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भारत-पाक युद्ध विजय दिवस आज : सिर्फ 13 दिन में हार गया था पाक, 93 हजार सैनिकों ने किया था सरेंडर, तब बना बांग्लादेश

Updated at : 16 Dec 2018 7:18 AM (IST)
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भारत-पाक युद्ध विजय दिवस आज : सिर्फ 13 दिन में हार गया था पाक, 93 हजार सैनिकों ने किया था सरेंडर, तब बना बांग्लादेश

1971 में जनरल अरोड़ा के समक्ष पाक के 93 हजार सैनिकों ने किया था सरेंडर 16 दिसंबर यानी विजय दिवस. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में आज ही के दिन पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े थे. भारत के जांबाज जवानों की बदौलत ही पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश के रूप में नया देश बना था. महज […]

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1971 में जनरल अरोड़ा के समक्ष पाक के 93 हजार सैनिकों ने किया था सरेंडर
16 दिसंबर यानी विजय दिवस. 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में आज ही के दिन पाकिस्तान को घुटने टेकने पड़े थे. भारत के जांबाज जवानों की बदौलत ही पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश के रूप में नया देश बना था. महज 13 दिन की लड़ाई में भारत ने पाकिस्तान को वह पटखनी दी कि आज भी सिर उठाने से डरता है.
इस युद्ध में 3900 भारतीय सैनिक शहीद हो गये थे और 9851 सैनिक घायल हुए थे, लेकिन सैनिकों के शौर्य का ही परिणाम था कि पाकिस्तान के लेफ्टिनेंट जनरल एके नियाजी ने अपने करीब 93 हजार सैनिकों के साथ भारत के लेफ्टिनेंट जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा के समक्ष सरेंडर कर हथियार डाल दिये थे. जनरल नियाजी के सरेंडर करने के साथ ही यह युद्ध भी समाप्त हो गया था. इस युद्ध की शुरुआत तीन दिसंबर, 1971 को हुई थी.
पाकिस्तान में 1970 का चुनाव बांग्लादेश के अस्तित्व के लिए काफी अहम साबित हुआ. इस चुनाव में मुजीबुर रहमान की पार्टी पूर्वी पाकिस्तान अवामी लीग ने जबर्दस्त जीत हासिल की. लेकिन, पाकिस्तान के सैन्य शासन को यह गवारा नहीं हुआ कि मुजीब पाकिस्तान पर शासन करें. मार्च, 1971 में पाकिस्तानी सेना ने क्रूरतापूर्वक अभियान शुरू किया. मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया.
मार्च, 1971 के अंत में भारत सरकार ने मुक्तिवाहिनी की मदद करने का फैसला लिया. मुक्तिवाहिनी दरअसल पाकिस्तान से बांग्लादेश को आजाद कराने वाली पूर्वी पाकिस्तान की सेना थी. मुक्तिवाहिनी में पूर्वी पाकिस्तान के सैनिक और हजारों नागरिक शामिल थे. 29 जुलाई, 1971 को भारतीय संसद में सार्वजनिक रूप से मुक्तिवाहिनी की मदद करने की घोषणा की गयी. भारतीय सेना ने अपनी तरफ से तैयारी शुरू कर दी. अक्तूबर-नवंबर, 1971 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और उनके सलाहकारों ने यूरोप और अमेरिका का दौरा किया.
इस संबंध में तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन से बात की. निक्सन ने मुजीबुर रहमान की रिहाई के लिए कुछ भी करने से हाथ खड़ा कर दिया. इसके बाद 23 नवंबर, 1971 को पाकिस्तान के राष्ट्रपति याहया खान ने अपनी सेना को युद्ध के लिए तैयार रहने को कहा. तीन दिसंबर, 1971 को पाकिस्तान की वायुसेना ने भारत पर हमला कर दिया. भारत के अमृतसर और आगरा समेत कई शहरों को निशाना बनाया. साथ ही 1971 के भारत-पाक युद्ध की शुरुआत हो गयी.
इस युद्ध में इन्होंने निभायी थी बड़ी भूमिका
1971 के भारत-पाक युद्ध के दौरान सेनाध्यक्ष सैम मानेकशॉ ने मुख्य भूमिका निभायी थी. उनके ही नेतृत्व में भारत ने पाकिस्तान को बुरी तरह से पराजित किया था. वहीं, जनरल जगजीत सिंह अरोड़ा की रणनीति के कारण पाकिस्तान के सेनानायक ले जनरल नियाजी ने 93 हजार सैनिकों के साथ सरेंडर कर दिया था. मेजर होशियार सिंह ने भी अपने जज्बे से पाक सेना को पराजित करने में बड़ी भूमिका निभायी थी. उन्होंने अपने शौर्य का प्रदर्शन करते हुए जरवाल का मोर्चा फतह किया था. लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल परमवीर चक्र पाने वाले भारतीय जांबाजों में से एक थे. उन्हें यह सम्मान 1971 में मरणोपरांत मिला. झारखंड (तब बिहार) निवासी लांस नायक अल्बर्ट एक्का ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपनी बटालियन के सैनिकों की रक्षा की थी. इस दौरान वह गंभीर रूप से घायल हो गये थे और अस्पताल में उनका निधन हो गया. सरकार ने उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया.
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