....जब बस कंडक्टर के लिए बागुन दा ने गिरा दी थी सरकार
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Jun 2018 4:50 AM (IST)
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जमशेदपुर : जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी काे 20 जून 1963 काे कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया. व्यापक जन समर्थन प्राप्त आैर झारखंडी जनता द्वारा मरांग गाेमके के रूप में पूजे जानेवाले जयपाल सिंह के एकाएक अपना मार्ग बदल लेने से झारखंड में एक राजनीतिक शून्यता पैदा हाे गयी. झारखंडी जनता आैर झारखंडी राजनीति […]
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जमशेदपुर : जयपाल सिंह ने झारखंड पार्टी काे 20 जून 1963 काे कांग्रेस पार्टी में विलय कर दिया. व्यापक जन समर्थन प्राप्त आैर झारखंडी जनता द्वारा मरांग गाेमके के रूप में पूजे जानेवाले जयपाल सिंह के एकाएक अपना मार्ग बदल लेने से झारखंड में एक राजनीतिक शून्यता पैदा हाे गयी. झारखंडी जनता आैर झारखंडी राजनीति में सन्नाटा सा छा गया. झारखंडी अलग राज्य की आवाज थम गयी थी.
उस वक्त बागुन दा आगे आये आैर उन्हाेंने झारखंड अलग राज्य आंदाेलन काे आगे बढ़ाया आैर कमी की भरपाई की. बागुन दा एक साधु के भेष में झारखंड राज्य का स्वरूप आैर झारखंडियाें की पीड़ा व व्यथा का समाधान के लिए एक देवदूत की तरह प्रकट हुए आैर एक आदरणीय एवं सम्मानित नेता के रूप में स्थापित हुए. यह एक युग की समाप्ति आैर एक नये युग के प्रारंभ का शंखनाद था. झारखंड पार्टी का कांग्रेस में विलय हाेने के बाद कुछ लाेगाें ने मिलजुल कर पार्टी के पुनर्गठन का भागीरथ प्रयास शुरू कर दिया, जिसमें बागुन सुंबरुई की भी प्रमुख भूमिका थी.
झारखंड पार्टी का पुनर्गठन करने के लिए आेड़िशा के सुंदरगढ़ जिला अंतर्गत बीरमित्रापुर में 27-29 सितंबर 1963 काे एक महाधिवेशन हुआ, जिसमें झारखंड पार्टी के पुनर्गठन का प्रस्ताव पारित करते हुए लाल हरिहर नाथ शाहदेव काे पार्टी का अध्यक्ष चुना गया. बागुन सुंबरुई पार्टी के केंद्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य चुने गये आैर उन्हें सिंहभूम जिला का अध्यक्ष भी मनाेनीत किया गया.
बागुन सुम्बरुई का राजनीति में उदय : प्रत्येक वर्ष खरसावां गाेलीकांड के शहीदाें की स्मृति में शहीद दिवस का आयाेजन किया जाता है, लेकिन 1 जनवरी 1964 काे शहीद दिवस मानने के लिए दाे अलग-अलग मंच तैयार किये गये.
एक आेर जयपाल सिंह के नेतृत्व में सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी ने एक सरकारी मंच बनाया, जिसमें बिहार के मुख्यमंत्री कृष्णबल्लभ सहाय, जयपाल सिंह आैर कई कांग्रेसी नेता शामिल हुए. इस सरकारी सभा में भीड़ नहीं जुट पायी, जबकि कुछ ही दूरी पर आयाेजित पुनर्गठित झारखंड पार्टी के सिंहभूम जिलाध्यक्ष बागुन सुंबरुई की सभा में अभूतपूर्व भीड़ उमड़ पड़ी.
शहीद दिवस का आयाेजन कांग्रेस पार्टी के पाले गये जयपाल सिंह के व्यक्तित्व छवि आैर झारखंड समर्थन की बात करनेवाले बागुन सुंबरुई के बीच एक अघाेषित युद्ध साबित हुआ. जीत बागुन की हुई.
खरसावां शहीद दिवस के इस आयाेजन से झारखंड की राजनीति में काले बादल छंट गये आैर झारखंडी राजनीति के क्षीतिज पर एक नये स्फूर्तिवान नेता के रूप में बागुन सुंबरुई का उदय हुआ और अखिल भारतीय झारखंड पार्टी एक राजनीतिक दल के रूप में सामने आयी. 1969 में बिहार विधानसभा के मध्यावधि चुनाव में बागुन सुंबरुई के शक्ति परीक्षण का एक महत्वपूर्ण अध्याय था. मरांग गाेमके जयपाल सिंह के करिश्माई नेतृत्व काे चुनाैती देना था. जनता ने अखिल भारतीय झारखंड पार्टी काे 11 विधानसभा सीट में जीत दिलायी.
चुनाव में बिहार के किसी भी राजनीतिक दल काे बहुमत प्राप्त नहीं हुआ. 26 फरवरी 1969 काे सरदार हरिहर सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी की सरकार बनी. इसके पूर्व बागुन ने हरिहर सिंह काे एक पत्र लिखकर कुछ शर्त्ताें के साथ समर्थन देने की स्वीकृति दी. बागुन सुंबरुई ने कहा कि वह खुद मंत्रिमंडल में शामिल नहीं होंगे. उनकी अनुशंसा पर एनइ हाेराे काे शिक्षा आैर मनाेहरपुर के विधायक रत्नाकर नायक काे राज्यमंत्री बनया गया.
इसी बीच 20 मार्च 1970 काे जयपाल सिंह की मृत्यु से खूंटी लाेकसभा सीट खाली हाे गयी. 31 मई 1970 काे हुए उपचुनाव में खूंटी लाेकसभा सीट से अखिल भारतीय झारखंड पार्टी का प्रत्याशी एनइ हाेराे चुनाव जीत कर संसद पहुंच गये. सरदार हरिहर सिंह की सराकर ज्यादा दिनाें तक नहीं चली, करीब 12 माह में सरकार गिर गयी. इसके बाद दाराेगा प्रसाद राय 16 फरवरी 1970 काे मुख्यमंत्री बनाया गया.
सरकार काफी अच्छे ढंग से चल रही थी. इसी बीच बिहार सराकर के ट्रांसपाेर्ट विभाग में काम करनेवाले एक आदिवासी कर्मचारी का मामला सामने आया. वह नाैकरी से निलंबित था. उनका निलंबन वापस करने के लिए बागुन सुंबरुई मुख्यमंत्री दाराेगा प्रसाद राय से दाे बार मिले, अनुराेध किया, लेकिन उन्हाेंने बाताें काे अनसुना कर दिया.
दाराेगा प्रसाद राय के इस व्यवहार से बागुन सुंबरुई दुखित हुए आैर सरकार से समर्थन वापस ले लिया, जिसके कारण सरकार गिर गयी. पुन: बागुन सुंबरुई के समर्थन से कर्पूरी ठाकुर ने 22 दिसंबर 1970 काे सरकार बनायी. इस सरकार ने बागुन सुंबरुई काे मंत्री (वन कल्याण के अलावा परिवहन) बनाया. बागुन सुंबरुई ने फिर से उस निलंबित बस कंडक्टर का निलंबन वापस ले लिया.
(जैसा झारखंड आंदाेलनकारी सह पूर्व सांसद शैलेंद्र महताे ने बताया)
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