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एनएसएसी में करें निवेश, फायदा ज्यादा, बैंक से तेज बढ़ेगा पैसा और बचेगा टैक्स

Updated at : 08 Oct 2018 6:32 AM (IST)
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एनएसएसी में करें निवेश, फायदा ज्यादा, बैंक से तेज बढ़ेगा पैसा और बचेगा टैक्स

अगर आप अपनी बचत को कहीं ऐसी जगह निवेश करने का मन बना रहे हैं, जहां फायदा ज्यादा मिले और टैक्स भी बचे, तो नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) एक बेहतर विकल्प हो सकता है. अब इसी महीने से एनएससी में निवेश करना पहले से ज्यादा फायदेमंद हो गया है. केंद्र सरकार ने पहली अक्तूबर से […]

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अगर आप अपनी बचत को कहीं ऐसी जगह निवेश करने का मन बना रहे हैं, जहां फायदा ज्यादा मिले और टैक्स भी बचे, तो नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (एनएससी) एक बेहतर विकल्प हो सकता है.
अब इसी महीने से एनएससी में निवेश करना पहले से ज्यादा फायदेमंद हो गया है. केंद्र सरकार ने पहली अक्तूबर से पांच साल की एनएससी पर मिलनेवाले ब्याज की दर को 7.6 फीसदी से बढ़ाकर आठ फीसदी कर दिया है. इतना ब्याज अभी किसी प्रमुख बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट पर नहीं मिल रहा है.
बैंक के एफडी से ज्यादा ब्याज
एनएससी में ब्याज दर पहली अक्तूबर से आठ फीसदी सालाना हो गयी है. पहले यह 7.6 फीसदी थी. ब्याज सालाना कंपाउंडिंग के हिसाब से लगेगा, जो स्कीम के मैच्युरिटी पर मूलधन के साथ जोड़कर मिलेगा. वहीं, प्रमुख बैंकों में एफडी पर चार फीसदी से 7.75 फीसदी तक ही ब्याज मिल रहे हैं.
कैसे कर सकते हैं निवेश
पोस्ट ऑफिस के एनएससी स्कीम के तहत निवेश की कुल अवधि पांच साल है. इस स्कीम के तहत खाता कम-से-कम 100 रुपये से खुलता है. वहीं, इसमें निवेश की अधिकतम सीमा तय नहीं है. यानी स्कीम में आप जितना चाहें, उतने पैसे जमा कर सकते हैं, जो 100 के गुणक में हों.
देशभर में पोस्ट ऑफिस की किसी भी शाखा में इसे शुरू किया जा सकता है. कोई भी व्यक्ति अपने या अपने बच्चे के नाम से खरीद सकता है. एनएसएसी में 100, 500, 1000, 5000, 10,000 या इससे ज्यादा के सर्टिफिकेट मिलते हैं. अपनी क्षमता के मुताबिक कि‍तनी भी धनराशि का एनएससी खरीद सकते हैं.
इनकम टैक्स में छूट
एनएसएसी में निवेश करने पर आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट मिलती है. हालांकि यह छूट 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर ही मिलती है.
उदाहरण से समझें : पहले से ज्यादा फायदा कैसे
पहले एनएससी पर 7.6 फीसदी सालाना (कंपाउंडिंग) ब्याज था. इस हिसाब से अगर योजना में पांच लाख रुपये का निवेश किया गया हो, तो मैच्युरिटी पर कुल 7.21 लाख रुपये प्राप्त होते, यानी करीब 2.21 लाख रुपये का ब्याज मिलता.
वहीं, अब योजना में आठ फीसदी सालाना (कंपाउंडिंग) ब्याज दर बनी रही, तो इसी निवेश पर मेच्यूरिटी के समय कुल करीब 7.35 लाख रुपये मिलेंगे, यानी 2.34 लाख रुपये का ब्याज प्राप्त होगा. वैसे सरकार ब्याज दर को हर तीन महीने पर रिवाइज करती है.
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