घर में सुख-शांति लाता है संकष्टी चतुर्थी व्रत
Updated at : 03 Feb 2018 6:31 AM (IST)
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संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरनेवाली चतुर्थी. इस दिन सभी दुखों को हरनेवाले गणेश जी का पूजन किया जाता है. गौरी पुत्र गणेश जी के लिए व्रत रखा जाता है और पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है. हर माह में दो बार संकष्टी चतुर्थी मनायी जाती है. पूर्णिमा के बाद आनेवाली चतुर्थी […]
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संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है संकट को हरनेवाली चतुर्थी. इस दिन सभी दुखों को हरनेवाले गणेश जी का पूजन किया जाता है. गौरी पुत्र गणेश जी के लिए व्रत रखा जाता है और पूरे विधि-विधान से पूजा-पाठ किया जाता है. हर माह में दो बार संकष्टी चतुर्थी मनायी जाती है.
पूर्णिमा के बाद आनेवाली चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी कहा जाता है और अमावस्या के बाद आनेवाली चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहा जाता है. अगर यह चतुर्थी मंगलवार को पड़े, तो इसे अंगारकी चतुर्थी कहते हैं.
वहीं, माघ माह की पूर्णिमा के बाद आनेवाली चतुर्थी को बहुत शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन गणेश जी की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है. सूरज उगने से पहले स्नान कर पूजा करें और व्रत रखें. पूजा के दौरान एक विशेष मंत्र का जाप करने से घर में आ रही विपदाओं को गणेश जी हर लेते हैं. यह मंत्र है –
गजाननं भूत गणादि सेवितं, कपित्थ जम्बू फल चारू भक्षणम्।
उमासुतं शोक विनाशकारकम्, नमामि विघ्नेश्वर पाद पंकजम्।।
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