागरिकों को स्वस्थ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है. इन संसाधनों की पर्याप्त संख्या में प्रसार ही स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाता है.
लेकिन, भारत जैसे अनेक विकासशील देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मानव संसाधनों की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है. शोध पत्रिका ‘द लैंसेट’ की रिपोर्ट के अनुसार, भारत स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता के मामले में 195 देशों की सूची में 145वें स्थान पर है. आइए, जानते हैं, हमारे देश में डॉक्टर, नर्सिंग प्रोफेशन व पैरामेडिकल प्रोफेशन समेत अन्य स्वास्थ्य क्षेत्रों में क्या स्थिति है, मानव संसाधनों की.
उच्च शिक्षा पर एआईएसएचई 2017-18 की रिपोर्ट
903 विश्वविद्यालय, 39,050 कॉलेज व 10,011 स्टैंड-अलोन इंस्टीट्यूशन हैं देश भर में.
343 विश्वविद्यालय निजी हैं, जबकि 357 विश्वविद्यालय ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं.
15 विश्वविद्यालय केवल महिलाओं के लिए हैं, जिनमें राजस्थान में चार, तमिलनाडु में दो व आंध्र प्रदेश, असम, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, ओड़िशा, उत्तराखंड व पश्चिम बंगाल में एक-एक हैं.
1 केंद्रीय ओपेन विश्वविद्यालय, 14 राज्य खुला विश्वविद्यालय और 1 राज्य निजी ओपेन विश्वविद्यालय, 110 ऐसे विश्वविद्यालय हैं, जो दूरस्थ शिक्षा (डुअल मोड) भी उपलब्ध कराते हैं, इनमें सर्वाधिक (16) तमिलनाडु में स्थित हैं.
500 सामान्य, 126 तकनीकी, 70 कृषि व अलाइड, 58 मेडिकल, 22 लॉ, 13 संस्कृत व 10 भाषा विश्वविद्यालय और 83 अन्य श्रेणियों के विश्वविद्यालय हैं देश में.
8 राज्यों में कॉलेजों की सर्वाधिक संख्या है. इन राज्यों में उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात व मध्य प्रदेश शामिल हैं.
18-23 आयु वर्ग के प्रति एक लाख जनसंख्या पर जहां बिहार में कॉलेजों की संख्या महज 7 है, वहीं कर्नाटक व तेलंगाना में इसकी संख्या 51 है, जबकि इसका अखिल भारतीय औसत 28 है.
60.48 प्रतिशत कॉलेज शहरी क्षेत्रों में स्थित हैं, वहीं 11.04 प्रतिशत कॉलेज केवल महिलाओं के लिए हैं.
3.6 प्रतिशत कॉलेजों में पीएचडी प्रोग्राम और 36.7 प्रतिशत कॉलेज परास्नातक स्तर के प्रोग्राम संचालित करते हैं.
78 प्रतिशत कॉलेज निजी तौर पर संचालित होते हैं, जिनमें 64.7 प्रतिशत कॉलेज अनुदान रहित हैं, जबकि 13.3 प्रतिशत को अनुदान मिलता है.
12,84,755 शिक्षकों की कुल संख्या है देशभर में, जिनमें 58 प्रतिशत शिक्षक पुरुष व 42 प्रतिशत महिलायें हैं.
30 है विद्यार्थी-शिक्षक अनुपात विश्वविद्यालयों व कॉलेजों में देशभर में.
18.5 प्रतिशत कॉलेजों में 100 से भी कम विद्यार्थी हैं, जबकि 3.6 प्रतिशत कॉलेजों में 3,000 से अधिक विद्यार्थी हैं.
3.66 करोड़ अनुमानित नामांकन हुआ है उच्च शिक्षा में, जिनमें 1.92 करोड़ लड़के व 1.74 करोड़ लड़कियां हैं. इस प्रकार उच्च शिक्षा में लड़कियों का कुल प्रतिशत 47.6 है.
79.2 प्रतिशत विद्यार्थियों ने स्नातक स्तर प्रोग्राम में दाखिला लिया है, जबकि पीएचडी में इसका प्रतिशत महज 0.5 (कुल 1,61,412 विद्यार्थी) है.
17,982 मान्यताप्राप्त एलोपैथिक डॉक्टर थे वर्ष 2017 में, जबकि 2016 में इनकी संख्या 25,282 थी. वर्तमान में 11,039 लोगों पर एक सरकारी एलोपैथिक डॉक्टर हैं.
2,51,207 मान्यताप्राप्त डेंटल सर्जन थे वर्ष 2017 में 2016 के 1,97,734 के मुकाबले.
7,73,668 पंजीकृत आयुष चिकित्सक थे 2017 में और 2016 में इनकी संख्या 7,71,468 थी.
55.44 प्रतिशत आयुर्वेदिक व 36.77 प्रतिशत होम्योपैथिक डॉक्टर आयुष के तहत पंजीकृत थे वर्ष 2017 में.
8,41,279 ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ यानी एएनएम थीं देश में 31 दिसंबर, 2016 तक.
19,80,536 पंजीकृत नर्स व मिडवाइफ और 56,367 लेडी हेल्थ विजिटर कार्यरत थीं देशभर में 31 दिसंबर, 2016 तक.
9,07,132 फार्मासिस्ट थे देशभर में 13 नवंबर, 2017 तक देशभर में.
स्रोत : नेशनल हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट 2018
ग्रामीण क्षेत्र में मानव संसाधन
27,124 थी प्राइमरी हेल्थ सेंटरों में डॉक्टरों की संख्या.
4,156 कुल विशेषज्ञ थे कम्युनिटी हेल्थ सेंटर में.
12,228 पुरुष स्वास्थ्य सहायक व 14,267 लेडी हेल्थ विजिटर की संख्या थी.
56,263 पुरुष स्वास्थ्यकर्मी व 2,20,707 एएनएम थीं.
80 प्रतिशत से अधिक रहा प्राथमिक शिक्षा में नामांकन औसत
(नेट एनरॉलमेंट रेशियो के आधार पर)
बच्चों के भविष्य निर्माण में शिक्षा की भूमिका महत्वपूर्ण है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद देश में प्राथमिक शिक्षा की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है.
88.08 प्रतिशत था नामांकन औसत प्राथमिक शिक्षा (कक्षा एक से पांच) में, जिनमें 87.02 प्रतिशत लड़के और 89.26 प्रतिशत लड़कियां थीं.
70.20 फीसदी रही उच्च प्राथमिक शिक्षा (कक्षा 6-8) में कुल नामांकन औसत, लड़कों का प्रतिशत 67.82 व लड़कियों का 72.89.
88.31 फीसदी रहा प्रारंभिक शिक्षा (8वीं तक) में नामांकन औसत, जिनमें लड़के 86.57 व लड़कियां 90.26 प्रतिशत थीं.
स्रोत : एमएचआरडी वअन्य (वर्ष 2015-16)
सरकार द्वारा स्वास्थ्य मद में किया जाने वाला खर्च
वर्ष कुल खर्च प्रति व्यक्ति खर्च जीडीपी का प्रतिशत
(करोड़ रुपये में) (रुपये में)
2015-16 140054.55 1112 1.02
2016-17(आरई) 178875.63 1397 1.17
2017-18(बीई) 213719.58 1657 1.28
(आरई : रिवाइज्ड एस्टीमेट, बीई : बजट इस्टीमेट)
स्रोत : स्वास्थ्य मंत्रालय व परिवार कल्याण मंत्रालय व अन्य
स्रोत : नेशनल हेल्थ प्रोफाइल रिपोर्ट 2018
शिक्षा के लिए 85,010 करोड़
शिक्षा क्षेत्र के लिए (वर्ष 2018-19 के लिए) सरकार ने 85,010 करोड़ रुपये का आवंटन किया है, जो वित्त वर्ष 2017-18 के 81,869 करोड़ रुपये से महज 3.8 प्रतिशत ही अधिक है. 2018-19 के लिए आवंटित राशि में 50,000 करोड़ रुपये स्कूली शिक्षा व साक्षरता और 35,010 करोड़ रुपये उच्च शिक्षा के लिए रखा गया है.
इस आवंटित राशि में अगर उच्च शिक्षा के हिस्से की बात करें, तो पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष की राशि में 148 करोड़ रुपये का ही इजाफा किया गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में महज 0.4 प्रतिशत ही ज्यादा है. वहीं स्कूली शिक्षा में पिछले वर्ष की तुलना में 6.4 प्रतिशत की वृद्धि की गयी है.
स्रोत : मानव संसाधन मंत्रालय, 2018-19, पीआरएस
स्कूलों में विद्यार्थी-शिक्षक औसत
देशभर के प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 26,06,120 थी वर्ष 2015-16 में, इस प्रकार इस अवधि में विद्यार्थी-शिक्षक औसत (पीटीआर) 23 रहा. वहीं इसी अवधि में उच्च प्राथमिक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 26,12,347 व पीटीआर 17 रहा. माध्यमिक स्कूलों में 14,31,591 शिक्षक व पीटीआर 27 रहा इस अवधि में. वहीं उच्च माध्यमिक स्कूलों में शिक्षकों की संख्या 20,41,864 रही इस वर्ष, जबकि पीटीआर 37 रहा.
स्रोत : नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशनल प्लानिंग
एंड एडमिनिस्ट्रेशन, नयी दिल्ली
आयुष्मान भारत- राष्ट्रीय स्वास्थ्य संरक्षण अभियान
केंद्र सरकार द्वारा इस वर्ष शुरू की गयी दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना ‘आयुष्मान भारत’ के तहत करीब 10 करोड़ परिवारों को सालाना 5 लाख रुपये का मेडिकल कवर दिया जायेगा. इस योजना का लाभ देश की 40 फीसदी आबादी, यानी 50 करोड़ लोगों को मिलेगा.
कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने वाली इस योजना में केंद्र सरकार 60 प्रतिशत का अंशदान करेगी, जबकि पूर्वोत्तर और तीन पहाड़ी राज्यों में केंद्र का योगदान 90 फीसदी होगा. केंद्र शासित प्रदेशों में इस योजना का पूरा भार केंद्र सरकार वहन करेगी.
स्वास्थ्य संबंधी आधारभूत संरचनाओं में तेज प्रगति
स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं की सही देखभाल के लिए यह जरूरी है कि देश में स्वास्थ्य से जुड़ी आधारभूत संरचनाएं चुस्त-दुरुस्त हों, क्योंकि इन्हीं की बदौलत चिकित्सा सेवा आगे बढ़ती है. यह बेहद सुखद है कि हमारे देश में मेडिकल शिक्षा से जुड़ी आधारभूत संरचना बीते 26 वर्षों से तेज प्रगति की ओर अग्रसर है.
476 मेडिकल कॉलेज, बीडीएस के लिए 313 और एमडीएस के लिए 249 डेंटल कॉलेज थे देश भर में 2017-18 के दौरान.
52,646 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया देशभर के 462 मेडिकल कॉलेजों में, जबकि 27,060 विद्यार्थियों ने बीडीएस और 6,233 ने एमडीएस कोर्स में प्रवेश लिया 2017-18 में.
3,215 नर्सिंग इंस्टीट्यूट थे देशभर में, जहां से प्रतिवर्ष 1,29,926 जनरल नर्स मिडवाइफ तैयार हो रहे हैं, जबकि 96,475 विद्यार्थियों की क्षमता के साथ 1,936 बीएससी नर्सिंग कॉलेज व 12,617 की क्षमता के साथ 643 एमएससी नर्सिंग कॉलेज और 46,795 विद्यार्थियों की प्रवेश क्षमता के साथ 777 फॉर्मेसी (डिप्लोमा) कॉलेज थे हमारे देश में 31 अक्तूबर, 2017 तक.
7,10,761 बेड के साथ 23,582 अस्पताल हैं देशभर में, जिनमें 2,79,588 बेड के साथ 19,810 अस्पताल ग्रामीण क्षेत्र में और 4,31,173 बेड के साथ 3,772 अस्पताल हैं शहरी क्षेत्र में.
27,698 आयुष डिस्पेंसरी व 3,943 अस्पताल थे 1 अप्रैल, 2017 तक देशभर में.
1,56,231 उप-केंद्र, 25,650 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 5,624 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र थे हमारे देश में 31 मार्च, 2017 तक.
स्रोत : भारतीय चिकित्सा परिषद्, दंत चिकित्सा परिषद्, नर्सिंग परिषद् व फॉर्मेसी परिषद्
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